{"_id":"5ff973053b3aac4810394557","slug":"ludhiana-baba-lakha-singh-became-mediator-in-talk-between-farmers-and-central-government","type":"story","status":"publish","title_hn":"लुधियाना के बाबा लखा सिंह बने केंद्र-किसानों के बीच मध्यस्थ, जानें फिर क्यों कहा-किसानों के पक्ष में हूं ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लुधियाना के बाबा लखा सिंह बने केंद्र-किसानों के बीच मध्यस्थ, जानें फिर क्यों कहा-किसानों के पक्ष में हूं
Sat, 09 Jan 2021 02:40 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 09 Jan 2021 02:40 PM IST
विज्ञापन
बाबा लखा सिंह।
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ इस समय किसान और सरकार आमने सामने हैं, जहां किसान तीनों कानूनों को वापस करवाने की जिद पर अड़े हैं। दूसरी तरफ केंद्र सरकार भी साफ कर चुकी है कि इन कानूनों को किसी कीमत पर वापस नहीं लिया जाएगा। इस मुद्दे पर किसान और केंद्र सरकार के बीच आठ बैठक बेनतीजा रह चुकी है। केंद्र सरकार और किसानों के बीच लुधियाना के संत बाबा लखा सिंह मध्यस्थ बने हुए हैं। इस मुद्दे पर उनकी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ एक बैठक भी हो चुकी है।
विज्ञापन
संत बाबा लखा सिंह ने बताया कि वह भी एक किसान हैं, उनकी रगों में भी किसानों का खून दौड़ रहा है। इसलिए वह किसानों के पक्ष में हैं। इसलिए 25 दिसंबर को एक ज्ञापन राज्यपाल को सौंप कृषि कानून को रद्द करने की मांग की थी। अब केंद्र सरकार ने मध्यस्थता करने के लिए कहा है। इस मुद्दे के हल के लिए वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे, वहीं किसानों को समझौते के हल के लिए हर संभव अपील करेंगे।
विज्ञापन
उन्होंने आंदोलन कर रही किसान यूनियन से अपना रूख कुछ नरम करने के लिए कहा था, हालांकि आठ जनवरी को किसान और सरकार के बीच आठवें दौर की बैठक बेनतीजा रही है। संत बाबा लखा सिंह कहते हैं कि उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। इस मुद्दे का हल जरूर निकलेगा।
विज्ञापन
इसके लिए वह केंद्र सरकार और किसान यूनियन को समझाने का प्रयास करेंगे। दो या तीन दिन में वे फिर दिल्ली जा सकते है, वहां पर कृषि मंत्री के अलावा गृहमंत्री के साथ किसान आंदोलन को लेकर बातचीत हो सकती है। हालांकि इस बारे में संत बाबा लखा सिंह ने कुछ कहने से मना कर दिया है।
नानकसर संप्रदाय के दो संतों की तरफ से इस मध्यस्थता का विरोध करने के सवाल पर संत बाबा लखा सिंह ने कहा कि उनके संप्रदाय के कुछ लोग उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। इस मुद्दे के हल के लिए केवल नानकसर संप्रदाय नहीं बल्कि समूह धर्मों के संत प्रयास कर रहे हैं। अब वह विश्व शांति सेवा मिशन के प्रमुख के तौर पर इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं।
संत बाबा लखा सिंह ने कहा कि इस कड़ाके की ठंड में जहां लोग घरों से बाहर निकलने से गुरेज कर रहे हैं, वही किसान खुली सड़कों पर बैठे हैं। इनकी दशा देखकर उनके दिल में जो दर्द हो रहा है, वह किसी को बता नहीं सकते हैं। इसलिए उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस मुद्दे का हल निकालने में वे जरूर कामयाब रहेंगे।