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तिलहन और दालों की पैदावार पर केंद्रित करे पंजाब: पवार
Ludhiana
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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लुधियाना। केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने साफ किया है कि अगामी रबी सीजन के लिए गेहूं का बढ़ा हुआ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अगलेे दस दिन में घोषित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उत्तर पूर्वी भारत में चावल की खेती को बढ़ावा दे रही है, पंजाब को तिलहन एवं दालों की पैदवार बढ़ाने पर फोकस करना होगा।
पवार मंगलवार को लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में शुरू हुई कृषि विज्ञान केंद्रों की 7वीं सालाना काफ्रेंस के उद्घाटन के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने दो टूक कहा कि पंजाब क ो गेहूं, धान फसल चक्र को तोड़ना होगा, क्योंकि इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति, पानी के स्तर और गुणवत्ता पर विपरीत असर हो रहा है। कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एवं प्राइसेस (सीएसीपी) ने आगामी रबी सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी पिछले साल के 1285 रुपये प्रति क्विंटल पर ही स्थिर रखने की सिफारिश की थी। इसे लेकर पंजाब सरकार ने केंद्र के पास अपना विरोध जताया था और किसानों से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्रालय मानता है कि किसानों की इनपुट लागत में इजाफा हुआ है, लिहाजा अगले रबी सीजन के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ना चाहिए। इस संबंध में कृषि मंत्रालय का प्रस्ताव तैयार है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से हरी झंडी मिलते ही नए एमएसपी का ऐलान कर दिया जाएगा।
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धान के कारण पंजाब की उपजाऊ शक्ति घटी
पंजाब में गेहूं धान फसल चक्र पर पवार ने कहा कि धान की बीजाई के चलते पंजाब में जमीन की उपजाऊ शक्ति, पानी की गुणवत्ता एवं स्तर में गिरावट आ रही है। दूसरी हरित क्रांति के तहत केंद्र सरकार उत्तर पूर्वी भारत में चावल की खेती को बढ़ावा दे रही है। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओड़िसा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश पर फोकस किया गया है। सरकार इन राज्यों में देश का नया राइस बाउल बनाना चाह रही है। इन राज्यों से केंद्रीय पूल में चावल की आमद लगातार बढ़ रही है। इसलिए पंजाब सरकार को कहा गया है कि धान के क्षेत्र को कम करे। पवार ने सुझाव दिया है कि देश में 30 हजार करोड़ के तेल बीज और दस हजार करोड़ की दालों का आयात किया जा रहा है। इसलिए पंजाब को तेल बीज एवं दालों की पैदवार बढ़ाने पर फोकस करना होगा।
विकें द्रीकरण पर सहयोग को तैयार
पंजाब ने विकेंद्रीकरण को आगे बढ़ाने के लिए गेहूं धान की तर्ज पर दालों एवं तेल बीज की एमएसपी पर सरकारी खरीद करने की मांग रखी है। इस पर राज्य के मुख्यमंत्री से बात की जाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है और सरकार धान के एरिया को कम करके दाल, फल, सब्जी, मक्की, गन्ना इत्यादि का उत्पादन बढ़ाने को सहमत है। राज्य सरकार के रुख को देख कर केंद्र हर तरह की मदद के लिए तैयार है।
खराब हो जाते हैं 50 हजार करोड़ के फल और सब्जी
कृषि मंत्री के अनुसार देश में किसान से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचते पहुंचते पचास हजार करोड़ रुपये के फल एवं सब्जी खराब हो जाते हैं। इसके लिए कोल्ड चेन समेत इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से कृषि क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, इसका फायदा किसान को होगा।
पाक को निर्यात करने की इजाजत मांगी
पवार ने कहा कि पंजाब सरकार ने वाघा सीमा के जरिए पाकिस्तान को मीट, दूध उत्पाद, सब्जी, फल इत्यादि निर्यात करने की इजाजत मांगी है।
गोदामों पर पंजाब से नहीं मिला अच्छा रिस्पांस
