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गेहूं से लदी ट्रैक्टर ट्राली नदी पार करते समय डूबी
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ममदोट (फिरोजपुर)। सीमांत गांव गजनी वाला (दोना मत्तड़) में गेहूं से लदी ट्रैक्टर ट्राली सतलुज दरिया पार करते समय डूब गई। किसान एक बड़ी किश्ती के माध्यम से दरिया के रास्ते गेहूं से लदी ट्रैक्टर-ट्राली खेतों से अपने गांव ला रहा था।
किसानों का कहना है कि सतलुज दरिया पार उनकी चार हजार एकड़ जमीन है। पिछले लंबे समय से उनकी सरकार से मांग रही है कि दरिया पर पुल बनाकर दें जिससे अपने खेतों में आसानी से आ जा सके। अब नाव के माध्यम से उन्हें खेती के लिए आना जाना पड़ता है। कई बार नाव डूबने के हादसे हो चुके हैं।
किसान बलवंत सिंह ने बताया कि वह बड़ी नाव के जरिए गेहूं से लदी ट्रैक्टर-ट्राली खेतों से अपने गांव ला रहा था कि अचानक नाव डूब गई। जिस कारण गेहूं से लदी ट्रैक्टर-ट्राली दरिया में डूब गई और गेहूं नष्ट हो गया। किसान बलवंत ने कहा कि किसी तरह उसने अपनी जान बचाई। किसान हरनेक सिंह ने कहा कि सैकड़ों किसानों की दरिया पार चार हजार एकड़ के करीब जमीन है। खेतों में जाने के लिए सिर्फ नाव ही एक माध्यम है।
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कई बार जिला प्रशासन व विधायक से मांग की है कि दरिया पर पुल बनाएं जिससे वह अपने खेतों में आसानी से आ जा सके। कई बार दरिया के रास्ते खेतों में जाते या आते समय नाव डूब चुकी है। ऐसी घटनाओं में कई ग्रामीण मर चुके हैं। किसी भी सरकार ने उन्हें पुल बनाकर नहीं दिया है। अब गेहूं का सीजन है, दरिया पार खेतों से अपने गांव में अनाज लाने के लिए एक बड़ी नाव ही जरिया है। कई बार ये नाव भी धोखा दे जाती है।
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किसानों का कहना है कि सतलुज दरिया पार उनकी चार हजार एकड़ जमीन है। पिछले लंबे समय से उनकी सरकार से मांग रही है कि दरिया पर पुल बनाकर दें जिससे अपने खेतों में आसानी से आ जा सके। अब नाव के माध्यम से उन्हें खेती के लिए आना जाना पड़ता है। कई बार नाव डूबने के हादसे हो चुके हैं।
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किसान बलवंत सिंह ने बताया कि वह बड़ी नाव के जरिए गेहूं से लदी ट्रैक्टर-ट्राली खेतों से अपने गांव ला रहा था कि अचानक नाव डूब गई। जिस कारण गेहूं से लदी ट्रैक्टर-ट्राली दरिया में डूब गई और गेहूं नष्ट हो गया। किसान बलवंत ने कहा कि किसी तरह उसने अपनी जान बचाई। किसान हरनेक सिंह ने कहा कि सैकड़ों किसानों की दरिया पार चार हजार एकड़ के करीब जमीन है। खेतों में जाने के लिए सिर्फ नाव ही एक माध्यम है।
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कई बार जिला प्रशासन व विधायक से मांग की है कि दरिया पर पुल बनाएं जिससे वह अपने खेतों में आसानी से आ जा सके। कई बार दरिया के रास्ते खेतों में जाते या आते समय नाव डूब चुकी है। ऐसी घटनाओं में कई ग्रामीण मर चुके हैं। किसी भी सरकार ने उन्हें पुल बनाकर नहीं दिया है। अब गेहूं का सीजन है, दरिया पार खेतों से अपने गांव में अनाज लाने के लिए एक बड़ी नाव ही जरिया है। कई बार ये नाव भी धोखा दे जाती है।