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उम्मीद के मुताबिक अभी आदर्श गांव नहीं बना जालंधर का गांव धीना
अमर उजाला नरिंदर वैद्य/जालंधर
Updated Thu, 17 Mar 2016 08:57 PM IST
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जालंधर के गांव धीना की टूटी हुईं सड़कों पर खड़ा पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत लगभग 18 माह पहले सांसद नरेश गुजराल की ओर से गांव धीना को गोद लिया गया था। इसके बाद इसको आदर्श गांव बनाने का जिम्मा सांसद नरेश गुजराल ने विधायक परगट सिंह को सौंप दिया था। इस गांव को आदर्श गांव बनाने के लिए 2 साल का समय रखा गया था, लेकिन लगभग 18 माह बीत जाने के बाद अभी तक इस गांव में आदर्श गांव जैसी सहुलियतें लोगों को नहीं मिल पाई हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि सरकारी अधिकारी गांव की मुख्य समस्याओं कच्ची गलियों, सीवरेज और गंदगी का हल अभी तक नहीं कर पाए हैं। गांव में कुछ जगह पर सीवरेज डाला गया है, वहीं इसके लिउ तोड़ी गई गलियों से गुजरना मुश्किल हो गया है। गांव धीना में पूरी तरह से सीवरेज नहीं डल पाया है। इस वजह से कई लोगों के घरों का पानी अभी भी गलियों में आकर ओवरफ्लो हो जाता है। गांव में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
वहीं गांव के बस स्टैंड को आदर्श बस स्टैंड बना दिया गया है। इसके अलावा गांव के श्मशानघाट पर भी रुपये खर्च किए गए हैं। गांव में सुविधा सेंटर तैयार कर दिया गया है। कूड़ा फेंकने के लिए ढंप बनाए गए हैं। बस स्टैंड पर बाथरूम भी बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक गांव में पूरी तरह से गलियां नहीं बन सकी हैं। सीवरेज का काम मात्र 50 प्रतिशत ही हो सका है। स्ट्रीट लाइटें नहीं लगी हैं व सीसीटीवी कैमरे जो लगाए जाने थे, उसका कार्य शुरू नहीं हो पाया है। गांव के पास 15.67 लाख की राशि आ चुकी है और लगभग 25 लाख की राशि आनी बाकी है।
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विधायक परगट सिंह का कहना है कि वह गांव में कुछ दिन पहले ही होकर आए हैं। उनका कहना है कि गांव में काम बेहतर ढंग से चल रहा है। थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन काम हो रहा है। गांव धीना में कुछ जगह पर सड़कें बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। जमशेर, इंदिरा कॉलोनी, अधर्मी मुहल्ला में काम शुरू हो चुका है। जैसे-जैसे फंड आ रहा है, काम चल रहा है। गांव में बस स्टैंड, श्मशानघाट, सुविधा सेंटर का काम हो चुका है। गांव के सरपंच बलवंत राए का कहना है कि जल्द ही पूरे गांव में विकास कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
गांव में सीवरेज डालने का काम मात्र 50 प्रतिशत ही हो पाया है। इसका मुख्य कारण गांव के सीवरेज की निकासी के लिए रेलवे लाइन को क्रास कर पाना बन रहा है। रेलवे विभाग इस क्रासिंग के लिए करीब 37 लाख की राशि की मांग कर रहा है। अब गांव के पास इतना फंड ही नहीं आया है कि वह रेलवे को 37 लाख रुपये देकर गांव के सीवरेज को रेलवे लाइन से पार ले जा सकें। इस बारे में कई माह पहले सांसद नरेश गुजराल ने कहा था कि वे रेलवे मंत्री से इस बारे में बात कर इस लागत को कम करवाने की कोशिश करेंगे, लेकिन यह मामला अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।
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गांव के लोगों का कहना है कि सरकारी अधिकारी गांव की मुख्य समस्याओं कच्ची गलियों, सीवरेज और गंदगी का हल अभी तक नहीं कर पाए हैं। गांव में कुछ जगह पर सीवरेज डाला गया है, वहीं इसके लिउ तोड़ी गई गलियों से गुजरना मुश्किल हो गया है। गांव धीना में पूरी तरह से सीवरेज नहीं डल पाया है। इस वजह से कई लोगों के घरों का पानी अभी भी गलियों में आकर ओवरफ्लो हो जाता है। गांव में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
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वहीं गांव के बस स्टैंड को आदर्श बस स्टैंड बना दिया गया है। इसके अलावा गांव के श्मशानघाट पर भी रुपये खर्च किए गए हैं। गांव में सुविधा सेंटर तैयार कर दिया गया है। कूड़ा फेंकने के लिए ढंप बनाए गए हैं। बस स्टैंड पर बाथरूम भी बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक गांव में पूरी तरह से गलियां नहीं बन सकी हैं। सीवरेज का काम मात्र 50 प्रतिशत ही हो सका है। स्ट्रीट लाइटें नहीं लगी हैं व सीसीटीवी कैमरे जो लगाए जाने थे, उसका कार्य शुरू नहीं हो पाया है। गांव के पास 15.67 लाख की राशि आ चुकी है और लगभग 25 लाख की राशि आनी बाकी है।
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विधायक परगट सिंह का कहना है कि वह गांव में कुछ दिन पहले ही होकर आए हैं। उनका कहना है कि गांव में काम बेहतर ढंग से चल रहा है। थोड़ा समय लग रहा है, लेकिन काम हो रहा है। गांव धीना में कुछ जगह पर सड़कें बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। जमशेर, इंदिरा कॉलोनी, अधर्मी मुहल्ला में काम शुरू हो चुका है। जैसे-जैसे फंड आ रहा है, काम चल रहा है। गांव में बस स्टैंड, श्मशानघाट, सुविधा सेंटर का काम हो चुका है। गांव के सरपंच बलवंत राए का कहना है कि जल्द ही पूरे गांव में विकास कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
गांव में सीवरेज डालने का काम मात्र 50 प्रतिशत ही हो पाया है। इसका मुख्य कारण गांव के सीवरेज की निकासी के लिए रेलवे लाइन को क्रास कर पाना बन रहा है। रेलवे विभाग इस क्रासिंग के लिए करीब 37 लाख की राशि की मांग कर रहा है। अब गांव के पास इतना फंड ही नहीं आया है कि वह रेलवे को 37 लाख रुपये देकर गांव के सीवरेज को रेलवे लाइन से पार ले जा सकें। इस बारे में कई माह पहले सांसद नरेश गुजराल ने कहा था कि वे रेलवे मंत्री से इस बारे में बात कर इस लागत को कम करवाने की कोशिश करेंगे, लेकिन यह मामला अभी भी ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।