फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Three patients died in Jalandhar Civil hospital Sensors installed on beds failed

जालंधर सिविल में तीन मरीजों की मौत: बेड पर लगे सेंसर हो चुके थे फेल...ऑक्सीजन कम होने का पता ही नहीं चला

Tue, 29 Jul 2025 08:47 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 29 Jul 2025 08:47 AM IST
सार

ऑक्सीजन सप्लाई बंद होने से ट्रामा सेंटर में भर्ती अर्चना (15), अवतार लाल (32) और राजू (30) की मौत हो गई थी। अर्चना को 17 जुलाई को सांप के काटने के बाद भर्ती किया गया था, अवतार लाल को 27 जुलाई को नशे की ओवरडोज के चलते और राजू को 24 जुलाई को टीबी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था।

विज्ञापन
Three patients died in Jalandhar Civil hospital Sensors installed on beds failed
जालंधर सिविल अस्पताल के ट्रामा सेंटर में हादसा - फोटो : संवाद

विस्तार

जालंधर में ऑक्सीजन प्लांट बंद होने से सिविल अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती तीन मरीजों की मौत के मामले में प्रशासन की लापरवाही ही नजर आ रही है। 

विज्ञापन


टेक्निकल स्टाफ की रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन प्लांट बंद होने पर जब प्रेशर कम हुआ तो मरीजों के बेड पर लगे सेंसर की आवाज ही नहीं आई। सेंसर फेल होने की वजह से ऑक्सीजन लेवल कम होने की जानकारी ही नहीं मिल पाई तीन मरीजों की मौत हो गई। ट्रॉमा सेंटर में भर्ती अन्य दो मरीजों की हालत भी गंभीर बन गई थी लेकिन उन्हें बचा लिया गया। 
विज्ञापन


सेंसर फेल होने की बात डायरेक्टर हेल्थ अनिल अग्रवाल और सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने भी मानी है। डायरेक्टर ने कहा कि 16 सिलेंडर भरे हुए थे। ऑक्सीजन होने के बावजूद मरीजों की जान चली गई, यह जांच का विषय है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: गेस्ट हाउस की तीसरी मंजिल से गिरी महिला: पुरुष मित्र के साथ आई थी, डेढ़ घंटे बाद हादसा; पुलिस जांच में जुटी

नाै सदस्यीय कमेटी गठित

तीनों मरीजों की मौत के बाद जांच के लिए मेडिकल सुपरिटेंडेंट सिविल अस्पताल जालंधर डॉ. राजकुमार ने 9 सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इस कमेटी को साेमवार को सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने भंग कर हेल्थ डायरेक्टर, इंजीनियरिंग विंग के एक्सईएन और एक्सपर्ट को जांच सौंपते हुए 48 घंटे में रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। 

सोमवार सुबह सेहत मंत्री के अलावा दोपहर में मंत्री मोहिंदर भगत भी अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। बसपा के पंजाब प्रधान अवतार सिंह करीमपुरी ने कहा कि सरकार मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये और घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे। गलती स्वास्थ्य विभाग से हुई है और इसके लिए सरकार जिम्मेदार है। वहीं भाजपा ने तीनों मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

25-30 मिनट ऑक्सीजन बाधित हुई : डायरेक्टर हेल्थ

टेक्निकल जांच देख रहे डायरेक्टर हेल्थ अनिल अग्रवाल ने भी माना कि 25-30 मिनट के लिए ऑक्सीजन की सप्लाई आईसीयू में बाधित हुई थी। ट्रॉमा सेंटर में उपचाराधीन सभी मरीज सीरियस थे। इनमें तीन की मौत हो गई जबकि दो की हालत काफी बिगड़ गई थी। उन दोनों को उपचार के बाद बचा लिया गया। डायरेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के वक्त नियमित ऑपरेटर नरिंदर छुट्टी पर था और उसकी जगह लगाए नए कर्मचारी दीपक की भूमिका भी जांच के घेरे में है।

चंडीगढ़ की टीम ने जांच की, परिजनों और स्टाफ के बयान लिए

चंड़ीगढ़ से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्राथमिक जांच के तहत मृतकों के परिजनों, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों के बयान दर्ज कर लिए हैं। ट्रॉमा सेंटर के ऑक्सीजन प्लांट की फिजिकल और फंक्शनल जांच शुरू कर दी गई है। आईसीयू में लगे सभी जरूरी उपकरणों की भी जांच की जा रही है। 

डायरेक्टर ने साफ किया कि यह नहीं कह सकते कि सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई थी। सप्लाई सिस्टम में लगे मैनिफोल्ड बैकअप सिस्टम की कार्यक्षमता पर भी सवाल उठे हैं। अब यही जांच की जा रही है कि बैकअप समय पर क्यों नहीं चला। तकनीकी एक्सपर्ट को बुलाकर भी प्लांट की पूरी जांच करवाई गई है। एक्सपर्ट्स से लिखित रिपोर्ट भी ली गई है, जिसे जांच रिपोर्ट में जोड़ा गया है। पूरी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी। यदि किसी की लापरवाही साबित होती है तो कार्रवाई की जाएगी।

