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विधान सभा में सहकारी सभा कानून का होगा कड़ा विरोध -डकौंदा
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:30 PM IST
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‘सहकारी सभा कानून का होगा कड़ा विरोध’
भाकियू डकौंदा ने दी सरकार को चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहगढ़ साहिब।
भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह और जिलाध्यक्ष हरनेक सिंह भल्लमाजरा ने कहा कि पंजाब सरकार अपने किसानों और लोग विरोधी चेहरे को कानूनी जामा पहनाने जा रही है। इसी कड़ी के अंतर्गत सहकारिता को लोकपक्षीय लहर बनाने की बजाय सरकार पंजाब की सहकारी सभाओं को निजी कंपनियां बनाने जा रही है, जिसकी वह पुरजोर निंदा करते हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से प्रबंधक नियुक्ति की धारा में तबदीली कर प्रबंधक को 6 महीनों की बजाय, अनिश्चित समय के लिए लगाने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास किया है और पहले से अधिक अधिकार भी दिए जा रहे हैं। किसान नेताओं ने सहकारी संस्थाओं की लोकतंत्र पर सरकार के इस रवैये को सीधा हमला बताया है। उन्होंने बताया कि सरकार बदनीयती के अंतर्गत प्रबंधक की जबरन नियुक्ति विरुद्ध न्यायपालिका में जाने का रास्ता भी बंद किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सहकारी ग्रामीण खेती सभाओं को और केंद्रीयकरण किया जा रहा है कई सहकारी सभाओं को मर्ज कर एक बड़ी संस्था बनाने के रास्ते भी इख्तियार करने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास हुआ है। ये जहां सहकारिता के उद्देश्यों के उलट है वहीं छोटे और गरीब सहकारी सभाओं के किसानों के विरुद्ध है।
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इन सभाओं का चुनाव अमीर किसानों और राजनैतिक पार्टियों के विरोध का अखाड़ा बनेंगी। किसानों ने मांग की कि पंजाब की कैबिनेट प्रस्तावित सहकारी में तबदीली को इस विधान सभा के इजलास में पास न किया जाए बल्कि इनके बारे किसान जत्थेबंदियों के साथ बातचीत की जाए। पंजाब की 80 प्रतिशत किसानी को सांझी, सहकारी खेती की तरफ मोड़ने की जरूरत है। उनकी जत्थेबंदी हर स्तर पर इस किसानी विरोधी सहकारी सभा एक्ट का तीखा और डटकर विरोध करेगी।
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भाकियू डकौंदा ने दी सरकार को चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहगढ़ साहिब।
भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रदेश महासचिव जगमोहन सिंह और जिलाध्यक्ष हरनेक सिंह भल्लमाजरा ने कहा कि पंजाब सरकार अपने किसानों और लोग विरोधी चेहरे को कानूनी जामा पहनाने जा रही है। इसी कड़ी के अंतर्गत सहकारिता को लोकपक्षीय लहर बनाने की बजाय सरकार पंजाब की सहकारी सभाओं को निजी कंपनियां बनाने जा रही है, जिसकी वह पुरजोर निंदा करते हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से प्रबंधक नियुक्ति की धारा में तबदीली कर प्रबंधक को 6 महीनों की बजाय, अनिश्चित समय के लिए लगाने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास किया है और पहले से अधिक अधिकार भी दिए जा रहे हैं। किसान नेताओं ने सहकारी संस्थाओं की लोकतंत्र पर सरकार के इस रवैये को सीधा हमला बताया है। उन्होंने बताया कि सरकार बदनीयती के अंतर्गत प्रबंधक की जबरन नियुक्ति विरुद्ध न्यायपालिका में जाने का रास्ता भी बंद किया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि सहकारी ग्रामीण खेती सभाओं को और केंद्रीयकरण किया जा रहा है कई सहकारी सभाओं को मर्ज कर एक बड़ी संस्था बनाने के रास्ते भी इख्तियार करने का प्रस्ताव कैबिनेट में पास हुआ है। ये जहां सहकारिता के उद्देश्यों के उलट है वहीं छोटे और गरीब सहकारी सभाओं के किसानों के विरुद्ध है।
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इन सभाओं का चुनाव अमीर किसानों और राजनैतिक पार्टियों के विरोध का अखाड़ा बनेंगी। किसानों ने मांग की कि पंजाब की कैबिनेट प्रस्तावित सहकारी में तबदीली को इस विधान सभा के इजलास में पास न किया जाए बल्कि इनके बारे किसान जत्थेबंदियों के साथ बातचीत की जाए। पंजाब की 80 प्रतिशत किसानी को सांझी, सहकारी खेती की तरफ मोड़ने की जरूरत है। उनकी जत्थेबंदी हर स्तर पर इस किसानी विरोधी सहकारी सभा एक्ट का तीखा और डटकर विरोध करेगी।