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नशे की ओवर डोज से मर चुके लोगों का नहीं डीजीपी दफ्तर के पास रिकॉर्ड
Updated Sat, 13 Oct 2018 10:29 PM IST
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आरटीआई से नहीं मिला नशे के ओवरडोज से मरने वालों का रिकॉर्ड
जवाब मिला विभिन्न पब्लिक इंफोर्मेशन अफसरों से लें जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। पंजाब में नशे को खत्म करने की शपथ लेकर सत्ता में आई कैप्टन सरकार मामले पर कितना गंभीर है। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि डीजीपी पंजाब दफ्तर के पास इस बात का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। 2018 में नशे की ओवर डोज के कारण कितने लोगों की मौत हो चुकी है। नशे की ओवरडोज से हो चुकी मौत को लेकर आरटीआई में मांगी गई जानकारी देने की जगह डीजीपी दफ्तर ने विभिन्न पब्लिक इंफोर्मेशन अफसर से संपर्क करने के लिए कहा है। डीजीपी ऑफिस के जवाब को लेकर अब फर्स्ट अपिलेंट अथारिटी के पास अपील दायर की गई है।
लुधियाना निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभ्रवाल के अनुसार उन्होंने डीजीपी दफ्तर से यह जानकारी मांगी थी कि जनवरी 2018 से सितंबर के अंत तक कितने लोगों की मौत नशे की ओवर डोज से हुई है। इसका जवाब मिलने के बाद उन्हें बड़ी हैरानी हुई है कि वह खुद विभिन्न पब्लिक इंफोर्मेशन अधिकारियों के साथ संपर्क कर जानकारी ले। इसी लेटर में एक पुराने केस का हवाला दिया गया है। सवाल है कि आखिरकार नशा तस्करी के खिलाफ सरकार इतना कुछ कर रही है, तो उनके पास यह रिकॉर्ड क्यों नहीं कि कितने लोग नशे की भेंट चढ़ चुके हैं।
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जवाब मिला विभिन्न पब्लिक इंफोर्मेशन अफसरों से लें जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। पंजाब में नशे को खत्म करने की शपथ लेकर सत्ता में आई कैप्टन सरकार मामले पर कितना गंभीर है। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि डीजीपी पंजाब दफ्तर के पास इस बात का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। 2018 में नशे की ओवर डोज के कारण कितने लोगों की मौत हो चुकी है। नशे की ओवरडोज से हो चुकी मौत को लेकर आरटीआई में मांगी गई जानकारी देने की जगह डीजीपी दफ्तर ने विभिन्न पब्लिक इंफोर्मेशन अफसर से संपर्क करने के लिए कहा है। डीजीपी ऑफिस के जवाब को लेकर अब फर्स्ट अपिलेंट अथारिटी के पास अपील दायर की गई है।
लुधियाना निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभ्रवाल के अनुसार उन्होंने डीजीपी दफ्तर से यह जानकारी मांगी थी कि जनवरी 2018 से सितंबर के अंत तक कितने लोगों की मौत नशे की ओवर डोज से हुई है। इसका जवाब मिलने के बाद उन्हें बड़ी हैरानी हुई है कि वह खुद विभिन्न पब्लिक इंफोर्मेशन अधिकारियों के साथ संपर्क कर जानकारी ले। इसी लेटर में एक पुराने केस का हवाला दिया गया है। सवाल है कि आखिरकार नशा तस्करी के खिलाफ सरकार इतना कुछ कर रही है, तो उनके पास यह रिकॉर्ड क्यों नहीं कि कितने लोग नशे की भेंट चढ़ चुके हैं।
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