सरकार मौत के सही कारण छिपा रही है: परगट सिंह

कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने आरोप लगाया है कि मृतकों का पोस्टमॉर्टम नहीं करवाया गया, जिससे मौत के सही कारण की पुष्टि नहीं हो सकी। सरकार लोगों की मौत की वजह को सामने नहीं आने देना चाहती है क्योंकि इनके स्वास्थ्य एजेंडे की धज्जियां उड़ जाएंगी।

पंजाब के कई जिलों में आक्सीजन प्लांट की जांच, अतिरिक्त सिलिंडर भी जरूरी 

जालंधर के सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट से सप्लाई रुकने की वजह से हुई तीन मरीजों की मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। शीर्ष अधिकारी पंजाब के सरकारी अस्पतालों में लगे सभी ऑक्सीजन प्लांटों की जांच में जुट गए हैं। प्रयास किया जा रहा है कि आक्सीजन सिलिंडर का अतिरिक्त स्टॉक भी अस्पताल में पर्याप्त हो, जिससे आपात कालीन स्थिति में मरीजों को आक्सीजन की सप्लाई दी जा सके।

1000 और 700 एलपीएम के प्लांट, आपातकाल के लिए सिलिंडर भी

लुधियाना के सिविल अस्पताल में 1000 व 700 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) के दो ऑक्सीजन प्लांट हैं। यह दोनों लगातार ही ऑक्सीजन बनाते हैं। यह प्लांट 24 घंटे चालू रहते हैं। इनसे अस्पताल की इमरजेंसी, मदर एंड चाइल्ड यूनिट और आईसीयू के साथ कई वार्डों में ऑक्सीजन की सप्लाई भेजी जाती है। इन प्लांट की नियमित जांच के लिए दो ऑक्सीजन ऑपरेटर तैनात हैं। सबसे अहम है कि ऑक्सीजन प्लांट में यदि कोई तकनीकी खराबी हो तो अस्पताल ने सप्लाई चालू रखने के लिए 25 से 30 आक्सीजन सिलिंडर का स्टॉक हमेशा तैयार रखा जाता है। इनको सेंट्रल लाइन से जोड़कर अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंचाई जाती है।

राजिंदरा अस्पताल में आक्सीजन का पर्याप्त स्टॉक-डा. सीबिया

मालवा क्षेत्र के जाने-माने पटियाला स्थित सरकारी राजिंदरा अस्पताल में आक्सीजन की कोई कमी नहीं है। मेडिकल कालेज के डायरेक्टर प्रिंसिपल डा. आरएस सीबिया ने कहा कि राजिंदरा में आक्सीजन का पर्याप्त स्टाक है। राजिंदरा अस्पताल में दो लिक्विड आक्सीजन प्लांट हैं। इसके अलावा मैनीफोल्ड में बड़े व छोटे आक्सीजन सिलेंडरों का बैकअप भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी समेत अधिकतर वार्डों में आक्सीजन की सुविधा से लैस बेड हैं। किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल पूरी तरह से सक्षम है।

जीएनडीएच में ऑक्सीजन प्लांट 36 टन क्षमता का : मेडिकल सुपरिंटेंडेंट

अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल और सिविल अस्पताल में वर्ष 2021 कोरोनाकाल के दौरान केंद्र सरकार ने अमृतसर में पांच नए ऑक्सीजन प्लांट लगाने को मंजूरी दी थी और उनको अपडेट कर दिया था। अब अमृतसर में ऑक्सीजन प्लांट गुरु नानक देव अस्पताल, सिविल अस्पताल, सब डिवीजन अजनाला और बाबा बकाला साहिब में लगाए गए हैं। एक प्लांट 2000 एलपीएम, दो प्लांट 1000 कैपिसिटी और दो प्लांट 250-250 एपीएम कैपेसिटी के है। सिविल सर्जन डॉ. किरणदीप कौर ने बताया कि एक प्लांट सिविल अस्पताल अजनाला और दूसरा बाबा बकाला साहिब में है। सिविल अस्पताल अमृतसर में ऑक्सीजन प्लांट इंस्टाल है। यह एक मिनट में 1000 लीटर ऑक्सीजन प्रति मिनट तैयार करता है। जीएनीएच के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. कर्मजीत सिंह ने बताया कि इस प्लांट की क्षमता 36 टन की है। अस्पताल में 1000 लीटर प्रति मिनट कैपेसिटी का प्रेशर स्विंग एडजोर्पशन (पीएसए) प्लांट भी है जो हवा से ऑक्सीजन खींचकर मरीजों तक पहुंचाते हैं।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed