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बेअंत सिंह हत्या कांड के आरोपी जगतार तारा को एक मामले में न्यायलय ने किया बरी - आईएसआई से ट्रेनिंग लेकर लौटे सन्नी को एक वर्ष की

Fri, 22 Feb 2019 10:10 PM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Fri, 22 Feb 2019 10:10 PM IST
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बेअंत सिंह हत्या कांड के आरोपी जगतार तारा को एक मामले में न्यायलय ने किया बरी - आईएसआई से ट्रेनिंग लेकर लौटे सन्नी को एक वर्ष की
आतंकी तारा एक मामले में अदालत से बरी
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आईएसआई से ट्रेनिंग लेकर लौटे सन्नी को एक वर्ष की कैद
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा। पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के आरोपी आतंकी जगतार सिंह तारा को शुक्रवार स्थानीय अदालत ने एक मामले में बरी कर दिया जबकि उसके साथी रमनदीप सन्नी को एक वर्ष की कैद की सजा सुनाई। तारा की पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा की गई थी और अदालत ने उससे कई सवाल भी किए थे। बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलों के बाद उन्हें बरी किया गया जबकि असलाह एक्ट के तहत सन्नी को सजा सुनाई गई।

आठ नवंबर 2014 को सीआई स्टाफ ने गुप्त सूचना के आधार पर रमनदीप सिंह सन्नी को उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह थाईलैंड में आईएसआई से बम बनाने की ट्रेनिंग लेकर भारत लौटा था। पुलिस के अनुसार सन्नी ने वहां तारा से मुलाकात की और वहीं तारा ने उसे आईएसआई से बम बनाने की ट्रेनिंग दिलवाई थी। पुलिस ने सन्नी के घर से बम बनाने का सामान बारूद, बैटरी, लोहे की पाइपें, बिजली के तार, 32 बोर का रिवाल्वर, कारतूस और पांच लैटर हेड पैड भी बरामद किए। तारा ने अपना अलग खालिस्तान टाइगर फोर्स संगठन बनाया था जिसका वह सरगर्म सदस्य था। सन्नी से पूछताछ के बाद पुलिस ने जगतार सिंह के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था और 2014 से लगातार बठिंडा कोर्ट में उसकी पेशी चल रही थी। रमनदीप सन्नी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरपाल सिंह खारा ने बहस के दौरान अदालत को बताया कि पुलिस ने सन्नी के बब्बर खालसा से संबंधित कोई भी पुख्ता सबूत पेश नहीं किए। विरोधी पक्ष के वकील से उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा अपने एफआईआर में लिखा कि अमरजीत सिंह ने 5495 रुपये भेजे जिसका कोई भी सबूत उनके पास नहीं था। बहस के दौरान बब्बर खालसा संबंधी जो दस्तावेज पेश किए गए वह केवल फोटोकापी थी जबकि असल कापी उनके पास नहीं थी। पुलिस ने लिखा था कि सन्नी से बम बनाने का पाउडर व अन्य सामान बरामद किया गया लेकिन इस सामान की किसी भी लैब में जांच नहीं करवाई गई । पुलिस ने सन्नी पर आरोप लगाया कि उसने अपनी फेसबुक पर रिवाल्वर हाथ में पकड़े फोटो अपलोड किए। क्रास सवाल में पुलिस इसे भी साबित नहीं कर सकी। वकीलों की जिरह के बाद न्यायाधीश केएस बाजवा ने सबूतों के अभाव को देखते हुए जगतार तारा को बरी कर दिया जबकि आर्म्स एक्ट के तहत सन्नी को एक वर्ष की सजा सुनाई।
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