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नशा, मुफ्त सफर या सीधी आर्थिक मदद: पंजाब में महिला वोट पर चलेगा किसका दांव? मावां-धियां को साधने में जुटे दल
Wed, 07 Oct 2026 09:41 AM IST
Nivedita
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Wed, 07 Oct 2026 09:41 AM IST
सार
निर्वाचन आयोग के 2024 के आंकड़ों के अनुसार पंजाब में 1,02,03,440 महिला मतदाता दर्ज थीं और 73,35,923 महिलाओं ने मतदान किया था। यानी महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या में बड़ी नहीं, बल्कि मतदान के लिहाज से भी निर्णायक है।
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पंजाब चुनाव में महिला वोटर्स को लुभाने की राजनीति तेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को साधने की जंग तेज हो गई है। एक तरफ शिरोमणि अकाली दल की एकमात्र सांसद हरसिमरत कौर बादल मावां-धियां इंसाफ यात्रा के जरिए गांव-गांव पहुंचकर नशे के खिलाफ महिलाओं को लामबंद कर रही हैं, तो दूसरी तरफ भगवंत मान सरकार मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना के जरिए सीधे महिलाओं के बैंक खातों तक आर्थिक मदद पहुंचाकर महिला सशक्तिकरण का अपना मॉडल पेश कर रही है।
कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई सरकारी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा और केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना जैसी योजनाएं भी महिला मतदाताओं के राजनीतिक व्यवहार पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। ऐसे में पंजाब की करीब 1.02 करोड़ महिला मतदाता इस चुनाव में किसके साथ खड़ी होती हैं, यह सत्ता की तस्वीर बदलने वाला सवाल बन गया है।
अकाली दल की मावां-धियां इंसाफ यात्रा
हरसिमरत कौर बादल की मावां-धियां इंसाफ यात्रा का केंद्र पंजाब का नशा संकट है। गांवों में महिलाओं से संवाद करते हुए अकाली दल परिवारों पर पड़ रहे नशे के असर, युवाओं की बर्बादी और माताओं की चिंता को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। अभियान के दूसरे चरण में माई भागो मावां-धियां दी फौज की घोषणा भी की गई है, जिसके जरिए महिलाओं को नशा बेचने वालों और उनके कथित संरक्षणकर्ताओं की जानकारी सामने लाने के लिए लामबंद करने की बात कही गई है।
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आम आदमी पार्टी सरकार ने महिला मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सीधे आर्थिक लाभ को अपना प्रमुख आधार बनाया है। 2026-27 के बजट में घोषित मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये देने का प्रावधान किया गया। सरकार के लिए यह योजना केवल सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं को सीधे आर्थिक रूप से जोड़ने वाला राजनीतिक संदेश भी है।
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कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुई सरकारी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा और केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना जैसी योजनाएं भी महिला मतदाताओं के राजनीतिक व्यवहार पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। ऐसे में पंजाब की करीब 1.02 करोड़ महिला मतदाता इस चुनाव में किसके साथ खड़ी होती हैं, यह सत्ता की तस्वीर बदलने वाला सवाल बन गया है।
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अकाली दल की मावां-धियां इंसाफ यात्रा
हरसिमरत कौर बादल की मावां-धियां इंसाफ यात्रा का केंद्र पंजाब का नशा संकट है। गांवों में महिलाओं से संवाद करते हुए अकाली दल परिवारों पर पड़ रहे नशे के असर, युवाओं की बर्बादी और माताओं की चिंता को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। अभियान के दूसरे चरण में माई भागो मावां-धियां दी फौज की घोषणा भी की गई है, जिसके जरिए महिलाओं को नशा बेचने वालों और उनके कथित संरक्षणकर्ताओं की जानकारी सामने लाने के लिए लामबंद करने की बात कही गई है।
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आम आदमी पार्टी सरकार ने महिला मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सीधे आर्थिक लाभ को अपना प्रमुख आधार बनाया है। 2026-27 के बजट में घोषित मुख्यमंत्री मावां-धियां सत्कार योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति वर्ग की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये देने का प्रावधान किया गया। सरकार के लिए यह योजना केवल सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिलाओं को सीधे आर्थिक रूप से जोड़ने वाला राजनीतिक संदेश भी है।
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कैप्टन सरकार ने शुरू की थी मुफ्त बस यात्रा
पंजाब में महिला केंद्रित राजनीति का बड़ा उदाहरण कांग्रेस सरकार के समय सामने आया, जब कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने 1 अप्रैल 2021 से सरकारी बसों में महिलाओं और लड़कियों के लिए मुफ्त यात्रा शुरू की। आज भी सरकारी बसों में यह सुविधा जारी है।
बादल सरकार में आई थी शगुन योजना
