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Jalandhar News: सभी केंद्र... आक्सीजन से तीन लोगों की मौत मामले में एमएस एसएमओ समेत तीन निलंबित, एक सर्जन बर्खास्त

Wed, 30 Jul 2025 08:46 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Jul 2025 08:46 PM IST
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Three people including MS SMO suspended and one surgeon dismissed in case of death of three people due to oxygen shortage
-जालंधर सिविल अस्पताल में हुई लापरवाही पर पंजाब सरकार ने लिया बड़ा एक्शन
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-प्रारंभिक जांच में सामने आया- प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई घटना
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़/जालंधर। जालंधर सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने के मामले में पंजाब सरकार ने मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) और सीनियर मेडिकल अफसर (एसएमओ) समेत तीन डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है। साथ ही एक हाउस सर्जन को बर्खास्त करने के आदेश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि इन अधिकारियों की गंभीर लापरवाही के कारण ऑक्सीजन आपूर्ति में बाधा आई जिससे कई गंभीर मरीजों की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि निलंबित किए गए अधिकारियों में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राज कुमार, सीनियर मेडिकल अफसर डॉ. सुरजीत सिंह और ऑन ड्यूटी कंसल्टेंट एनेस्थीसिया डॉ. सोनाक्षी शामिल हैं। इन तीनों डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया है। हाउस सर्जन डॉ. शमिंदर को बर्खास्त किया गया है। घटना की विस्तृत जांच जारी है जिसके आधार पर यदि दोष सिद्ध हुआ तो इन्हें सेवा से स्थायी रूप से बर्खास्त किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में ये किसी भी सेवा लाभ के पात्र नहीं होंगे। अब तीनों डॉक्टरों को आगे जांच व जवाब के लिए तलब किया जाएगा।
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अस्पताल में पर्याप्त बुनियादी ढांचा होने के बावजूद लापरवाही
मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि यह घटना पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई जबकि अस्पताल में पर्याप्त बुनियादी ढांचा, मानव संसाधन और चार ऑक्सीजन स्रोत उपलब्ध थे। इसके अलावा अगर आगे जांच में तकनीकी स्टाफ, इंजीनियर और किसी अन्य कर्मी की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में दोहरी कंप्रेसर युक्त पीएसए ऑक्सीजन प्लांट, 18-20 सिलेंडरों वाला मैनिफोल्ड सिस्टम, और एक तरल मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट मौजूद है जो चार स्तरीय बैकअप प्रदान करता है। इसके बावजूद ऑक्सीजन प्रेशर में भारी गिरावट आना ड्यूटी स्टाफ की घोर गैर-जिम्मेदारी को दर्शाता है। अस्पताल में 49 इंटर्नल मेडिकल अफसर, 46 डीएनबी डॉक्टर, 14 हाउस सर्जन और 17 मेडिकल अफसर हैं जो प्रति बेड एक डॉक्टर की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं। फिर भी ड्यूटी में लापरवाही के कारण कीमती जानें चली गईं।
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ऑक्सीजन आपूर्ति व बिजली बैकअप सुनिश्चित करने के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सरकारी अस्पतालों में आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर और आपातकालीन वार्ड जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति और बिजली बैकअप सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे ऑक्सीजन उपलब्धता, 30 मिनट की बैकअप सुविधा वाले यूपीएस सिस्टम और पूरी तरह कार्यशील जनरेटर सेट अनिवार्य होने चाहिए। ऐसी लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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किस की क्या भूमिका...
हाउस सर्जन डॉ. शमिंदर: मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ बिना बताए चले गए
अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही के किस्से हैरान करने वाले हैं। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जब ट्राॅमा के आईसीयू में मरीज वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ रहे थे तब हाउस हाउस सर्जन डॉ. शमिंदर उन्हें भगवान भरोसे छोड़ किसी को बिना बताए वहां से चले गए थे। ड्यूटी डॉक्टर होने के बावजूद उन्होंने स्टाफ नर्स या साथी डॉक्टर को कुछ नहीं बताया और जब ऑक्सीजन प्रेशर कम हुआ तो मरीजों को देखने वाला कोई नहीं था। ऑक्सीजन प्लांट के सुपरवाइजर नरिंदर के मुताबिक ऐसा मुमकिन नहीं की ऑक्सीजन प्रेशर कम होने के बाद आईसीयू में मरीजों के बेड पर लगे सेंसर न चले हों। लोगों की जिंदगियों के साथ ऐसा खिलवाड़ सवालिया निशान खड़े करता है लेकिन सिविल अस्पताल में डॉक्टर हो या टेक्नीशियन, उनका काम दर्ज कर के कर्मी संभाल रहे हैं। पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी लापरवाही डॉक्टर शमिंदर की पाई गई और उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। जब मरीजों की मौत हुई तो एसएमओ डॉ विनय आनंद ने कहा था कि ऑक्सीजन प्रेशर कम होने के बाद ही पूरी घटना हुई।
एमएस डॉ. राजकुमार व ट्रऍमा इंचार्ज डॉ मीनाक्षी: मरीज को समय पर रिकवर करते तो बच सकती थी जान
वेंटीलेटर पर मरीजों की हालत बिगड़ने के बाद मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राजकुमार और ट्रॉमा सेंटर की इंचार्ज एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर मीनाक्षी को फोन किया। जब तक स्टाफ और डॉक्टर उन्हें चेक करने पहुंचे मरीज ने दम तोड़ दिया था। हाउस सर्जन डॉ शमिंदर वार्ड में नहीं है, यह देखना भी दोनों की जिम्मेदारी थी। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ होने के नाते उनकी ड्यूटी थी कि गंभीर मरीजों की मॉनीटरिंग करें पर उन्होंने ढील बरती। एमएस डॉक्टर राजकुमार ने कहा कि इसे लेकर कोई लिखित ऑर्डर नहीं दिया गया है। सरकार जो जांच करेगी, हम उसका सहयोग करेंगे। अगर हमें सरकार जांच में शामिल होने के लिए बुलाएगी तो हम जाएंगे।

एसएमओ डॉ. सुरजीत: पीएसए प्लांट के इंचार्ज थे, धोबी को दे दी जिम्मेदारी
सिविल अस्पताल जालंधर में कोरोना के समय लगाए गए ऑक्सीजन प्लांट (पीएसए) के इंचार्ज एसएमओ डॉक्टर सुरजीत थे। ट्रॉमा के आईसीयू वार्ड में ऑक्सीजन प्रेशर कम होने के बाद दोबारा शुरू होने में जो देरी हुई उसका जिम्मेदार ठहराया गया है। जब घटना घटी उसे दौरान सुपरवाइजर नरिंदर छुट्टी पर था। दूसरा टेक्नीशियन राजीव की रात की शिफ्ट में आने वाला था और चादरें धोने वाले दर्जा का कर्मचारी दीपक जो कि सिर्फ ढाई महीने पहले ही प्लांट में लगा था, उसे पूरी जिम्मेदारी सौंपी थी। प्लांट सुपरवाइजर नरिंदर के अनुसार ऑक्सीजन प्रेशर कम होने के बाद दीपक समय पर दूसरा एमपीए ऑक्सीजन प्लांट चला नहीं पाया।
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