पंजाब विधानसभा चुनाव: दविंदरपाल भुल्लर की रिहाई बनने लगी मुद्दा, एकजुट हो रहे पंथक नेता
भुल्लर को 1993 में दिल्ली में हुए बम विस्फोट का दोषी मानते हुए कोर्ट ने 2002 में फांसी की सजा सुनाई थी। यह विस्फोट मनिंदरजीत सिंह बिट्टा पर किया था। इसमें वह घायल हो गए थे, जबकि उनके सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी।
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पंजाब में विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती चल रही है और चंद दिन शेष हैं। इस बीच दविंदरपाल सिंह भुल्लर की रिहाई का मामला चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है और इसमें आम आदमी पार्टी की दिल्ली व भाजपा की केंद्र सरकार बुरी तरह से घिरती जा रही है। भुल्लर की रिहाई की फाइल दिल्ली की केजरीवाल सरकार के पास मंजूरी के लिए पड़ी है। भुल्लर की पत्नी बीबी नवनीत कौर ने बताया कि इस फाइल को दिल्ली सरकार ने रोक रखा है।
पंथक नेता व श्री गुरु नानक देव जी की 17वीं पीढ़ी के वंशज बाबा सर्बजोत सिंह बेदी का कहना है कि जेल में बंद सिख नौजवानों की रिहाई होनी चाहिए। सिखों की काली सूची भी नहीं बननी चाहिए और मोदी सरकार को पंजाब के तमाम मसलों को हल करना चाहिए। पंजाब के पंथक नेता केंद्र सरकार से बातचीत के लिए तैयार है। दिल्ली के सीएम केजरीवाल को भी सिखों की भावनाओं की कद्र करते हुए भुल्लर की रिहाई के आदेश देने चाहिए। बेदी ने कहा कि केजरीवाल मानवाधिकारों की बात को गंभीरता से लेंगे और सिख कौम का सम्मान करेंगे। बाबा बेदी ने सभी सिख संस्थाओं से अपील की कि वह एक मंच पर आकर भुल्लर के समर्थन में आवाज बुलंद करें।
बादल ने भुल्लर की रिहाई की मांग की तो दादूवाल ने बादल को कटघरे में खड़ा किया
पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने भुल्लर की रिहाई की मांग की तो हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान बलजीत सिंह दादूवाल ने प्रकाश सिंह व सुखबीर बादल को कटघरे में खड़ा कर दिया। दादूवाल ने कहा कि बादल जब सीएम थे तो सिख जत्थेबंदियों ने मांग की थी कि भुल्लर को पंजाब शिफ्ट करवाया जाए तो फाइल पर सूबा सरकार ने लिख दिया कि भुल्लर खतरनाक आतंकवादी है। इस स्थिति के लिए बादल जिम्मेदार हैं। आम आदमी पार्टी के केजरीवाल को भी चाहिए कि वह भुल्लर की जल्द रिहाई करवाएं।
आम आदमी पार्टी बैकफुट पर
भुल्लर को 1993 में दिल्ली में हुए बम विस्फोट का दोषी मानते हुए कोर्ट ने 2002 में फांसी की सजा सुनाई थी। यह विस्फोट मनिंदरजीत सिंह बिट्टा पर किया था। इसमें वह घायल हो गए थे, जबकि उनके सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी। भुल्लर की पत्नी ने फांसी की सजा के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर इसे उम्रकैद में बदलने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2014 में भुल्लर की फांसी की सजा पर रोक लगा दी, वजह बताई कि मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के पास दायर दया याचिका में सुनवाई में देरी को लेकर 15 कैदियों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। 13 दोषियों की सजा कम कर दी थी। दो अन्य दोषियों की सजा मानसिक बीमारी की वजह से कम की गई थी। इसे आधार बना कर ही भुल्लर की रिहाई की मांग बार-बार उठ रही है। मामला जोर पकड़ता जा रहा है और पंथक नेता व संत समाज एकजुट हो रहा है और एनआरआई सिख इस मामले को लेकर सक्रिय हो गए हैं, इससे ये मांग पंजाब में तेजी से फैलती जा रही है।
सिख संगठनों का आरोप है कि केंद्र में मोदी सरकार द्वारा भुल्लर की रिहाई के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, इसके बावजूद दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने इस प्रस्ताव को चार बार खारिज कर दिया है। भुल्लर की रिहाई को केजरीवाल सरकार के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने 2020 में भी खारिज कर दिया था। तीन बार भुल्लर की रिहाई का प्रस्ताव आप खारिज कर चुकी है और पंथक की नाराजगी पार्टी के प्रति बढ़ती जा रही है।