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साफ्टा से सस्ता आयात, साइकिल उद्योग का पहिया थमा

Sun, 11 May 2014 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना Updated Sun, 11 May 2014 10:27 PM IST
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bicycle, industry, cheap, imports
साउथ एशिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (साफ्टा) समझौते के बाद बांग्लादेश, श्रीलंका इत्यादि देशों से न्यूनतम ड्यूटी पर आयात हो रहे सस्ते साइकिल एवं पार्ट्स ने घरेलू साइकिल उद्योग का पहिया थाम लिया है।
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आयात में हो रही लगातार वृद्धि के कारण विदेशी और घरेलू बाजार में इंडस्ट्री के पैर उखड़ रहे हैं। 2009-10 में साइकिल और पार्ट्स का आयात केवल 300 करोड़ था, जो अब उछलकर 1700 करोड़ तक पहुंच गया है। इसका साठ फीसदी तक आयात साफ्टा देशों के रास्ते हो रहा है। जबकि निर्यात में लगातार गिरावट का रुख है।
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साइकिल उद्योग का तर्क है कि घरेलू इंडस्ट्री को बचाने के लिए साफ्टा समझौते की शर्तों का कड़ाई से पालन कराना होगा। दूसरे घरेलू उद्योग को बचाने के लिए सेफगार्ड या एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाना होगा। साइकिल उद्योग को विदेशी चुनौती से बचाने के लिए यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (यूसीपीएमए) केंद्र में 16 मई के बाद बनने वाली नई सरकार को अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन देगा।
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साफ्टा देशों से साइकिल एवं पार्ट्स का आयात 6.3 फीसदी ड्यूटी पर किया जा सकता है, जबकि चीन, ताईवान और अन्य देशों से साइकिल पर तीस फीसदी और पार्ट्स पर बीस फीसदी ड्यूटी है। एसोसिएशन के प्रधान चरणजीत सिंह विश्वकर्मा कहते हैं कि सस्ते आयात से उद्योग को बचाने के लिए सरकार को उत्पादों पर वजन के अनुसार ड्यूटी कैप लगाना होगा।



विश्वकर्मा ने कहा कि सस्ते आयात के कारण स्टील बॉल, स्पोक, बास्केट, सेडल, पैडल, एलाय लीवर, कोन इत्यादि पार्ट्स बनाने वाली इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं। हालत यह है कि साइकिल एवं पार्ट्स का निर्यात 1500 करोड़ से कम होकर करीब 1100 करोड़ रह गया है। साइकिल एवं पार्ट्स के ओवरसीज मार्केट में चीन का 85 फीसदी कब्जा है। जबकि विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश होने के बावजूद भारत का शेयर विश्व बाजार में नाममात्र है। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इंडस्ट्री को प्रतिस्पर्धात्मक बनाना होगा।




इसके लिए उत्पादन लागत को कम करना अनिवार्य है। यूसीपीएमए की मांग है कि इंडस्ट्री को स्टील नियंत्रित मूल्य पर दिया जाए। रिसर्च एंड डेवलपमेंट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तैयार कर सहूलियतें मुहैया कराई जाएं। हाई-एंड साइकिल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग किया जाए। निर्यात बढ़ाने को ड्यूटी ड्रा-बैक की दरों में इजाफा किया जाए। एलाय तकनीक को बढ़ावा देने के लिए यत्न किए जाएं।
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