प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली-भाजपा सरकार के समय शगुन योजना के जरिए जरूरतमंद परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आर्थिक सहायता दी गई। इसी दौर में माई भागो विद्या योजना के तहत सरकारी स्कूलों की छात्राओं को साइकिलें दी गईं। केंद्र की भाजपा सरकार की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने भी महिलाओं को सीधे प्रभावित किया। सितंबर 2026 तक देश में उज्ज्वला योजना के तहत 10.56 करोड़ से अधिक कनेक्शन जारी किए जा चुके थे। यानी केंद्र सरकार ने रसोई के धुएं और ईंधन के सवाल को छुआ, कांग्रेस ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं को राहत दी, अकाली-भाजपा सरकार ने बेटियों की शिक्षा और विवाह से जुड़ी योजनाओं पर जोर दिया और अब आम आदमी पार्टी सरकार सीधे आर्थिक सहायता के जरिए महिलाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।
पंजाब में महिला केंद्रित राजनीति का बड़ा उदाहरण कांग्रेस सरकार के समय सामने आया, जब कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार ने 1 अप्रैल 2021 से सरकारी बसों में महिलाओं और लड़कियों के लिए मुफ्त यात्रा शुरू की। आज भी सरकारी बसों में यह सुविधा जारी है।
बादल सरकार में आई थी शगुन योजना
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महिलाओं को नजरअंदाज करना आसान नहीं
डीएवी यूनिवर्सिटी की पूर्व वीसी जसबीर कौर रिशी का कहना है कि पंजाब की राजनीति में महिला मतदाता अब केवल किसी दल का पारंपरिक वोट बैंक नहीं रह गई हैं। 2024 में पंजाब की 1.02 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं में से करीब 73.36 लाख ने मतदान किया था। यही संख्या बताती है कि महिला वोट को नजरअंदाज करके पंजाब में कोई भी दल आसान बहुमत की उम्मीद नहीं कर सकता।
2027 की लड़ाई में राजनीतिक दल महिलाओं के सामने अलग-अलग संदेश लेकर पहुंचेंगे। अकाली दल का संदेश नशे से परिवार बचाने का है, कांग्रेस महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और सामाजिक सुरक्षा की अपनी विरासत याद दिलाएगी, आम आदमी पार्टी सीधे आर्थिक सहायता को अपनी उपलब्धि बताएगी और भाजपा केंद्र की उज्ज्वला सहित महिला केंद्रित योजनाओं को अपनी राजनीतिक पूंजी के रूप में पेश करेगी। इस तरह पंजाब की महिला मतदाता अब सिर्फ किसी दल का पारंपरिक वोट बैंक नहीं रह गई है, बल्कि एक ऐसा निर्णायक वर्ग बन चुकी है जिसे हर पार्टी अपने तरीके से साधना चाहती है।
जसबीर रिशी का कहना है कि आखिरकार चुनावी मैदान में असली मुकाबला योजनाओं की सूची का नहीं, बल्कि महिलाओं की प्राथमिकताओं का होगा। अगर महिला मतदाता अपनी जेब और घर की अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देती है तो सरकारी लाभ और प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता सत्ताधारी दल के पक्ष में जा सकती है, लेकिन अगर नशा, बच्चों की सुरक्षा और परिवार के उजड़ने का डर बड़ा मुद्दा बनता है तो विपक्ष की इंसाफ वाली राजनीति असर पैदा कर सकती है। पंजाब की राजनीति में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि करोड़ों महिला मतदाताओं का यह शांत वर्ग मतदान के दिन लाभ की राजनीति चुनता है या बदलाव की राजनीति।
डीएवी यूनिवर्सिटी की पूर्व वीसी जसबीर कौर रिशी का कहना है कि पंजाब की राजनीति में महिला मतदाता अब केवल किसी दल का पारंपरिक वोट बैंक नहीं रह गई हैं। 2024 में पंजाब की 1.02 करोड़ से अधिक महिला मतदाताओं में से करीब 73.36 लाख ने मतदान किया था। यही संख्या बताती है कि महिला वोट को नजरअंदाज करके पंजाब में कोई भी दल आसान बहुमत की उम्मीद नहीं कर सकता।
2027 की लड़ाई में राजनीतिक दल महिलाओं के सामने अलग-अलग संदेश लेकर पहुंचेंगे। अकाली दल का संदेश नशे से परिवार बचाने का है, कांग्रेस महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा और सामाजिक सुरक्षा की अपनी विरासत याद दिलाएगी, आम आदमी पार्टी सीधे आर्थिक सहायता को अपनी उपलब्धि बताएगी और भाजपा केंद्र की उज्ज्वला सहित महिला केंद्रित योजनाओं को अपनी राजनीतिक पूंजी के रूप में पेश करेगी। इस तरह पंजाब की महिला मतदाता अब सिर्फ किसी दल का पारंपरिक वोट बैंक नहीं रह गई है, बल्कि एक ऐसा निर्णायक वर्ग बन चुकी है जिसे हर पार्टी अपने तरीके से साधना चाहती है।
जसबीर रिशी का कहना है कि आखिरकार चुनावी मैदान में असली मुकाबला योजनाओं की सूची का नहीं, बल्कि महिलाओं की प्राथमिकताओं का होगा। अगर महिला मतदाता अपनी जेब और घर की अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देती है तो सरकारी लाभ और प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता सत्ताधारी दल के पक्ष में जा सकती है, लेकिन अगर नशा, बच्चों की सुरक्षा और परिवार के उजड़ने का डर बड़ा मुद्दा बनता है तो विपक्ष की इंसाफ वाली राजनीति असर पैदा कर सकती है। पंजाब की राजनीति में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि करोड़ों महिला मतदाताओं का यह शांत वर्ग मतदान के दिन लाभ की राजनीति चुनता है या बदलाव की राजनीति।