इस बाबत केंद्रीय वाणिज्य एवं विदेश मंत्रालय से बात की जा रही है। अनाज गोदामों की कमी पर पवार ने कहा कि केंद्र नौ साल की लीज स्कीम के तहत देश में चालीस लाख टन की नई भंडारण क्षमता तैयार हो रही है। लेकिन महंगी जमीन के कारण पंजाब एवं महाराष्ट्र में इस स्कीम को अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है। यदि पंजाब सरकार सस्ती जमीन मुहैया कराए तो यहां भी इस स्कीम के तहत नए गोदाम बनाए जा सक ते हैं।
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पवार मंगलवार को लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में शुरू हुई कृषि विज्ञान केंद्रों की 7वीं सालाना काफ्रेंस के उद्घाटन के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने दो टूक कहा कि पंजाब क ो गेहूं, धान फसल चक्र को तोड़ना होगा, क्योंकि इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति, पानी के स्तर और गुणवत्ता पर विपरीत असर हो रहा है। कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एवं प्राइसेस (सीएसीपी) ने आगामी रबी सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी पिछले साल के 1285 रुपये प्रति क्विंटल पर ही स्थिर रखने की सिफारिश की थी। इसे लेकर पंजाब सरकार ने केंद्र के पास अपना विरोध जताया था और किसानों से भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई थी।
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कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि मंत्रालय मानता है कि किसानों की इनपुट लागत में इजाफा हुआ है, लिहाजा अगले रबी सीजन के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ना चाहिए। इस संबंध में कृषि मंत्रालय का प्रस्ताव तैयार है। केंद्रीय मंत्रिमंडल से हरी झंडी मिलते ही नए एमएसपी का ऐलान कर दिया जाएगा।
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धान के कारण पंजाब की उपजाऊ शक्ति घटी
पंजाब में गेहूं धान फसल चक्र पर पवार ने कहा कि धान की बीजाई के चलते पंजाब में जमीन की उपजाऊ शक्ति, पानी की गुणवत्ता एवं स्तर में गिरावट आ रही है। दूसरी हरित क्रांति के तहत केंद्र सरकार उत्तर पूर्वी भारत में चावल की खेती को बढ़ावा दे रही है। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओड़िसा, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश पर फोकस किया गया है। सरकार इन राज्यों में देश का नया राइस बाउल बनाना चाह रही है। इन राज्यों से केंद्रीय पूल में चावल की आमद लगातार बढ़ रही है। इसलिए पंजाब सरकार को कहा गया है कि धान के क्षेत्र को कम करे। पवार ने सुझाव दिया है कि देश में 30 हजार करोड़ के तेल बीज और दस हजार करोड़ की दालों का आयात किया जा रहा है। इसलिए पंजाब को तेल बीज एवं दालों की पैदवार बढ़ाने पर फोकस करना होगा।
विकें द्रीकरण पर सहयोग को तैयार
पंजाब ने विकेंद्रीकरण को आगे बढ़ाने के लिए गेहूं धान की तर्ज पर दालों एवं तेल बीज की एमएसपी पर सरकारी खरीद करने की मांग रखी है। इस पर राज्य के मुख्यमंत्री से बात की जाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है और सरकार धान के एरिया को कम करके दाल, फल, सब्जी, मक्की, गन्ना इत्यादि का उत्पादन बढ़ाने को सहमत है। राज्य सरकार के रुख को देख कर केंद्र हर तरह की मदद के लिए तैयार है।
खराब हो जाते हैं 50 हजार करोड़ के फल और सब्जी
कृषि मंत्री के अनुसार देश में किसान से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचते पहुंचते पचास हजार करोड़ रुपये के फल एवं सब्जी खराब हो जाते हैं। इसके लिए कोल्ड चेन समेत इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की जरूरत है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से कृषि क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, इसका फायदा किसान को होगा।
पाक को निर्यात करने की इजाजत मांगी
पवार ने कहा कि पंजाब सरकार ने वाघा सीमा के जरिए पाकिस्तान को मीट, दूध उत्पाद, सब्जी, फल इत्यादि निर्यात करने की इजाजत मांगी है।
गोदामों पर पंजाब से नहीं मिला अच्छा रिस्पांस
इस बाबत केंद्रीय वाणिज्य एवं विदेश मंत्रालय से बात की जा रही है। अनाज गोदामों की कमी पर पवार ने कहा कि केंद्र नौ साल की लीज स्कीम के तहत देश में चालीस लाख टन की नई भंडारण क्षमता तैयार हो रही है। लेकिन महंगी जमीन के कारण पंजाब एवं महाराष्ट्र में इस स्कीम को अच्छा रिस्पांस नहीं मिला है। यदि पंजाब सरकार सस्ती जमीन मुहैया कराए तो यहां भी इस स्कीम के तहत नए गोदाम बनाए जा सक ते हैं।