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जेल में बैठकर नेटवर्क चला रहा पिंदा, आतंकियों से भी संबंध

Fri, 24 Jun 2022 10:30 PM IST
Punjab Bureau पंजाब ब्‍यूरो
Updated Fri, 24 Jun 2022 10:30 PM IST
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Running the network while sitting in jail Pinda, also relations with terrorists
जालंधर। जालंधर के गांव निहालूवाल का पलविंदर सिंह पिंदा निहालूवालिया बेशक बठिंडा की जेल की सलाखों में है, लेकिन उसका नेटवर्क व टीम आज भी सक्रिय है। पिंदा खाकी वर्दी वालों को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता है। यही वजह है कि पुलिस पार्टी पर हमला करना, उनके नेटवर्क को ध्वस्त करना पिंदा बाएं हाथ का खेल समझता है। नाभा जेल ब्रेक हो या फिर एएसआई की गोली मारकर हत्या की वारदात, पिंदा का नाम इनमें प्रमुखता से आया। यही नहीं, आईबी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, पिंदा आतंकी नेटवर्क से भी जुड़ा है और उसके संपर्क काफी गहरे हैं।
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गांव निहालूवाल का पिंदा एक साधारण और मध्यवर्गीय परिवार का रहने वाला था। कुछ वर्ष पहले एक मामूली विवाद के बाद पुलिस ने पिंदा, उसके भाई और पूरे परिवार को परेशान किया था। पुलिस ने पिंदा के खिलाफ कई आरोप लगाए। पुलिस की धक्केशाही से पूरा परिवार बेघर हो गया। फसल बर्बाद हो गई। पुलिस के डर से पिंदा को घर से बाहर रहने को मजबूर होना पड़ा। पिंदा में खाकी के लिए आग तभी से जलने लगी थी। इसी दौरान वह अपराधियों के संपर्क में आया और गैंगस्टर बन गया। पलविंदर सिंह संधू उर्फ पिंदा निहालूवाला ने बहुत ही कम समय में अपराध की दुनिया में कदम रख लिया था
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31 मार्च 2014 को हवेला रेस्तरां के बाहर पंजाब पुलिस के ट्रैफिक एएसआई गुरदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नोनी अपने दोस्त यूके सिटीजन तलविंदर टैल्ली, पलविंदर पिंदा निहालूवालिया व एक अन्य साथी के साथ हवेली रेस्तरां में गया था। यहां उसके साथी एक बाथरूम में जाकर हेरोइन पी रहे थे, अंदर पहुंचे कांस्टेबल ने उन्हें रोका। बाहर आकर एएसआई गुरदेव सिंह ने उनको पकड़ना चाहा तो उन्होंने गोलियां मारकर हत्या कर दी। पिंदा गिरफ्तार हो गया लेकिन उसका नेटवर्क पंजाब के नामी गैंगस्टरों से बन चुका था। विक्की गौंडर हो या प्रेमा लहौरिया, पिंदा इनके काफी निकट माना जाता था।
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जब पिंदा नाभा जेल में था, तो दांतों की परेशानी के कारण अस्पताल लाया गया। यहां पिंदा के साथियों ने पीछे से फायरिंग की, एक गोली पुलिस मुलाजिम की जांघ में लगी। पिंदा के बाकी साथियों ने एएसआई निर्मल सिंह की आंखों में मिर्ची डाल दी। इस दौरान पिंदा ने अपना हाथ हथकड़ी से छुड़ा लिया और साथियों के साथ अस्पताल के पिछले गेट से फरार हो गया। पिछले गेट से गाड़ी नहीं जाती, वहां से केवल पैदल ही जाया जा सकता है। गैंग के साथियों ने पहले से ही अपनी गाड़ी और ड्राइवर अस्पताल के बाहर तैयार कर रखा था। वे भागते हुए आए और गाड़ी में बैठ कर फरार हो गए और पुलिस हाथ मलती रह गयी। पिंदा दो साल तक देहरादून में रहा। इसके बाद उसे नाभा जेल में बंद गैंगस्टर विक्की गौंडर, नीटा दयोल व सेखों के अलावा दो आतंकवादियों कश्मीर सिंह व हरमिंदर सिंह मिंटू को छुड़ाने की जिम्मेदारी मिली। इसका पूरा खाका पिंदा ने तैयार किया। पिंदा नाभा जेल के चप्पे चप्पे से वाकिफ था। पहले अधिकारियों को 50 लाख रुपये की डील कर साथ मिलाया गया।

2016 में योजना के मुताबिक, नाभा जेल में चार गाड़ियों में पुलिस की वर्दी में आए दस हथियारबंद अपराधियों ने केएलएफ चीफ मिंटू, कश्मीर सिंह, गुरप्रीत सिंह सेखों, हरजिंदर सिंह उर्फ विक्की गौंडर, अमनदीप सिंह ढोडियां और कुलप्रीत सिंह नीटू को फरार करवा लिया। इस दौरान करीब 100 राउंड गोलियां भी चलाईं। हालांकि पिंदा को यूपी में गिरफ्तार कर लिया गया। पंजाब पुलिस की तरफ से हाई अलर्ट किया गया था। यूपी में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस को देखकर पिंदा फार्च्यूनर से कूदकर भागने लगा। पुलिस वालों ने पीछा किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। छह साल से पिंदा बठिंडा जेल में बंद है लेकिन उसका जमीनी स्तर पर नेटवर्क अभी भी चल रहा है। दरअसल, पुलिस ने विक्की गौंडर व प्रेमा लहौरिया को मुठभेड़ में मार गिराया था। उसके बाद से पिंदा ने जेल से ही पूरा नेटवर्क संभाल रखा है।
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