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भाजपा-अकाली दल का होगा गठबंधन?: चुनाव में दोनों दल साथ आए तो बदलेगी इन सीटों पर तस्वीर; कड़ा होगा मुकाबला
Thu, 27 Aug 2026 01:08 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर
अमर उजाला नेटवर्क, जालंधर
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 27 Aug 2026 01:08 PM IST
सार
पंजाब में भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के संभावित पुनर्गठन की चर्चाएं तेजी से हो रही हैं। अगर दोनों दलों के बीच गठबंधन होता है तो कई सीटों पर समीकरण बदल जाएंगे। शहरी भाजपा और ग्रामीण अकाली वोट के मेल से कई सीटों पर मुकाबला बदल सकता है।
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अकाली भाजपा गठबंधन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पंजाब में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के संभावित पुनर्गठन की चर्चाएं तेज हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार आंकड़ों से इस गठबंधन की संभावित ताकत का आकलन किया गया है। इन आंकड़ों के अनुसार, यदि दोनों दल साथ आते हैं तो करीब 21 विधानसभा क्षेत्रों में उनका संयुक्त वोट कांग्रेस या आम आदमी पार्टी से अधिक हो सकता है। हालांकि, यह केवल एक गणितीय विश्लेषण है और इसे 2027 के विधानसभा चुनाव का सीधा परिणाम नहीं माना जा सकता।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 23 विधानसभा क्षेत्रों में सर्वाधिक वोट प्राप्त किए थे। वहीं, अकाली दल नौ क्षेत्रों में आगे रहा था। इस तरह, अलग-अलग चुनाव लड़ने के बावजूद दोनों दलों ने कुल 32 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी बढ़त बनाई थी। इन दोनों दलों के वोटों को जोड़ने पर कई अन्य सीटों पर भी चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
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2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 23 विधानसभा क्षेत्रों में सर्वाधिक वोट प्राप्त किए थे। वहीं, अकाली दल नौ क्षेत्रों में आगे रहा था। इस तरह, अलग-अलग चुनाव लड़ने के बावजूद दोनों दलों ने कुल 32 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी बढ़त बनाई थी। इन दोनों दलों के वोटों को जोड़ने पर कई अन्य सीटों पर भी चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
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यह विश्लेषण पंजाब की राजनीतिक बिसात पर एक नए अध्याय का संकेत देता है। गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के लिए चुनौती बढ़ सकती है। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां दोनों दलों का आधार एक-दूसरे का पूरक है।
भाजपा का शहरी और व्यापारी वर्ग में प्रभाव है। अकाली दल का ग्रामीण पंजाब, खासकर मालवा और पंथक क्षेत्रों में मजबूत आधार है। यदि ये दोनों आधार एक साथ आते हैं तो मुकाबला कड़ा हो सकता है।
प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त
खरड़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और अकाली दल के संयुक्त 58,045 वोट कांग्रेस के 46,622 वोट से 11,423 अधिक थे। मानसा में दोनों दलों के 57,918 वोट आम आदमी पार्टी के 48,008 वोट से 9,910 ज्यादा थे। समाना में भाजपा-अकाली के 44,258 वोट आम आदमी पार्टी के 36,141 वोट से 8,117 अधिक रहे।
खरड़ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और अकाली दल के संयुक्त 58,045 वोट कांग्रेस के 46,622 वोट से 11,423 अधिक थे। मानसा में दोनों दलों के 57,918 वोट आम आदमी पार्टी के 48,008 वोट से 9,910 ज्यादा थे। समाना में भाजपा-अकाली के 44,258 वोट आम आदमी पार्टी के 36,141 वोट से 8,117 अधिक रहे।
पटियाला ग्रामीण में संयुक्त 45,502 वोट आम आदमी पार्टी के 37,446 वोट से 8,056 ज्यादा थे। मौर में भी दोनों दलों के 43,237 वोट आम आदमी पार्टी के 35,211 वोट से आगे थे। अमृतसर पश्चिम में संयुक्त 42,388 वोट कांग्रेस के 35,012 वोट से 7,376 अधिक थे। फगवाड़ा में भी संयुक्त 37,000 वोट आम आदमी पार्टी के 30,349 वोट से 6,651 ज्यादा थे।
विभिन्न क्षेत्रों में बदल सकते हैं समीकरण
अटारी में भाजपा और अकाली दल के संयुक्त 37,897 वोट कांग्रेस के 32,479 वोट से 5,418 अधिक थे। नाभा में संयुक्त 40,543 वोट कांग्रेस के 36,230 वोट से 4,313 आगे थे। साहनेवाल में दोनों दलों के 60,797 वोट कांग्रेस के 55,541 वोट से 5,256 अधिक थे। श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र के बलाचौर में संयुक्त 29,472 वोट कांग्रेस के 22,684 वोट से ज्यादा थे।
अटारी में भाजपा और अकाली दल के संयुक्त 37,897 वोट कांग्रेस के 32,479 वोट से 5,418 अधिक थे। नाभा में संयुक्त 40,543 वोट कांग्रेस के 36,230 वोट से 4,313 आगे थे। साहनेवाल में दोनों दलों के 60,797 वोट कांग्रेस के 55,541 वोट से 5,256 अधिक थे। श्री आनंदपुर साहिब क्षेत्र के बलाचौर में संयुक्त 29,472 वोट कांग्रेस के 22,684 वोट से ज्यादा थे।
आनंदपुर साहिब में 42,808 वोट आम आदमी पार्टी के 39,898 वोट से आगे थे। माझा के दीनानगर में मुकाबला बेहद करीबी रहा, जहां संयुक्त 45,919 वोट कांग्रेस के 45,319 वोट से केवल 600 अधिक थे। बठिंडा शहर, लंबी, भुच्चो मंडी, बठिंडा ग्रामीण और बुढलाडा जैसे मालवा क्षेत्रों में भी गठबंधन का गणित मजबूत दिखता है।
गठबंधन की चुनौतियां और संभावनाएं
यह गणितीय आकलन वोटों के सीधे हस्तांतरण की गारंटी नहीं देता है। 2027 के चुनाव में उम्मीदवार, स्थानीय नेता और मतदाताओं की व्यक्तिगत पसंद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसान मुद्दे, पंथक मुद्दे, शहरी विकास, बेरोजगारी और सत्ता विरोधी रुझान भी चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
यह गणितीय आकलन वोटों के सीधे हस्तांतरण की गारंटी नहीं देता है। 2027 के चुनाव में उम्मीदवार, स्थानीय नेता और मतदाताओं की व्यक्तिगत पसंद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। किसान मुद्दे, पंथक मुद्दे, शहरी विकास, बेरोजगारी और सत्ता विरोधी रुझान भी चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
पंजाब की 117 सीटों पर 2027 की चुनावी लड़ाई अभी दूर है। असली सवाल यह है कि क्या भाजपा के शहरी और अकाली दल के ग्रामीण मतदाता एक ही उम्मीदवार के पीछे एकजुट हो पाएंगे। यदि ऐसा होता है तो पंजाब की कई सीटों का चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। यह गठबंधन पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।