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पंजाबी भाषा, साहित्य तथा सभ्याचार पर राष्ट्रीय सेमीनार आयोजित
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:52 PM IST
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पंजाबी भाषा, साहित्य तथा सभ्याचार पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित
लुधियाना।
मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कालेज फार वुमन में गोल्ड जुबली वर्षगांठ के अवसर पर समागम की पंक्ति का आरंभ पंजाबी भाषा, साहित्य एवं सभ्याचार विषय के तहत राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के साथ हुआ। इस सेमिनार में पंजाबी साहित्य अकादमी के पूर्व प्रधान प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल मुख्यातिथि मौजूद रहे। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के प्रोफेसर सुरिंदर कुमार, रीजनल सेंटर जालंधर के प्रोफेसर सुखविंदर सिंह संघा, दिल्ली यूनिवर्सिटी दिल्ली से डॉ. रवेल सिंह तथा दिल्ली यूनिवर्सिटी दिल्ली से डा. रविंदर रवि विषय माहिर के तौर पर उपस्थित रहे। मुख्य अतिथियों ने शमा रोशन कर समारोह का आगाज किया। कालेज प्रिंसिपल डा. किरनदीप कौर तथा कालेज प्रबंधकीय कमेटी के मेंबरों ने आए मेहमानों का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। सुरिंदर कुमार दवेश्वर ने कुंजीवत भाषण में पंजाबी साहित्य के विभिन्न पहलुओं संबंधी चर्चा करते हुए पंजाबी भाषा के भविष्य संबंधी कई प्रश्न उठाए। मुख्य मेहमानों ने कहा कि चाहे पंजाबी भाषा देश विदेश में बोली जा रही है परंतु इसका लहजा तबदील हो रहा है। सेमिनार में विभिन्न कालेजों के 70 के करीब अध्यापकों ने खोज पत्र पेश किए। कालेज प्रिंसिपल तथा कालेज प्रबंधक कमेटी के प्रधान व सचिन ने आए मेहमानों का धन्यवाद किया।
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पंजाबी भाषा, साहित्य तथा सभ्याचार पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित
लुधियाना।
मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कालेज फार वुमन में गोल्ड जुबली वर्षगांठ के अवसर पर समागम की पंक्ति का आरंभ पंजाबी भाषा, साहित्य एवं सभ्याचार विषय के तहत राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के साथ हुआ। इस सेमिनार में पंजाबी साहित्य अकादमी के पूर्व प्रधान प्रोफेसर गुरभजन सिंह गिल मुख्यातिथि मौजूद रहे। पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के प्रोफेसर सुरिंदर कुमार, रीजनल सेंटर जालंधर के प्रोफेसर सुखविंदर सिंह संघा, दिल्ली यूनिवर्सिटी दिल्ली से डॉ. रवेल सिंह तथा दिल्ली यूनिवर्सिटी दिल्ली से डा. रविंदर रवि विषय माहिर के तौर पर उपस्थित रहे। मुख्य अतिथियों ने शमा रोशन कर समारोह का आगाज किया। कालेज प्रिंसिपल डा. किरनदीप कौर तथा कालेज प्रबंधकीय कमेटी के मेंबरों ने आए मेहमानों का गुलदस्ता भेंट कर स्वागत किया। सुरिंदर कुमार दवेश्वर ने कुंजीवत भाषण में पंजाबी साहित्य के विभिन्न पहलुओं संबंधी चर्चा करते हुए पंजाबी भाषा के भविष्य संबंधी कई प्रश्न उठाए। मुख्य मेहमानों ने कहा कि चाहे पंजाबी भाषा देश विदेश में बोली जा रही है परंतु इसका लहजा तबदील हो रहा है। सेमिनार में विभिन्न कालेजों के 70 के करीब अध्यापकों ने खोज पत्र पेश किए। कालेज प्रिंसिपल तथा कालेज प्रबंधक कमेटी के प्रधान व सचिन ने आए मेहमानों का धन्यवाद किया।