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नतीजे को लेकर बरनाला के गांव धनौला में चार दिन बाद भी स्थिति विस्फोटक
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विजेता उम्मीदवार को 42 घंटे बाद आया फोन, तुम नहीं जीते
जिला प्रशासन ने विजेता प्रत्याशी के घर के बाहर चिपकाए नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। राज्य में 30 दिसंबर को हुए पंचायत चुनाव में जहां राज्य के विभिन्न गांव में पंचायत चुनाव में हाथापाई से लेकर तकरारबाजी तक हो गई, वहीं पंचायत चुनाव के 4 दिन बीत जाने के बाद भी धनौला खुर्द में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पंचायत चुनाव के चलते विजेता प्रत्याशी को जीतने से 42 घंटे बाद फोन पर बड़ा झटका दिया गया व उसे फोन पर वोट बराबर बोल टॉस के लिए बुधवार को बुलाया गया था। इस पर हारा हुआ दल तो पहुंच गया, लेकिन विजेता पक्ष नहीं पहुंचा, जिस कारण टॉस नहीं हुआ। एसडीएम बरनाला ने उसे नोटिस भेजकर टॉस के लिए आने के लिए बोला गया, लेकिन वह शाम तक नहीं पहुंचा पाया। बता दें कि धनौला खुर्द के वार्ड 6 से 2 वोट से विजेता बने प्रत्याशी जोत राम ने अपनी जीत के ऐलान के बाद समर्थकों सहित वार्ड में रैली निकाल वार्ड निवासियों का धन्यवाद कर लड्डूू बांटे, जिसमें सबसे पहले हारे प्रत्याशी ने ही विजेता पंच के गले में हार डाला। लेकिन 30 दिसंबर को रात 9 बजे फैसला घोषणा के 42 घंटे बाद जीते हुए आजाद प्रत्याशी की उस समय दिन में तारे दिखाई देने लगे व नींद उड़ गई, जब एक जनवरी को उसे एसडीएम दफ्तर से फोन कर बोला गया कि वह जीते नहीं हैं, उनकी जीत का एलान गलती से कर दिया गया है। पंच के लिए वार्ड 6 के दोनों प्रत्याशियों के वोट एक समान हैं व बराबर का मुकाबला है, जिस कारण उन्हें टॉस के लिए एसडीएम दफ्तर आना होगा। इतनी सूचना मिली नहीं कि जोतराम के समर्थकों में हड़कंप मच गया व रोष फैल गया, जिसके बाद उनके द्वारा चुनाव आयोग व जिला प्रशासन के खिलाफ रोष जाहिर किया व धक्केशाही का आरोप लगाया गया। इस मौके पर उन्होंने प्रशासन पर मौजूदा सरकार के पंच के हार जाने के कारण राजनीतिक दबाव के कारण इस तरह का फैसला लेने का आरोप लगाया। प्रत्याशी जोतराम ने बताया कि उनके सहित कुल 5 प्रत्याशी थे। वोटों की गिनती के बाद उन्हें 75 वोट व उनके विरोधी दिलप्रीत को 72 वोट आए थे। उनके सामने ही 30 दिसंबर को रात 9 बजे तक 4 बार मतगणना करके ही सरपंच के बक्से से पंच के पांच वोट निकाले गए। जिसमें 1 वोट उनके बाद नंबर दो पर रहे दिलप्रीत, 2 वोट सुरजीत, 1 लखविंदर सिंह व 1 रुपिंदर को मिला। दिलप्रीत के वोट बढ़कर 73 हो गए। वहां पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें रात 9 बजे विजेता घोषित कर दिया था, जिसके बाद वह गांव में खुशी मनाने लग गए व दिलप्रीत की तरफ से भी उसे हार पहनाया गया। डीसी बरनाला के मुताबिक अधिकारी ने सोचा शायद सरपंच के बॉक्स से वोट निकल आए, तो उसकी सोच के मुताबिक एक वोट से बराबरी वाली कहानी में जिला प्रशासन द्वारा चुनावी फैसले में घपले की बड़ी आशंका लग रही है, अब देखना होगा कि आज क्या एलान होगा।
जोतराम ने इस घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दिलप्रीत कांग्रेस पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ रहा था व चुनाव से पहले कांग्रेस के बड़े नेताओं द्वारा उन्हें चुनाव न लड़ घर बैठने के लिए कहा था, लेकिन गांव निवासियों के मिले सहयोग व समर्थन के कारण उन्होंने चुनाव लड़ा व विजेता बने। