लुधियाना ब्लास्ट: धमाके ने खड़े किए कई सवाल, जिस इमारत को दहलाया उसी के नीचे पुलिस चौकी, आसपास अधिकारियों के दफ्तर
श्री दरबार साहिब में बेअदबी की घटना के बाद पंजाब के खुफिया विभाग और केंद्र की एजेंसियों ने इनपुट दिए थे कि पंजाब में चुनाव है और कुछ शरारती तत्व राज्य का माहौल खराब कर सकते हैं। इनपुट मिलने के बाद पुलिस की तरफ से पंजाब के सभी धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी लेकिन किसी ने यह नहीं सोचा था कि कोई अदालत परिसर में ब्लास्ट की घटना को भी अंजाम दे जाएगा।
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पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का गढ़ कहे जाने वाले कचहरी परिसर की सुरक्षा को चुनौती देते हुए शरारती तत्वों ने गुरुवार को अदालत की दूसरी मंजिल पर बम ब्लास्ट कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जिस जगह पर ब्लास्ट हुआ है, वह जगह पुलिस कमिश्नर दफ्तर के बिल्कुल पीछे है और पुलिस अधिकारियों को ब्लास्ट होने की भनक तक नहीं लगी।
पुलिस का सारा खुफिया तंत्र पूरी तरह से फेल हो गया। वैसे तो डीसी दफ्तर और पुलिस कमिश्नर दफ्तर के साथ-साथ अदालत परिसर के अंदर बिना चेकिंग के किसी व्यक्ति को जाने की इजाजत नहीं है लेकिन गुरुवार को चाक चौबंद सुरक्षा को चुनौती देते हुए शरारती तत्व परिसर के अंदर बम ले गए।
पुलिस की सुरक्षा पर सवालिया निशान इसलिए भी खड़ा होता है कि जिस बिल्डिंग में ब्लास्ट हुआ है, उसके नीचे ही पुलिस चौकी बनी हुई है और हर समय सीनियर अधिकारी वहां मौजूद रहते हैं फिर जो दो रास्ते अंदर जाने के लिए बने हैं, वहां भी मेटल डिटेक्टर लगे हैं। इसके बावजूद शरारती तत्वों का वहां विस्फोटक लेकर पहुंच जाना गंभीर सवाल है।
फिरोजपुर मेन रोड पर पुलिस कमिश्नर दफ्तर है, जहां पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर के साथ सभी सीनियर अधिकारी बैठते हैं। सीआईए स्टाफ के अलावा क्राइम से संबंधित तमाम अधिकारी भी वहां रहते हैं। किसी आम व्यक्ति को वहां जाने की इजाजत नहीं है। कोई बैग भी लेकर आता है तो उसकी भी ठीक से जांच की जाती है। उसके साथ ही आरटीओ दफ्तर है, जहां हजारों लोगों का रोजाना आना-जाना होता है। चंद कदमों पर ही डीसी दफ्तर है, जहां डिप्टी कमिश्नर वरिंदर कुमार शर्मा समेत प्रशासनिक अधिकारियों का पूरा अमला बैठता है। कुछ ही कदम दूरी पर कोर्ट कांप्लेक्स शुरू हो जाता है और अदालत परिसर को भी रास्ता जाता है।
इतनी बड़ी संख्या में पुलिस होने के बावजूद बम लेकर कैसे पहुंचा व्यक्ति
अदालत परिसर के बाथरूम में ब्लास्ट होने के बाद अदालत की सुरक्षा पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तो पुलिस का यहां आना जाना काफी रहता है। रोजाना विचाराधीन कैदी, मामलों में नामजद और जेलों से हवालाती पेशी पर आते हैं। मैटल डिटेक्टर से होकर सब गुजरते हैं लेकिन कहा जा रहा है कि मैटल डिटेक्टर के पास कोई नहीं बैठा होता, जिसका फायदा बम लेकर जाने वाले व्यक्ति को हो गया। इसके अलावा अदालत परिसर में जाने वाले कई रास्ते ऐसे हैं, जहां कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। अब यह देखा जा रहा है कि बम लेकर जाने वाला शख्स कौन से रास्ते से अंदर घुसा।
कोर्ट में इंट्री के रास्ते 12, सिर्फ तीन पर मेटल डिटेक्टर
लुधियाना कोर्ट परिसर में तैनात सरकारी मुलाजिमों के अलावा कोर्ट की सुनवाई में आने वालों का आंकड़ा देखें तो 25 हजार लोग रोजाना यहां आते है। इन सभी की सुरक्षा राम भरोसे है। सात मंजिला कोर्ट परिसर में पहुंचने के 12 रास्ते हैं। इसमें महज तीन फ्रंट रास्तों पर ही मेटल डिटेक्टर हैं। बाकी बचे नौ रास्तों पर कोई सुरक्षा का इंतजाम नहीं है। यही कारण है कि बम ब्लास्ट करने के लिए लुधियाना कोर्ट परिसर सबसे बड़ा साफ्ट टारगेट बना।
लुधियाना कोर्ट परिसर में इस समय 55 अदालत लगती हैं। प्रत्येक अदालत में 10 मुलाजिम काम करते है। यानी 55 सौ मुलाजिम तो सिर्फ कोर्ट में काम करते है। इसके अलावा कोर्ट परिसर के अंदर लगभग तीन हजार वकील काम करते है, प्रत्येक वकील के पास एक मुंशी काम करता है। एक अदालत में 100 केस सुनवाई के लिए लगते है। ऐसे में कोर्ट परिसर तक पहुंचे के लिए कुल 12 रास्ते है।
इसमें तीन रास्ते फ्रंटलाइन पर है, जहां पर मेटल डिटेक्टर के साथ पुलिस मुलाजिम तैनात रहते है। इनके अलावा बार रूम से तीन, बिजली बोर्ड दफ्तर साइड से एक, डाकघर के साथ एक, परिसर के पिछली तरफ से एक, कंज्यूमर कोर्ट की तरफ से एक और दो अन्य छोटे रास्ते है। इन सभी रास्तों पर सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है। जिन तीन रास्तों पर पुलिस मुलाजिम बैठते भी है, वहां पर अंदर जाने वाले व्यक्ति से कोई जांच नहीं की जाती है।