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Jalandhar News: लड़की है... लड़कों के साथ मत खेलने दो लेकिन पिता ने किसी की नहीं सुनी

Thu, 06 Nov 2025 08:19 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Nov 2025 08:19 PM IST
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She is a girl... don't let her play with boys but her father did not listen to anyone. harmanpreet kaur moga
-भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर के पिता के दोस्त ने बताए संघर्ष के किस्से
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तन्मय सामंता
मोगा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर का बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। साधारण परिवार से निकलीं हरमन के लिए क्रिकेट को कॅरिअर के रूप में चुनना आसान नहीं था। मोगा के छोटे से गांव दुनेका से निकल कर भारतीय क्रिकेट टीम की कमान संभालने और टीम को विश्व चैंपियन बनाने तक के सफर में उन्हें कई चुनौतियों से होकर गुजरना पड़ा। हरमनप्रीत के पिता हरमिंदर सिंह के दोस्त गोवर्धन पोपली ने उनके संघर्ष के किस्से बताए।
उन्होंने बताया कि हरमन ने गली-मोहल्ले से क्रिकेट शुरू कर बड़े अंतरराष्ट्रीय मैदानों तक का सफर तय किया। जब हरमनप्रीत बचपन में क्रिकेट खेलती थीं तो पिता को लोगों से ताने सुनने पड़ते थे। वह लड़कों के साथ खेलती थी क्योंकि उस समय पंजाब में बहुत कम लड़कियां ही क्रिकेट को कॅरिअर के रूप में आगे बढ़ा रही थीं। गोवर्धन पोपली ने बताया कि लोग हरमन के पिता को कहते थे- लड़की है, इसे लड़कों के साथ मत खेलने दो लेकिन पिता ने समाज की परवाह नहीं की। उन्होंने बेटी का साथ दिया और वही करने दिया जो उसका दिल चाहता था। उन्होंने न सिर्फ बेटी को क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया बल्कि उसे हर संभव सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास भी किया। खुद खिलाड़ी होने के कारण वही हरमन के पहले कोच भी बने। अपने बैट को काट कर उन्होंने हरमन को दे दिया ताकि वह प्रैक्टिस कर सके। उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए पिता ने हरमन को कमलदीश सिंह सोढी से कोचिंग दिलवाई। आज वही हरमनप्रीत कौर अपने पिता का और पूरे देश का नाम रोशन कर रही है।
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छोटी सी उम्र में ही बड़े शॉट्स लगाती थी हरमन
गोवर्धन पोपली ने बताया, मैं और हरमन के पिता गुरुनानक कॉलेज मोगा के ग्राउंड में साथ क्रिकेट खेलते थे। हरमन छोटी सी उम्र में ही बड़े शॉट्स लगाती थी। यह देखने के बाद ही पिता ने तय किया वह बेटी को क्रिकेट में ही आगे बढ़ाएंगे। जो लोग तब रोकते थे आज वही कह रहे हैं कि हरमन ने न केवल भारत को जीत दिलाई, बल्कि हजारों बेटियों को अपने सपनों पर भरोसा करना भी सिखाया। संवाद
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