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खेल: पुरुष हॉकी का मक्का पंजाब, महिला हॉकी का हरियाणा, पढ़ें- दोनों राज्यों के पिछड़ने व आगे बढ़ने की कहानी

Wed, 11 Aug 2021 07:50 PM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Wed, 11 Aug 2021 07:50 PM IST
सार

भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल के बाद ओलंपिक खेल में पदक जीता है, जिसमें कप्तान और उप-कप्तान समेत सबसे अधिक 11 खिलाड़ी पंजाब के हैं। कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के इन 11 पंजाबी खिलाड़ियों में मनप्रीत सिंह (कप्तान), हरमनप्रीत सिंह (उप कप्तान), रुपिंदर पाल सिंह, सिमरनजीत सिंह, मनदीप सिंह, गुरजंट सिंह, शमशेर सिंह, वरुण कुमार, दिलप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह और कृष्ण पाठक हैं।

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Punjab is the Mecca of men hockey Haryana top in women hockey
भारतीय हॉकी टीम - फोटो : ट्विटर @TheHockeyIndia

विस्तार

भारतीय महिला हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन किया है। इतिहास साक्षी है कि यह पहला मौका है जब महिला हॉकी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। कभी महिला हॉकी में सरदारी करने वाला पंजाब हरियाणा से पिछड़ गया है। महिला हॉकी में इस बार नौ खिलाड़ी हरियाणा से थीं। महज एक खिलाड़ी गुरजीत कौर पंजाब से थीं। आज भारतीय हॉकी टीम में हरियाणा, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का दबदबा है। 

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1974 के विश्वकप में और 1980 के मास्को ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने चौथा स्थान हासिल किया था। मास्को ओलंपिक खेलने गए खिलाड़ियों में हरप्रीत कौर गिल, निशा, रूपा सैनी, शरणजीत कौर के अलावा अजिंद्र कौर, सतिंद्र वालिया, निर्मला कुमारी, प्रेमा सैनी, पुष्पिंद्र कौर और उसके बाद गोल्डन गर्ल राजबीर कौर, सरोज बाला, मनजिंद्र कौर, अमनदीप कौर, रेनु बाला, अमनदीप कौर जैसी कई अन्य ऐसी पंजाब की खिलाड़ी थीं जिनकी छड़ी जादू की तरह चलती थी और उनका सामना करना आसान नहीं होता था।
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राज्य सरकार ने कभी पंजाब में हॉकी और अन्य महिला खेलों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। नतीजन पंजाब की महिला खिलाड़ियों को नौकरियां हासिल करने के लिए मजबूरन दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ा। हरियाणा खेल के क्षेत्र में पंजाब से कहीं आगे निकल चुका है। उसका एक बड़ा कारण यह है कि शाहाबाद-मारकंडा और सोनीपत हॉकी सेंटर लड़कियों की हॉकी की तरक्की में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहा है।
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                   टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम से खेलने वाली हरियाणा की महिला खिलाड़ी।

पंजाब की खेल नीति में लड़कियों के साथ हर तरह का पक्षपात होता है। लड़कियों के लिए कोई नौकरी सूबा सरकार की तरफ से नहीं है। इसलिए लड़कियों की हॉकी से बेरुखी होती जा रही है। गोल्डन गर्ल हॉकी की पूर्व कप्तान राजबीर कौर का कहना है कि जरूरत है लड़कियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में एस्ट्रोटर्फ मैदानों का निर्माण किया जाए और बड़े स्तर पर हॉकी कोचों की नियुक्ति की जाए। 


हॉकी सेंटरों को स्थायी ग्रांट तथा लड़कियों के हॉकी विंग भी अलॉट किए जाएं। इतना सब कुछ यदि पंजाब की हॉकी को मिल जाए तो यकीनन पंजाब की लड़कियां 2024 के पेरिस ओलंपिक और 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में अपने हॉकी के हुनर का रंग बिखेर कर पंजाब का नाम दुनिया में रोशन कर सकती हैं। 

हरियाणा की इन नौ खिलाड़ियों को मिली थी जगह
भारतीय महिला हॉकी टीम में इस बार हरियाणा की नौ बेटियों को जगह मिली थी। इन सभी ने टोक्यो ओलंपिक में अपना दम खम दिखाया। हरियाणा की मोनिका मलिक, नेहा गोयल, निशा, रानी रामपाल, नवजोत कौर, नवनीत कौर, शर्मिला, उदिता, सविता पूनिया का चयन हुआ था।

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