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जालंधर की अलका भोपल की कहानी: मां के बाद खुद भी कैंसर से जूझीं, एक चुनौती की तरह लड़ी जंग 

Fri, 04 Feb 2022 03:59 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 04 Feb 2022 03:59 PM IST
सार

अलका कहती हैं कि  स्कूल की सहेलियों ने लगातार रोज फोन कर काउंसलिंग करना और मेरी दिनचर्या पर बात करना शुरू कर दिया। मुझे लगा कि असल जिंदगी तो यह है कितना प्यार मिल रहा है और प्यार बांट भी रही हूं।

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Story of Cancer Survivor of Jalandhar
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

अंग्रेजी में मास्टर डिग्री कर पंजाब सरकार में लेक्चरर की नौकरी करने वाली अलका भोपल की जिंदगी कैंसर ने बदल दी है। अलका कहती हैं कि कैंसर मेरे लिए चुनौती भरा था, मेरी मां को हुआ और पांच माह बाद मेरे को। मेरी 77 वर्षीय मां ने हिम्मत दिखाई तो मैं कहां हारने वाली थी। कैंसर को ही सकारात्मक ले लिया और अपनी जिंदगी का मिशन पॉजिटिव लेकर चलने लगी। खुद को अध्यात्म से जोड़ा और जीने की कला सीख ली। आज भी तेज स्कूटर चलाती हूं, खाना खुद बनाती हूं और स्कूल में आकर बच्चों को पढ़ाती हूं। कैंसर है तो क्या हुआ, मैं इसको हरा ही दूंगी यह ठान लिया है मन में।

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47 साल की अलका भोपल का कहना है कि मेरी मां संतोष कुमारी 77 साल की हैं। उनको गले का कैंसर पिछले साल शुरुआती समय में हुआ था। मेरी मां जबरदस्त हिम्मत वाली है और उन्होंने कैंसर के साथ जंग लड़ी। पांच माह बाद मुझे भी तकलीफ शुरू हो गई। मेरी बाजू में हल्का-हल्का दर्द होता था। कभी जलन महसूस होती थी। एक माह तक मैं छोटी मोटी दवाएं खाती रही लेकिन एक चिकित्सक की सलाह पर मैंने स्कूल से छुट्टी लेकर टेस्ट करवाया। शाम को रिपोर्ट आई तो उसमें ब्रेस्ट कैंसर था। रिपोर्ट पढ़ने के बाद मैंने स्ट्रेस या परेशानी नहीं ली, आंखों को भरने तक नहीं दिया। 
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ठान लिया यह कैंसर क्या चीज है, इसको हराना है। कैंसर को उलटा जिंदगी की एक चुनौती के रूप में ले लिया। कैंसर का आपरेशन करवाया, बाद में कीमोथैरेपी करवाई। घर में अकेली बोर न हो जाऊं, इसलिए दोस्तों ने पूरा जिंदगी में रंग भर दिया। मेरी सहेलियों ने फाइटर ग्रुप बनाया, मुझे रोज पॉजिटिव मैसेज और फोन कर ट्रैक करने लगीं। स्कूल की सहेलियों ने लगातार रोज फोन कर काउंसलिंग करना और मेरी दिनचर्या पर बात करना शुरू कर दिया। मुझे लगा कि असल जिंदगी तो यह है कितना प्यार मिल रहा है और प्यार बांट भी रही हूं। जिंदगी की छोटी-छोटी चीजें गुस्सा, घमंड सब भगा दिया। खुद को अध्यात्म से जोड़ा और जिंदगी जीने की असल कला सिखी।
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अलका भोपल चहकते हुए बताती हैं कि पता है कि मैं जब आपरेशन करवाकर लौटी तो चंद दिन बाद ही किचन में थी। रोटी सब्जी बनाने लगी। अब देखो आज बारिश हो रही है, मैं तो तेज स्कूटर चलाकर स्कूल आ गई और यहां पर पढ़ा भी रही हूं। जिंदगी मजे से खुलकर जिओ और हर चुनौती का सामना डटकर करो।

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