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Jalandhar: डेरा लाल बादशाह में गद्दी को लेकर बढ़ा तनाव, सूफी गायक हंसराज हंस और इलाके के लोगों के बीच ठनी
Fri, 19 Jul 2024 12:45 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 19 Jul 2024 12:45 PM IST
सार
पंजाब के सूफी गायक हंसराज हंस ने 10 साल पहले नकोदर स्थित बापू अलमस्त लाल बादशाह से सीधे तौर पर अपने संबंध तोड़ लिया था। वह उस समय डेरे में गद्दीनशीन संत थे। इस डेरे की गद्दी 16 साल पहले हंसराज हंस को सौंपी गई थी। अब वह फिर से इस गद्दी को पाना चाहते हैं।
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नकोदर स्थित डेरा बाबा लाल बादशाह
- फोटो : फाइल
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विस्तार
जालंधर के नकोदर स्थित डेरा बाबा लाल बादशाह में गद्दी को लेकर तनाव बढ़ गया है। विवाद बढ़ता देख सरकार ने रिसीवर नियुक्त कर दिया है, लेकिन डेरे में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है।
जालंधर देहात के एसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों व डीएसपी कुलविंदर सिंह विर्क ने डेरा लाल बादशाह के भीतर अस्थायी पुलिस कैंप बना लिया है। सारा विवाद गद्दी को लेकर है।
पंजाब के सूफी गायक हंसराज हंस ने 10 साल पहले नकोदर स्थित बापू अलमस्त लाल बादशाह से सीधे तौर पर अपने संबंध तोड़ लिया था। वह उस समय डेरे में गद्दीनशीन संत थे। इस डेरे की गद्दी 16 साल पहले हंसराज हंस को सौंपी गई थी। अब वह फिर से इस गद्दी को पाना चाहते हैं।
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उनके समर्थन में आप विधायक इंद्रजीत कौर मान व पवन गिल का गुट खड़ा हो गया है। वहीं, दूसरी तरफ इलाके के लोग हैं, जिन्होंने साफ कह दिया है कि हंसराज हंस को गद्दी पर नहीं बैठने देंगे। मामला पुलिस के गले की फांस बन चुका है। स्थिति तनावपूर्ण होती देखकर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
डेरा लाल बादशाह से अलग होने के बाद हंस ने कहा था कि अब उनकी जिंदगी का आगे का सफर गांव गोहीरां में डेरापंज पीर में रहेगा। वहां पर वे सूफी सेंटर का निर्माण करवाएंगे। वहीं पर वे सूफी गायकी की तालीम आने वाली पीढ़ी को देंगे, लेकिन इस बीच हंस का झुकाव राजनीति की तरफ हो गया। वह शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। बाद में 2019 में दिल्ली जाकर भाजपा की टिकट पर सांसद बन गए और वह दिल्ली में ही रहने लगे। अब 2024 के लोकसभा चुनाव में फरीदकोट से हारने के बाद वापस जालंधर आ गए हैं।
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जालंधर देहात के एसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों व डीएसपी कुलविंदर सिंह विर्क ने डेरा लाल बादशाह के भीतर अस्थायी पुलिस कैंप बना लिया है। सारा विवाद गद्दी को लेकर है।
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पंजाब के सूफी गायक हंसराज हंस ने 10 साल पहले नकोदर स्थित बापू अलमस्त लाल बादशाह से सीधे तौर पर अपने संबंध तोड़ लिया था। वह उस समय डेरे में गद्दीनशीन संत थे। इस डेरे की गद्दी 16 साल पहले हंसराज हंस को सौंपी गई थी। अब वह फिर से इस गद्दी को पाना चाहते हैं।
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उनके समर्थन में आप विधायक इंद्रजीत कौर मान व पवन गिल का गुट खड़ा हो गया है। वहीं, दूसरी तरफ इलाके के लोग हैं, जिन्होंने साफ कह दिया है कि हंसराज हंस को गद्दी पर नहीं बैठने देंगे। मामला पुलिस के गले की फांस बन चुका है। स्थिति तनावपूर्ण होती देखकर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
डेरा लाल बादशाह से अलग होने के बाद हंस ने कहा था कि अब उनकी जिंदगी का आगे का सफर गांव गोहीरां में डेरापंज पीर में रहेगा। वहां पर वे सूफी सेंटर का निर्माण करवाएंगे। वहीं पर वे सूफी गायकी की तालीम आने वाली पीढ़ी को देंगे, लेकिन इस बीच हंस का झुकाव राजनीति की तरफ हो गया। वह शिरोमणि अकाली दल की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। बाद में 2019 में दिल्ली जाकर भाजपा की टिकट पर सांसद बन गए और वह दिल्ली में ही रहने लगे। अब 2024 के लोकसभा चुनाव में फरीदकोट से हारने के बाद वापस जालंधर आ गए हैं।