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Jalandhar By-Poll: अकाली दल को एकजुट रखना सुखबीर के लिए चुनौती, बड़े बादल के जाने के बाद बनाना होगा सामंजस्य

Sat, 29 Apr 2023 05:10 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 29 Apr 2023 05:10 PM IST
सार

सुखबीर को नई लीडरशिप को टकसाली नेताओं के एक साथ लेकर चलना होगा। हालांकि कई टकसाली नेता अंदरखाते सुखबीर का विरोध करते आ रहे हैं कि उनको अकाली दल की प्रधानगी छोड़ देनी चाहिए और नए चेहरे को आगे लाना चाहिए ताकि पंजाब में अकाली दल को दोबारा खड़ा किया जा सके।

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Sukhbir Badal will have to face new political challenges after demise of Parkash singh badal
पिता के जाने के बाद बढ़ी सुखबीर बादल की राजनीतिक चुनौतियां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के स्वर्गवास के बाद अब अकाली दल के सुप्रीमो सुखबीर बादल को नई राजनीतिक चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा। पार्टी में कई ऐसे टकसाली अकाली हैं, जिनका लंबा राजनीतिक सफर प्रकाश सिंह बादल के साथ गुजरा है और पार्टी में उनका खासा सम्मान है। इन टकसाली अकाली नेताओं को पार्टी में पूरा मान सम्मान देते हुए पार्टी को एकजुट रखना सुखबीर के लिए आसान नहीं होगा और उनको चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
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प्रकाश सिंह बादल जब तक पार्टी के मुखिया रहे, उन्होंने पुराने और युवा नेताओं को सम्मान देते हुए सामंजस्य बनाए रखा। उनके समय में पुराने टकसाली नेताओं को कभी मान सम्मान में कमी महसूस नहीं हुई। लेकिन सुखबीर ने प्रधान बनने पर अपने विश्वस्त और युवाओं नेताओं की एक टीम बनाई। इसके चलते प्रकाश सिंह बादल के नजदीकी कई टकसाली नेताओं को लगा कि उनकी बात को सुखबीर पूरी तवज्जो नहीं दे रहे। इस कारण सुखदेव सिंह ढींडसा, बीबी जागीर कौर, सरवण सिंह फिल्लौर जैसे नेता शिरोमणि अकाली दल छोड़ गए। इससे पहले सेखवां का परिवार अकाली दल छोड़ चुका है।
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वर्तमान में शिरोमणि अकाली दल के भीतर प्रेम सिंह चंदूमाजरा, बलविंदर सिंह भूंदड़, सिकंदर सिंह मलूका, विरसा सिंह वल्टोहा, शरणजीत सिंह ढिल्लों, गुलजार सिंह राणिके, डॉ. दलजीत सिंह चीमा आदि पहली कतार के नेता हैं, जिन्होंने लंबा समय प्रकाश सिंह बादल के साथ गुजारा है। पार्टी में नई लीडरशिप खड़ी हो चुकी है, जिसमें बिक्रम सिंह मजीठिया, रोजी बरकंदी, एनके शर्मा, मनप्रीत अयाली, पवन कुमार टीनू, अनिल जोशी, गुरप्रताप सिंह वडाला आदि नेता हैं। ये नेता सुखबीर बादल के विश्वस्त हैं।
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झुंडा कमेटी की सिफारिशों को लागू नहीं किया
अब सुखबीर को नई लीडरशिप को टकसाली नेताओं के एक साथ लेकर चलना होगा। हालांकि कई टकसाली नेता अंदरखाते सुखबीर का विरोध करते आ रहे हैं कि उनको अकाली दल की प्रधानगी छोड़ देनी चाहिए और नए चेहरे को आगे लाना चाहिए ताकि पंजाब में अकाली दल को दोबारा खड़ा किया जा सके। पार्टी की तरफ से झुंडा कमेटी का गठन किया गया था, जिसकी रिपोर्ट में साफ था कि अगर पंजाब में अकाली दल को दोबारा जिंदा करना है तो नया प्रधान चुना जाए। लेकिन सुखबीर बादल ने झुंडा कमेटी की रिपोर्ट को लागू ही नहीं किया। पार्टी का एक बड़ा गुट इस कमेटी का हिमायती है। झुंडा कमेटी ने पंजाब के गांव -गांव जाकर रिपोर्ट तैयार की थी कि 2022 के चुनावों में अकाली दल को 117 में से तीन सीट क्यों आई ? अकाली दल हाशिये पर क्यों चला गया ?
 
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