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गुरदेव सिंह बादल के परिवार की शिअद से बगावत
ब्यूरो/अमर उजाला, जैतो (फरीदकोट)
Updated Sun, 04 Sep 2016 09:10 PM IST
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शिअद
- फोटो : demo
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मुुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के करीबी साथी और लंबे समय तक जिले के पंजगराईं विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे पूर्व मंत्री गुरदेव सिंह बादल के परिवार ने शिअद से बगावत कर दी है।
शनिवार देर शाम अपने आवास पर आयोजित समर्थकों की मीटिंग के बाद उनके बेटे सूबा सिंह बादल ने जैतो सीट से बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ने का एलान किया। साथ ही किसी अन्य पार्टी की टिकट पर मैदान में कूदने की संभावना से भी इंकार नहीं किया।
शिअद नेताओं की पहली कतार में शामिल गुरदेव सिंह बादल को किसी समय मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का बेहद करीबी माना जाता था। उनके साथ करीबी रिश्तों की वजह से ही वह अपने नाम के पीछे बादल शब्द का उपयोग करते रहे हैं, जबकि उनका गांव बादल से कोई लेना देना नहीं है। लगातार पांच बार पंजगराईं विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे गुरदेव सिंह बादल पिछली शिअद सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री भी रहे।
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साल 2007 के चुनाव में वह कांग्रेस उम्मीदवार जोगिंदर सिंह से चुनाव हार गए थे। उसके बाद 2012 में भी उन्हें जोगिंदर सिंह के हाथों ही हार का मुंह देखने को मिला। इसके बाद से ही शिअद में उनकी पूछताछ खत्म सी हो गई और वह खुद भी बीमार रहने लगे। उधर शिअद ने जैतो क्षेत्र की कमान कांग्रेस छोड़कर आए बल्लूआना के पूर्व विधायक प्रकाश सिंह भट्टी को सौंप दी।
इससे नाराज चल रहे गुरदेव सिंह बादल के परिवार ने शिअद को अलविदा कहने का फैसला कर लिया। समर्थकों की मीटिंग के बाद गुरदेव सिंह बादल के बेटे सूबा सिंह बादल ने कहा कि वह साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जैतो से आजाद उम्मीदवार के तौर मैदान में उतरेंगे। उन्होंने किसी अन्य पार्टी में शामिल होने का विकल्प खुला रखा हुआ है।
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शनिवार देर शाम अपने आवास पर आयोजित समर्थकों की मीटिंग के बाद उनके बेटे सूबा सिंह बादल ने जैतो सीट से बतौर आजाद उम्मीदवार चुनाव लड़ने का एलान किया। साथ ही किसी अन्य पार्टी की टिकट पर मैदान में कूदने की संभावना से भी इंकार नहीं किया।
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शिअद नेताओं की पहली कतार में शामिल गुरदेव सिंह बादल को किसी समय मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का बेहद करीबी माना जाता था। उनके साथ करीबी रिश्तों की वजह से ही वह अपने नाम के पीछे बादल शब्द का उपयोग करते रहे हैं, जबकि उनका गांव बादल से कोई लेना देना नहीं है। लगातार पांच बार पंजगराईं विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे गुरदेव सिंह बादल पिछली शिअद सरकारों में महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री भी रहे।
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साल 2007 के चुनाव में वह कांग्रेस उम्मीदवार जोगिंदर सिंह से चुनाव हार गए थे। उसके बाद 2012 में भी उन्हें जोगिंदर सिंह के हाथों ही हार का मुंह देखने को मिला। इसके बाद से ही शिअद में उनकी पूछताछ खत्म सी हो गई और वह खुद भी बीमार रहने लगे। उधर शिअद ने जैतो क्षेत्र की कमान कांग्रेस छोड़कर आए बल्लूआना के पूर्व विधायक प्रकाश सिंह भट्टी को सौंप दी।
इससे नाराज चल रहे गुरदेव सिंह बादल के परिवार ने शिअद को अलविदा कहने का फैसला कर लिया। समर्थकों की मीटिंग के बाद गुरदेव सिंह बादल के बेटे सूबा सिंह बादल ने कहा कि वह साल 2017 के विधानसभा चुनाव में जैतो से आजाद उम्मीदवार के तौर मैदान में उतरेंगे। उन्होंने किसी अन्य पार्टी में शामिल होने का विकल्प खुला रखा हुआ है।