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Jalandhar News: रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाएगा स्वदेशी यंत्र कवच 4.0
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फोटो: रेल पटरी के बीच लगे कवच 4.0
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-लोको पायलट को मिलेगा सटीक सिग्नल, ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन को खतरा होेने पर लगेगी ऑटोमेटिक ब्रेक
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संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर। रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाने में स्वदेशी यंत्र (कवच 4.0) काफी हद तक कामयाब हुआ है। धुंध के दौरान लोको पायलट को बाहर झांक कर सिग्नल नहीं देखना पड़ेगा बल्कि इंजन के अंदर बैठे हुए ही उसे सटीक सिग्नल मिल सकेगा। अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिलेंगी। ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन को खतरा होेने की स्थिति में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगी। यह यंत्र को दिल्ली-मुंबई रेल सेक्शन पर लगाया गया है। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है।
रेल मंत्री के मुताबिक ये यंत्र स्वदेशी है। इसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने वर्ष 2024 में मंजूरी दी थी। इसका विकास वर्ष 2015 में शुरू किया और तीन साल टेस्ट में लग गए। ये यंत्र ट्रैक पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन पर भी काम करेगा। रेलवे अगले छह साल तक उक्त यंत्र को प्रत्येक ट्रैक पर लगाने की तैयारी कर रही है ताकि रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
ऐसे काम करेगा उक्त यंत्र
रेल अधिकारियों के मुताबिक आरएफआईडी टैग्स (यंत्र) ट्रैक में हर किलोमीटर और प्रत्येक सिग्नल पर लगाए गए हैं जो ट्रेन की सही स्थिति बताते हैं। इसके अलावा टेलीकॉम टावर्स भी लगाए गए हैं जो लोको कवच व स्टेशन कवच को लगातार उक्त टावरों के जरिए संचार करते हैं। इनके साथ ट्रेन का ब्रेक सिस्टम भी जुड़ा होता है जब खतरे का सिग्नल मिले तो ऑटोमेटिक ब्रेक लग सके। ट्रैक के साथ ओएफसी केबल भी बिछाई जाती है जो सिस्टम को जोड़े रखती है।
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-लोको पायलट को मिलेगा सटीक सिग्नल, ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन को खतरा होेने पर लगेगी ऑटोमेटिक ब्रेक
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजपुर। रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाने में स्वदेशी यंत्र (कवच 4.0) काफी हद तक कामयाब हुआ है। धुंध के दौरान लोको पायलट को बाहर झांक कर सिग्नल नहीं देखना पड़ेगा बल्कि इंजन के अंदर बैठे हुए ही उसे सटीक सिग्नल मिल सकेगा। अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिलेंगी। ट्रैक पर दौड़ती ट्रेन को खतरा होेने की स्थिति में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगी। यह यंत्र को दिल्ली-मुंबई रेल सेक्शन पर लगाया गया है। यह जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है।
रेल मंत्री के मुताबिक ये यंत्र स्वदेशी है। इसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने वर्ष 2024 में मंजूरी दी थी। इसका विकास वर्ष 2015 में शुरू किया और तीन साल टेस्ट में लग गए। ये यंत्र ट्रैक पर 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन पर भी काम करेगा। रेलवे अगले छह साल तक उक्त यंत्र को प्रत्येक ट्रैक पर लगाने की तैयारी कर रही है ताकि रेल दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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ऐसे काम करेगा उक्त यंत्र
रेल अधिकारियों के मुताबिक आरएफआईडी टैग्स (यंत्र) ट्रैक में हर किलोमीटर और प्रत्येक सिग्नल पर लगाए गए हैं जो ट्रेन की सही स्थिति बताते हैं। इसके अलावा टेलीकॉम टावर्स भी लगाए गए हैं जो लोको कवच व स्टेशन कवच को लगातार उक्त टावरों के जरिए संचार करते हैं। इनके साथ ट्रेन का ब्रेक सिस्टम भी जुड़ा होता है जब खतरे का सिग्नल मिले तो ऑटोमेटिक ब्रेक लग सके। ट्रैक के साथ ओएफसी केबल भी बिछाई जाती है जो सिस्टम को जोड़े रखती है।
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