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने चुनाव कमीशन पंजाब को लिखित शिकायत कर दी गई है व अगर इंसाफ नही मिला तो अदालत का दरवाजा खटखटा कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके समर्थक व वह किसी भी कीमत पर नहीं झुकेंगे व न ही वह टॉस में शामिल होंगे। उक्त मामले के बाद जब 2 जनवरी को जोतराम सिंह टॉस के लिए एसडीएम दफ्तर नहीं गए तो शाम उनके घर के दरवाजों पर करीब 4 से अधिक पोस्टर चिपका उन्हें 3 जनवरी को हर हाल में पेश होकर टॉस में शामिल होने के लिए कहा गया। सबसे बड़ी बात उस नोटिस पर हारे हुआ प्रत्याशी सहमति के साइन कर रहा है। नोटिस पर लिखा गया कि विजेता प्रत्याशी को 31 व 1 जनवरी को बुलाया, लेकिन वह हाजिर नहींहुए। जबकि फोन 1 जनवरी को शाम 4 बजे आया। इस संबंध में डीसी धर्मपाल गुप्ता ने कहा कि नोटिस को लगवाने का तो कोई सवाल ही नही है, केवल सूचना होगी। मतगणना के समय चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी ने सोचा की पंच के साथ ही सरपंच के बक्से में मतगणना कर लेते हैं, शायद कोई पंच की वोट निकल आए। जैसे ही पंच का बॉक्स खुला तो उसमें दिलप्रीत को एक वोट से मुकाबला बराबरी का हो गया। शिअद के हलका भदौड़ के इंचार्ज व एडवोकेट सतनाम सिंह राही ने कहा कि जिला प्रशासन उनके साथ धक्केशाही कर रहा है व राजनीतिक दबाव में है। धनौला खुर्द में सरपंच व पंच शिअद के विजेता बनने के कारण कांग्रेस इस बात से परेशान हो गई, कि जिस जगह से जिला परिषद व बलॉक समिति मेंबर विजेता रहा, वहां से पंच व सरपंच एक भी नही है। शिअद के हलका बरनाला के इंचार्ज कुलवंत सिंह कंता ने कहा कि उनके द्वारा हारे हुए प्रत्याशी की चुनाव नतीजे घोषित किए जाने वाली वीडियो है, जिसमें दिलप्रीत सिंह कह रहा है कि कोई गल नहीं, इस बार तू जित गया, ईको गल है, अगली बार मैं वध मेहनत करके जित के दिखाऊंगा, उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन उनके साथ धक्केशाी कर रहा है व राजनीतिक दबाव में है। उनके द्वारा धक्केशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, उनके द्वारा जरूरत पड़ने पर रोष प्रदर्शन किया जाएगा।
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जिला प्रशासन ने विजेता प्रत्याशी के घर के बाहर चिपकाए नोटिस
अमर उजाला ब्यूरो
बरनाला। राज्य में 30 दिसंबर को हुए पंचायत चुनाव में जहां राज्य के विभिन्न गांव में पंचायत चुनाव में हाथापाई से लेकर तकरारबाजी तक हो गई, वहीं पंचायत चुनाव के 4 दिन बीत जाने के बाद भी धनौला खुर्द में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पंचायत चुनाव के चलते विजेता प्रत्याशी को जीतने से 42 घंटे बाद फोन पर बड़ा झटका दिया गया व उसे फोन पर वोट बराबर बोल टॉस के लिए बुधवार को बुलाया गया था। इस पर हारा हुआ दल तो पहुंच गया, लेकिन विजेता पक्ष नहीं पहुंचा, जिस कारण टॉस नहीं हुआ। एसडीएम बरनाला ने उसे नोटिस भेजकर टॉस के लिए आने के लिए बोला गया, लेकिन वह शाम तक नहीं पहुंचा पाया। बता दें कि धनौला खुर्द के वार्ड 6 से 2 वोट से विजेता बने प्रत्याशी जोत राम ने अपनी जीत के ऐलान के बाद समर्थकों सहित वार्ड में रैली निकाल वार्ड निवासियों का धन्यवाद कर लड्डूू बांटे, जिसमें सबसे पहले हारे प्रत्याशी ने ही विजेता पंच के गले में हार डाला। लेकिन 30 दिसंबर को रात 9 बजे फैसला घोषणा के 42 घंटे बाद जीते हुए आजाद प्रत्याशी की उस समय दिन में तारे दिखाई देने लगे व नींद उड़ गई, जब एक जनवरी को उसे एसडीएम दफ्तर से फोन कर बोला गया कि वह जीते नहीं हैं, उनकी जीत का एलान गलती से कर दिया गया है। पंच के लिए वार्ड 6 के दोनों प्रत्याशियों के वोट एक समान हैं व बराबर का मुकाबला है, जिस कारण उन्हें टॉस के लिए एसडीएम दफ्तर आना होगा। इतनी सूचना मिली नहीं कि जोतराम के समर्थकों में हड़कंप मच गया व रोष फैल गया, जिसके बाद उनके द्वारा चुनाव आयोग व जिला प्रशासन के खिलाफ रोष