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टैक्सी चालक गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता रद्द: दुष्कर्म और अपहरण का था दोषी, अपराध छिपाना पड़ा भारी
Thu, 03 Sep 2026 09:11 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: Nivedita
Updated Thu, 03 Sep 2026 09:11 AM IST
सार
गुरमीत सिंह वर्ष 1992 में अस्थायी वीजा पर अमेरिका गया था। इसके बाद वर्ष 2000 में उसे स्थायी निवास यानी पीआर मिल गया। अमेरिका में वह टैक्सी चालक के तौर पर काम कर रहा था।
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गुरमीत सिंह की नागरिकता रद्द
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क की संघीय अदालत ने भारतीय मूल के नागरिक गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने का आदेश दिया है। अदालत का यह फैसला उस मामले में आया है, जिसमें गुरमीत सिंह को दुष्कर्म और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया था। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, उसने अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान अपने गंभीर आपराधिक कृत्य को छिपाया था।
अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि नागरिकता हासिल करने के लिए दी गई जानकारी में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना या गलत जानकारी देना प्राकृतिककरण प्रक्रिया की गंभीर शर्तों का उल्लंघन है। जांच में सामने आया कि गुरमीत सिंह ने नागरिकता के लिए आवेदन करते समय अपने अपराध से संबंधित जानकारी अधिकारियों से साझा नहीं की थी। इसी आधार पर अब उसकी अमेरिकी नागरिकता को रद्द कर दिया गया है।
अमेरिका के अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने इस मामले पर कहा कि अमेरिकी नागरिकता अपराध करने वालों के लिए कोई ढाल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने धोखाधड़ी, गलत जानकारी या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर नागरिकता हासिल की है, तो कानून के तहत उस नागरिकता को रद्द किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की कानूनी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और अखंडता को बनाए रखना है।
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1992 में अस्थायी वीजा पर गया था अमेरिका
जानकारी के अनुसार, गुरमीत सिंह वर्ष 1992 में अस्थायी वीजा पर अमेरिका गया था। इसके बाद वर्ष 2000 में उसे स्थायी निवास यानी पीआर मिल गया। अमेरिका में रहने के दौरान वह टैक्सी चालक के तौर पर काम कर रहा था।
मामले के अनुसार, मई 2011 में, अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने से कुछ ही सप्ताह पहले, गुरमीत सिंह पर एक महिला यात्री के साथ दुष्कर्म करने और उसका अपहरण करने का आरोप लगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने टैक्सी में सवार महिला के साथ गंभीर अपराध किया और उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने कब्जे में रखा।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस गंभीर अपराध के बावजूद गुरमीत सिंह ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान अपने खिलाफ दर्ज मामले और अपने आपराधिक आचरण का खुलासा नहीं किया। इसके बाद अक्टूबर 2011 में उसे अमेरिकी नागरिकता प्रदान कर दी गई।
हालांकि, बाद में उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला आगे बढ़ा और न्यूयॉर्क की अदालत में उसे पहले दर्जे के दुष्कर्म और अपहरण के आरोपों में दोषी ठहराया गया। अदालत ने इन गंभीर अपराधों के लिए उसे 20 वर्ष की जेल की सजा सुनाई।
अब नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अपराध छिपाने का मामला सामने आने के बाद अमेरिकी सरकार ने उसकी नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी कार्रवाई की। संघीय अदालत के फैसले के बाद गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता समाप्त हो गई है।
इस मामले को अमेरिकी प्रशासन ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में सही और पूरी जानकारी देने की अनिवार्यता से जोड़कर देखा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिककरण के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति यदि अपने आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाता है और इसी आधार पर नागरिकता हासिल कर लेता है, तो बाद में उस नागरिकता को कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दी जा सकती है।
गुरमीत सिंह का मामला इस बात का भी उदाहरण है कि अमेरिका में स्थायी निवासी से नागरिक बनने की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी यदि यह साबित हो जाए कि नागरिकता धोखाधड़ी या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई थी, तो सरकार उस नागरिकता को रद्द कराने के लिए अदालत का रुख कर सकती है।
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अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि नागरिकता हासिल करने के लिए दी गई जानकारी में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाना या गलत जानकारी देना प्राकृतिककरण प्रक्रिया की गंभीर शर्तों का उल्लंघन है। जांच में सामने आया कि गुरमीत सिंह ने नागरिकता के लिए आवेदन करते समय अपने अपराध से संबंधित जानकारी अधिकारियों से साझा नहीं की थी। इसी आधार पर अब उसकी अमेरिकी नागरिकता को रद्द कर दिया गया है।
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अमेरिका के अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने इस मामले पर कहा कि अमेरिकी नागरिकता अपराध करने वालों के लिए कोई ढाल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने धोखाधड़ी, गलत जानकारी या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर नागरिकता हासिल की है, तो कानून के तहत उस नागरिकता को रद्द किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की कानूनी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और अखंडता को बनाए रखना है।
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1992 में अस्थायी वीजा पर गया था अमेरिका
जानकारी के अनुसार, गुरमीत सिंह वर्ष 1992 में अस्थायी वीजा पर अमेरिका गया था। इसके बाद वर्ष 2000 में उसे स्थायी निवास यानी पीआर मिल गया। अमेरिका में रहने के दौरान वह टैक्सी चालक के तौर पर काम कर रहा था।
मामले के अनुसार, मई 2011 में, अमेरिकी नागरिकता के लिए आवेदन करने से कुछ ही सप्ताह पहले, गुरमीत सिंह पर एक महिला यात्री के साथ दुष्कर्म करने और उसका अपहरण करने का आरोप लगा। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसने टैक्सी में सवार महिला के साथ गंभीर अपराध किया और उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध अपने कब्जे में रखा।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस गंभीर अपराध के बावजूद गुरमीत सिंह ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान अपने खिलाफ दर्ज मामले और अपने आपराधिक आचरण का खुलासा नहीं किया। इसके बाद अक्टूबर 2011 में उसे अमेरिकी नागरिकता प्रदान कर दी गई।
हालांकि, बाद में उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला आगे बढ़ा और न्यूयॉर्क की अदालत में उसे पहले दर्जे के दुष्कर्म और अपहरण के आरोपों में दोषी ठहराया गया। अदालत ने इन गंभीर अपराधों के लिए उसे 20 वर्ष की जेल की सजा सुनाई।
अब नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अपराध छिपाने का मामला सामने आने के बाद अमेरिकी सरकार ने उसकी नागरिकता रद्द करने के लिए कानूनी कार्रवाई की। संघीय अदालत के फैसले के बाद गुरमीत सिंह की अमेरिकी नागरिकता समाप्त हो गई है।
इस मामले को अमेरिकी प्रशासन ने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में सही और पूरी जानकारी देने की अनिवार्यता से जोड़कर देखा है। अधिकारियों का कहना है कि प्राकृतिककरण के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति यदि अपने आपराधिक रिकॉर्ड या अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाता है और इसी आधार पर नागरिकता हासिल कर लेता है, तो बाद में उस नागरिकता को कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दी जा सकती है।
गुरमीत सिंह का मामला इस बात का भी उदाहरण है कि अमेरिका में स्थायी निवासी से नागरिक बनने की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद भी यदि यह साबित हो जाए कि नागरिकता धोखाधड़ी या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई थी, तो सरकार उस नागरिकता को रद्द कराने के लिए अदालत का रुख कर सकती है।