इंद्रियां सेवक और आत्मा स्वामी : नवराज

Ludhiana Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
मानसा। इंद्रियां सेवक हैं और आत्मा स्वामी। प्रत्येक इंद्रियों को संयम में रखिये, हर इंद्रियों की वृत्ति परमात्मा में लगाएं। संपत्ति से थोड़ा सुख मिलता है और संयम से बहुत सुख मिलता है। अपनी स्वयं की इंद्रियां शत्रु हैं। इंद्रियां आपके अधीन हैं तो मित्र हैं, पर आप इंद्रियों के अधीन हैं तो वे शत्रु हैं। उक्त विचार पंडित नवराज शास्त्री ने स्थानीय रमन सिनेमा रोड स्थित जय मां मंदिर में कार्तिक महात्म्य की पावन कथा का सुंदर वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि एक बार कर्दम ऋषि सरस्वती नदी के तट पर आदि नारायण परमात्मा का स्मरण करते हैं, उनके घर कपिल देव भगवान प्रगट हुए तो आप भी कर्दम ऋषि जैसा जीवन व्यतीत करिये, आपके घर कपिल देव भगवान प्रगट होंगे, जिनकी माता का नाम देवहुति। आज कर्दम ऋषि भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं, मुझे विवाह करना है, लेकिन मेरे मन में ऐसी भावना है कि घर में सत्संग मिले, मैं स्त्री का संग नहीं मांग रहा, मैं घर में सत्संग मांग रहा हूं। मैं काम पत्नी नहीं धर्म पत्नी चाहता हूं। शास्त्री ने बताया कि ऋषि स्त्री को धर्म का साधन मानते हैं। स्त्री भक्ति का साधन है, भोग का साधन नहीं। पति-पत्नी का पवित्र संबंध परमात्मा के लिए है, धर्म के लिए है।

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