{"_id":"59bab0614f1c1bb5688b4901","slug":"51505407073-ludhiana-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्ज से मानसिक तौर पर किसान ने निगली सप्रे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्ज से मानसिक तौर पर किसान ने निगली सप्रे
Updated Thu, 14 Sep 2017 10:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्प्रे निगलने वाले किसान ने तोड़ा दम
तीन लाख के कर्जदार किसान अमरजीत था मानसिक परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
रामां मंडी के गांव बाघा में दो दिन पहले स्प्रे निगलने वाले एक किसान ने वीरवार को निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान अमरजीत सिंह (65) के तौर पर हुई है। उसने दो दिन पहले मानसिक परेशानी में स्प्रे पी ली थी।
इस दौरान संबंधित थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल तलवंडी साबो पहुंचाया। मृतक के बेटे जसकरण ने बताया कि उसके पिता ठेके पर जमीन लेकर खेती करता था। उनके सिर पर सरकारी और प्राइवेट करीब तीन लाख कर्ज था। इस वजह से वह मानसिक तौर पर परेशान था।
किसान यूनियन नेता शिंगारा सिंह मान का कहना था कि कांग्रेस को सत्ता में आने के लिए किसानों के साथ झूठे वादे नहीं करने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि सरकार के झूठे वादों की बलि किसान चढ़ रहे हैं। इस वजह से पहले ही किसान कर्ज की मार से खुदकुशी कर रहे थे, लेकिन अब मानसिक तौर पर भी परेशान होने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
तीन लाख के कर्जदार किसान अमरजीत था मानसिक परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
रामां मंडी के गांव बाघा में दो दिन पहले स्प्रे निगलने वाले एक किसान ने वीरवार को निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। मृतक की पहचान अमरजीत सिंह (65) के तौर पर हुई है। उसने दो दिन पहले मानसिक परेशानी में स्प्रे पी ली थी।
इस दौरान संबंधित थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल तलवंडी साबो पहुंचाया। मृतक के बेटे जसकरण ने बताया कि उसके पिता ठेके पर जमीन लेकर खेती करता था। उनके सिर पर सरकारी और प्राइवेट करीब तीन लाख कर्ज था। इस वजह से वह मानसिक तौर पर परेशान था।
विज्ञापन
किसान यूनियन नेता शिंगारा सिंह मान का कहना था कि कांग्रेस को सत्ता में आने के लिए किसानों के साथ झूठे वादे नहीं करने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि सरकार के झूठे वादों की बलि किसान चढ़ रहे हैं। इस वजह से पहले ही किसान कर्ज की मार से खुदकुशी कर रहे थे, लेकिन अब मानसिक तौर पर भी परेशान होने लगे हैं।
विज्ञापन