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सुप्रीम कोर्ट में भी बीडीएस छात्रों की याचिका खारिज
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Sat, 11 Jul 2015 10:17 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने भी पंजाब के 12 निजी डेंटल कॉलेजों में दाखिला लेने वाले
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441 बीएसडी विद्यार्थियों को किसी भी तरह की राहत देने से इंकार कर दिया
है। इन विद्यार्थियों ने पिछले वर्ष ही बिना किसी प्रवेश परीक्षा के बीडीएस
कोर्स में दाखिला लिया था।
उनके दाखिले को राज्य के मेडिकल शिक्षा व खोज विभाग समेत बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी ने अवैध करार दे रखा था जिसके खिलाफ विद्यार्थियों ने पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी थी। इस याचिका को हाईकोर्ट के एकल बेंच ने 15 जून और डबल बेंच ने 2 जुलाई को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट के इन्हीं आदेशों के खिलाफ विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पटीशन (एसएलपी) दायर की थी जिसे दो दिन पहले 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी ने पीएमईटी परीक्षा का आयोजन नहीं किया था और पंजाब में मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस में दाखिला के लिए एआईपीएमटी के मेरिट सूची का उपयोग किया गया।
बाबा फरीद विवि की काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत कई निजी डेंटल कॉलेजों में बीडीएस की तकरीबन 800 सीटें खाली रह गई। इसके चलते बाबा फरीद विवि की तरफ से बीडीएस के लिए एक स्पेशल प्रवेश परीक्षा करवाई गई। इस परीक्षा के बावजूद भी राज्य भर में बीडीएस की 450 सीटें खाली रह गई। इसके बाद 12 निजी कॉलेजों ने पंजाब सरकार व बाबा फरीद विवि से मंजूरी के बिना ही 12वीं कक्षा के आधार पर विद्यार्थियों को बीडीएस में दाखिला दे दिया और विवि के पंजीकरण करने से इंकार करने पर इन विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उनके दाखिले को राज्य के मेडिकल शिक्षा व खोज विभाग समेत बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी ने अवैध करार दे रखा था जिसके खिलाफ विद्यार्थियों ने पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर रखी थी। इस याचिका को हाईकोर्ट के एकल बेंच ने 15 जून और डबल बेंच ने 2 जुलाई को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट के इन्हीं आदेशों के खिलाफ विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पटीशन (एसएलपी) दायर की थी जिसे दो दिन पहले 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी ने पीएमईटी परीक्षा का आयोजन नहीं किया था और पंजाब में मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस व बीडीएस में दाखिला के लिए एआईपीएमटी के मेरिट सूची का उपयोग किया गया।
बाबा फरीद विवि की काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत कई निजी डेंटल कॉलेजों में बीडीएस की तकरीबन 800 सीटें खाली रह गई। इसके चलते बाबा फरीद विवि की तरफ से बीडीएस के लिए एक स्पेशल प्रवेश परीक्षा करवाई गई। इस परीक्षा के बावजूद भी राज्य भर में बीडीएस की 450 सीटें खाली रह गई। इसके बाद 12 निजी कॉलेजों ने पंजाब सरकार व बाबा फरीद विवि से मंजूरी के बिना ही 12वीं कक्षा के आधार पर विद्यार्थियों को बीडीएस में दाखिला दे दिया और विवि के पंजीकरण करने से इंकार करने पर इन विद्यार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।