जाहिर किया व धक्केशाही का आरोप लगाया गया। इस मौके पर उन्होंने प्रशासन पर मौजूदा सरकार के पंच के हार जाने के कारण राजनीतिक दबाव के कारण इस तरह का फैसला लेने का आरोप लगाया। प्रत्याशी जोतराम ने बताया कि उनके सहित कुल 5 प्रत्याशी थे। वोटों की गिनती के बाद उन्हें 75 वोट व उनके विरोधी दिलप्रीत को 72 वोट आए थे। उनके सामने ही 30 दिसंबर को रात 9 बजे तक 4 बार मतगणना करके ही सरपंच के बक्से से पंच के पांच वोट निकाले गए। जिसमें 1 वोट उनके बाद नंबर दो पर रहे दिलप्रीत, 2 वोट सुरजीत, 1 लखविंदर सिंह व 1 रुपिंदर को मिला। दिलप्रीत के वोट बढ़कर 73 हो गए। वहां पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें रात 9 बजे विजेता घोषित कर दिया था, जिसके बाद वह गांव में खुशी मनाने लग गए व दिलप्रीत की तरफ से भी उसे हार पहनाया गया। डीसी बरनाला के मुताबिक अधिकारी ने सोचा शायद सरपंच के बॉक्स से वोट निकल आए, तो उसकी सोच के मुताबिक एक वोट से बराबरी वाली कहानी में जिला प्रशासन द्वारा चुनावी फैसले में घपले की बड़ी आशंका लग रही है, अब देखना होगा कि आज क्या एलान होगा।
जोतराम ने इस घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि दिलप्रीत कांग्रेस पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ रहा था व चुनाव से पहले कांग्रेस के बड़े नेताओं द्वारा उन्हें चुनाव न लड़ घर बैठने के लिए कहा था, लेकिन गांव निवासियों के मिले सहयोग व समर्थन के कारण उन्होंने चुनाव लड़ा व विजेता बने। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने चुनाव कमीशन पंजाब को लिखित शिकायत कर दी गई है व अगर इंसाफ नही मिला तो अदालत का दरवाजा खटखटा कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि उनके समर्थक व वह किसी भी कीमत पर नहीं झुकेंगे व न ही वह टॉस में शामिल होंगे। उक्त मामले के बाद जब 2 जनवरी को जोतराम सिंह टॉस के लिए एसडीएम दफ्तर नहीं गए तो शाम उनके घर के दरवाजों पर करीब 4 से अधिक पोस्टर चिपका उन्हें 3 जनवरी को हर हाल में पेश होकर टॉस में शामिल होने के लिए कहा गया। सबसे बड़ी बात उस नोटिस पर हारे हुआ प्रत्याशी सहमति के साइन कर रहा है। नोटिस पर लिखा गया कि विजेता प्रत्याशी को 31 व 1 जनवरी को बुलाया, लेकिन वह हाजिर नहींहुए। जबकि फोन 1 जनवरी को शाम 4 बजे आया। इस संबंध में डीसी धर्मपाल गुप्ता ने कहा कि नोटिस को लगवाने का तो कोई सवाल ही नही है, केवल सूचना होगी। मतगणना के समय चुनावी ड्यूटी पर तैनात अधिकारी ने सोचा की पंच के साथ ही सरपंच के बक्से में मतगणना कर लेते हैं, शायद कोई पंच की वोट निकल आए। जैसे ही पंच का बॉक्स खुला तो उसमें दिलप्रीत को एक वोट से मुकाबला बराबरी का हो गया। शिअद के हलका भदौड़ के इंचार्ज व एडवोकेट सतनाम सिंह राही ने कहा कि जिला प्रशासन उनके साथ धक्केशाही कर रहा है व राजनीतिक दबाव में है। धनौला खुर्द में सरपंच व पंच शिअद के विजेता बनने के कारण कांग्रेस इस बात से परेशान हो गई, कि जिस जगह से जिला परिषद व बलॉक समिति मेंबर विजेता रहा, वहां से पंच व सरपंच एक भी नही है। शिअद के हलका बरनाला के इंचार्ज कुलवंत सिंह कंता ने कहा कि उनके द्वारा हारे हुए प्रत्याशी की चुनाव नतीजे घोषित किए जाने वाली वीडियो है, जिसमें दिलप्रीत सिंह कह रहा है कि कोई गल नहीं, इस बार तू जित गया, ईको गल है, अगली बार मैं वध मेहनत करके जित के दिखाऊंगा, उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन उनके साथ धक्केशाी कर रहा है व राजनीतिक दबाव में है। उनके द्वारा धक्केशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, उनके द्वारा जरूरत पड़ने पर रोष प्रदर्शन किया जाएगा।
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