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प्लास्टिक सर्जनों की वर्कशॉप में बताई 3-डी मेडिकल प्रिंटिंग की खूबियां
Updated Wed, 21 Mar 2018 09:35 PM IST
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बताई 3-डी मेडिकल प्रिंटिंग की खूबियां
प्लास्टिक सर्जनों की वर्कशाप में माहिरों ने दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
प्लास्टिक सर्जनों व न्यूरो सर्जनों को 3-डी मेडिकल प्रिंटिंग की खूबियां बताने के लिए अवेयरनेस वर्कशाप का आयोजन किया गया। एसपीएस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी व न्यूरो सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित इस वर्कशाप में बताया गया कि इस तकनीक ने प्लास्टिक सर्जरी के फील्ड में क्रांति आ गई है।
एसपीएस के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. आशीष गुप्ता ने कहा कि सर्जरी के क्षेत्र में 3-डी प्रिंटिंग तकनीक भारत में 2014 में आ गई थी। प्रचार नहीं हो पाने के कारण ज्यादातर सर्जनों को इसकी जानकारी नहीं हो पाई। इसी कारण इसका इस्तेमाल उतने बड़े स्तर पर नहीं हो पाया, जितने पर होना चाहिए था। जिन लोगों को दुर्घटना या ट्यूमर के कारण सिर या चेहरे की सर्जरी करानी पड़ती है, साधारण सर्जरी के बाद वहां निशान रह जाता था। मगर इस नई तकनीक से सर्जरी से हुए गड्ढों को भरने के लिए 3-डी प्रिंटिंग से डिजाइन की गई हड्डियों और मॉडल का उपयोग करके हूबहू रूप दिया जा सकता है।
न्यूरो सर्जरी विभाग के कोआर्डिनेटर व सीनियर कंसल्टेंट डॉ. दीपिंदर सिंह ने कहा कि इस तकनीक के बाद दिमाग में ट्यूमर, एनिरिज्म और क्रोनियोप्लास्टी कराने वाले मरीजों की सर्जरी करने की योजना बनाना बेहद आसान हो जाएगा। इसके साथ ही सर्जरी के बारे में मरीज और उसके परिवार वालों को मॉडल बनाकर समझाना आसान हो जाएगा। वर्कशाप में डीएमसीएच व सीएमसीएच के अलावा अन्य कई संस्थानों से प्लास्टिक सर्जन व न्यूरो सर्जन ने शिरकत की।
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प्लास्टिक सर्जनों की वर्कशाप में माहिरों ने दी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना।
प्लास्टिक सर्जनों व न्यूरो सर्जनों को 3-डी मेडिकल प्रिंटिंग की खूबियां बताने के लिए अवेयरनेस वर्कशाप का आयोजन किया गया। एसपीएस अस्पताल के प्लास्टिक सर्जरी व न्यूरो सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित इस वर्कशाप में बताया गया कि इस तकनीक ने प्लास्टिक सर्जरी के फील्ड में क्रांति आ गई है।
एसपीएस के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. आशीष गुप्ता ने कहा कि सर्जरी के क्षेत्र में 3-डी प्रिंटिंग तकनीक भारत में 2014 में आ गई थी। प्रचार नहीं हो पाने के कारण ज्यादातर सर्जनों को इसकी जानकारी नहीं हो पाई। इसी कारण इसका इस्तेमाल उतने बड़े स्तर पर नहीं हो पाया, जितने पर होना चाहिए था। जिन लोगों को दुर्घटना या ट्यूमर के कारण सिर या चेहरे की सर्जरी करानी पड़ती है, साधारण सर्जरी के बाद वहां निशान रह जाता था। मगर इस नई तकनीक से सर्जरी से हुए गड्ढों को भरने के लिए 3-डी प्रिंटिंग से डिजाइन की गई हड्डियों और मॉडल का उपयोग करके हूबहू रूप दिया जा सकता है।
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न्यूरो सर्जरी विभाग के कोआर्डिनेटर व सीनियर कंसल्टेंट डॉ. दीपिंदर सिंह ने कहा कि इस तकनीक के बाद दिमाग में ट्यूमर, एनिरिज्म और क्रोनियोप्लास्टी कराने वाले मरीजों की सर्जरी करने की योजना बनाना बेहद आसान हो जाएगा। इसके साथ ही सर्जरी के बारे में मरीज और उसके परिवार वालों को मॉडल बनाकर समझाना आसान हो जाएगा। वर्कशाप में डीएमसीएच व सीएमसीएच के अलावा अन्य कई संस्थानों से प्लास्टिक सर्जन व न्यूरो सर्जन ने शिरकत की।
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