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रेलवे हादसों में इस साल अब तक 178 लोग गंवा चुके हैं जान
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Wed, 02 Dec 2015 08:28 PM IST
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गवर्नमेंट रेलवे पुलिस पंजाब (जीआरपी) के 11 माह के रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2015 में 178 लोग रेलवे एक्सीडेंट में खुद की जान गंवा चुके हैं।
इनमें वे लोग शामिल हैं, जिनकी रेलवे लाइनें क्रास करते समय ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके अलावा चलती ट्रेन से गिरकर मरने वाले एक्सीडेंट केस भी शामिल हैं।
जालंधर स्थित जीआरपी थाने में जनवरी से नवंबर 2015 तक दर्ज किए रिकॉर्ड में अब तक 304 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें रेलवे एक्सीडेंट के 178 केस हैं।
इसके अलावा 50 लोगों ने आत्महत्याएं की। अन्य लोगों की कुदरती मौत हुई है। साल 2014 में मरने वाले लोगों की संख्या 357 थी, जो इस साल कम हुई है।
यह रिकॉर्ड जालंधर थाने के अंतर्गत आती अलग-अलग चौकियों के एरिया को मिलाकर है। इसमें जालंधर समेत नकोदर, लोहियां खास, जालंधर कैंट, होशियारपुर और नवांशहर का रिकार्ड दर्ज है।
रेलवे हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है। इसकी वजह है कि रेलवे लाइनों को क्रास करने वाले, रेलवे ट्रैक के बीच एवं साथ में चलने वाले, चलती ट्रेन से नीचे गिरने वाले लोग शामिल हैं।
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मानव रहित फाटकों एवं रेलवे लाइनों को पार करते समय दोनों साइड की तरफ न देखना सबसे बड़ी गलती है। यही कारण है कि जिन से काफी लोग ट्रेन के नीचे आकर जान गंवा देते हैं।
साल 2015 में अब तक ट्रेन के नीचे आकर करीब 50 लोग जान गवा चुके हैं। जीआरपी के थाना प्रभारी बलदेव सिंह रंधावा ने कहा कि रेलवे प्रशासन की ओर से लोगों को बार-बार समझाता जाता है कि रेलवे लाइनों और मानव रहित फाटकों को देखकर क्रास करें।
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इनमें वे लोग शामिल हैं, जिनकी रेलवे लाइनें क्रास करते समय ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इसके अलावा चलती ट्रेन से गिरकर मरने वाले एक्सीडेंट केस भी शामिल हैं।
जालंधर स्थित जीआरपी थाने में जनवरी से नवंबर 2015 तक दर्ज किए रिकॉर्ड में अब तक 304 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें रेलवे एक्सीडेंट के 178 केस हैं।
इसके अलावा 50 लोगों ने आत्महत्याएं की। अन्य लोगों की कुदरती मौत हुई है। साल 2014 में मरने वाले लोगों की संख्या 357 थी, जो इस साल कम हुई है।
यह रिकॉर्ड जालंधर थाने के अंतर्गत आती अलग-अलग चौकियों के एरिया को मिलाकर है। इसमें जालंधर समेत नकोदर, लोहियां खास, जालंधर कैंट, होशियारपुर और नवांशहर का रिकार्ड दर्ज है।
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रेलवे हादसों में मरने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है। इसकी वजह है कि रेलवे लाइनों को क्रास करने वाले, रेलवे ट्रैक के बीच एवं साथ में चलने वाले, चलती ट्रेन से नीचे गिरने वाले लोग शामिल हैं।
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मानव रहित फाटकों एवं रेलवे लाइनों को पार करते समय दोनों साइड की तरफ न देखना सबसे बड़ी गलती है। यही कारण है कि जिन से काफी लोग ट्रेन के नीचे आकर जान गंवा देते हैं।
साल 2015 में अब तक ट्रेन के नीचे आकर करीब 50 लोग जान गवा चुके हैं। जीआरपी के थाना प्रभारी बलदेव सिंह रंधावा ने कहा कि रेलवे प्रशासन की ओर से लोगों को बार-बार समझाता जाता है कि रेलवे लाइनों और मानव रहित फाटकों को देखकर क्रास करें।