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Ludhiana News: बिजली संशोधन व बीज विधेयक के खिलाफ बड़े संघर्ष का एलान, 28 को बैठक में होगी घोषणा

Wed, 26 Nov 2025 08:24 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Nov 2025 08:24 PM IST
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A major protest has been announced against the Electricity Amendment and Seed Bills, and the announcement will be made at a meeting on the 28th.
-किसान आंदोलन की पांचवीं वर्षगांठ पर चंडीगढ़ में एसकेएम की महापंचायत में जुटे किसान
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-एमएसपी, श्रम कानूनों समेत 13 सूत्रीय मांग पत्र जारी
-पीयू मोर्चे को समर्थन, सीनेट चुनाव शीघ्र कराने की मांग
-चंडीगढ़ पर पंजाब का हक और हमेशा रहेगा : राजेवाल
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार को किसान आंदोलन की पांचवीं वर्षगांठ पर चंडीगढ़ के सेक्टर-43 के दशहरा ग्राउंड में महापंचायत की जिसमें प्रदेश भर से बड़ी संख्या में किसान जुटे। बिजली संशोधन और बीज विधेयक को लेकर एसकेएम ने बड़े संघर्ष का एलान किया। 28 नवंबर को इस संबंध में बैठक होगी जिसमें मोर्चा इसकी घोषणा कर सकता है। बुधवार को बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर ट्रॉली पर सामान लेकर चंडीगढ़ पहुंचे थे। बहुत से किसान बसों के माध्यम से आए। इस दौरान सुरक्षा के लिए पुलिस के साथ आईटीबीपी के जवान भी तैनात थे।
महापंचायत में गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ने का आह्वान किया गया। एसकेएम ने एमएसपी, श्रम कानूनों समेत 13 सूत्रीय मांग पत्र पंजाब सरकार में संयुक्त प्रमुख सचिव नवराज सिंह और केंद्र के नाम एसडीएम इशा कंबोज को सौंपा। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि केंद्र का खेती में हस्तक्षेप लगातार बढ़ जाता जा रहा है। बिजली संशोधन और बीज बिल की सीधी मार किसानों पर पड़ेगी। इन विधेयकों के जरिये सरकार कृषि से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों को कॉर्पोरेट को सौंप रही है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पर पंजाब का हक है और हमेशा रहेगा। उन्होंने केंद्र को ऐसा कोई भी प्रस्ताव न लाने की चेतावनी दी जिससे पंजाब का चंडीगढ़ पर अधिकार कमजोर हो। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय के मोर्चे को भी अपना समर्थन दिया है और जल्द चुनाव करवाने की मांग की। राजेवाल ने आरोप लगाया कि पंजाब खुद पानी संकट से जूझ रहा है और दूसरे राज्यों को दे रहा है।
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किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि बिजली बिल संशोधन बड़ा खतरा है जिसे वापस करवाया जाएगा। अगर किसान एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे तो हर संघर्ष में उनकी जीत होगी। बिजली संशोधन विधेयक से बिजली काउंसिल के गठन का अधिकार केंद्र के पास होगा जिसकी कमान केंद्रीय बिजली मंत्री को मिलेगी। यह सीधे-सीधे बिजली विभाग के निजीकरण की तैयारी है। राज्यों के अधिकार छीन लिए जाएंगे। किसान नेता बूटा सिंह ने कहा कि बिजली संशोधन विधेयक को शुरू हो रहे संसद सत्र में लाने की तैयारी की जा रही है। इस विधेयक पर पंजाब सरकार से सुझाव मांगे गए थे लेकिन सरकार अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।
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किसानों ने ये मांगें भी रखीं
-किसानों ने मुक्त व्यापार समझौते से कृषि क्षेत्र को बाहर रखने, बिजली संशोधन बिल, बीज बिल, श्रम कानूनों, केंद्रीय शिक्षा नीति और बीबीएमबी पर अधिकार कमजोर करने वाले फैसले रद्द किया जाए।
-चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार कमजोर करने वाला प्रस्ताव रद्द करने और इसे पंजाब को सौंपा जाए।
-पंजाब सरकार से बाढ़ के कारण हुए नुकसान का पूरा मुआवजा दे। पराली जलाने पर किसानों पर दर्ज केस रद्द किए जाएं।
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