फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Ludhiana News ›   सरकार की वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी को झटका देगी कौंसिल आफ इंजीनियर्स

सरकार की वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी को झटका देगी कौंसिल आफ इंजीनियर्स

Wed, 02 Jan 2019 10:24 PM IST
Panchkula bureau Panchkula bureau
Updated Wed, 02 Jan 2019 10:24 PM IST
विज्ञापन
सरकार की वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी को झटका देगी कौंसिल आफ इंजीनियर्स
सरकार की वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी को झटका देगी काउंसिल आफ इंजीनियर्स
विज्ञापन

सीएम सहित अधिकारियों को मेल के माध्यम से आपत्ति जताई, बोले-हाईकोर्ट में करेंगे याचिका दायर
अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जगह फायदा देना संविधान का उल्लंघन
अमर उजाला ब्यूरो
लुधियाना। पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट की धज्जियां उड़ा सूबे में बन चुकी लगभग एक लाख अवैध इमारतों से जुर्माना लेकर रेगुलर करने के लिए पंजाब सरकार की वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी को झटका लग सकता है। काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स पंजाब सरकार के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दस्तक देने की तैयारी कर चुका है। सरकारी की तरफ से तैयार हो रही वन टाइम सेलटमेंट पॉलिसी को लेकर एसोसिएशन ने सीएम, चीफ सेक्रेटरी, निकाय मंत्री से लेकर सभी आला अधिकारियों को मेल के माध्यम से अपनी आपत्ति जता दी है। इसमें साफ कहा है कि अगर सरकार उनकी आपत्ति पर गौर नहीं करती है, तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर होंगे। अगर सरकार ने कानून तोड़ने वालों को इसी तरह राहत देनी है, तो फिर कानून बनाने का फायदा क्या है।

संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का सीधा उल्लंघन
कौंसिल प्रधान कपिल अरोड़ा कहते है कि इमारत को बनाने के लिए म्यूनिसिपल एक्ट और पंजाब टाउन इंप्रूवमेंट एक्ट में नियम तय है। इन नियमों का हर व्यक्ति को पता है। इसके बावजूद कुछ लोग भ्रष्टाचार या फिर राजनीतिक शह पर नियमों को तोड़ इमारत का निर्माण करते है। जबकि कानून के दायरे में रहकर काम करने वाले व्यक्ति सभी नियमों को पालन करते है। कानून तोड़ने वालों को सरकार वन टाइम सेलटमेंट पॉलिसी में कैसे राहत दे सकती है। अगर ऐसा होता है कि आम लोगों का कानून पर विश्वास नहीं रहेगा, आगे चलकर लोग नियमों की और धज्जियां उड़ाएंगे। क्योंकि सभी को पता है कि कोई ना कोई पॉलिसी आएगी तो वैध तो हो ही जाएंगे। इसका उदाहरण 2014 में अकाली सरकार के समय अवैध कालोनियों को रेगुलर करने के लिए पॉलिसी लाई गई। इसमें पैसा लेकर सरकार ने अवैध कालोनियों को रेगुलर कर दिया। साल 2014 के बाद दोबारा फिर से सैकड़ों अवैध कालोनी सूबे में तैयार हो चुकी है। कानून व्यवस्था को सुचारु ढंग से चलने के लिए बनाए जाते हैं, अगर उनमें संशोधन इनकी धज्जियां उड़ाने वालों को राहत दी जाती है। यह संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का सीधे उल्लंघन है। इसलिए यह फैसला लिया गया है कि सरकार की पॉलिसी का विरोध किया जाएगा।
विज्ञापन


शहर की प्लानिंग होती है चौपट
बता दें कि बिल्डिंग के नियमों की धज्जियां उड़ने से शहर की प्लानिंग तो चौपट होती है, साथ पब्लिक पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। मसलन फिरोज गांधी मार्केट को तैयार करने से पहले इंप्रूवमेंट ट्रस्ट पूरा प्लान तैयार किया था। योजना के अनुसार इसे सिर्फ तीन मंजिल तक निर्माण रखा गया था। बाद में सरकार ने फायदा देते हुए इसमें 7 मंजिल तक छूट दे दी। इसका नतीजा यह निकला है कि आज फिरोजगांधी से टू व्हीकल लेकर निकलना मुश्किल हो रहा है। क्योंकि यहां पर ऑफिस की संख्या दो गुणा बढ़ गई है, ऐसे में पार्किंग एरिया तीन मंजिल के अनुसार रखा गया था। बिजली का लोड भी तीन मंजिल के अनुसार रखा गया था। अब पूरी प्लानिंग चौपट होकर रह गई है। इसके अलावा किप्स मार्केट, बीआरएस नगर मार्केट में भी यही हुआ है, यहां शॉप कम फ्लैट का प्रावधान था। नियमों को तोड़ अब यहां पर तीन मंजिला कामर्शियल बिल्डिंग बन चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed