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दिलचस्प हुए पंजाब चुनाव: अपने हलकों में फंसे सभी पार्टियों के प्रधान, सिद्धू को मजीठिया ने तो भगवंत मान का गोल्डी ने घेरा 

Tue, 08 Feb 2022 11:42 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 08 Feb 2022 11:42 AM IST
सार

आप के प्रदेश प्रधान और सीएम का चेहरा भगवंत मान को उनके विधानसभा हलका धूरी में कांग्रेस के प्रत्याशी गोल्डी ने घेर रखा है। अमृतसर पूर्वी सीट पर प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू और शिरोमणि अकाली दल के नेता विक्रम सिंह मजीठिया के बीच मुकाबला दिखाई दे रहा है।

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Presidents of all parties are surrounded in their own assembly seats in Punjab Assembly Election 
भगवंत मान, जसवीर गढ़ी, अश्वनी शर्मा और नवजोत सिद्धू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में चुनाव नजदीक आते ही समीकरण बदलते जा रहे हैं और लड़ाई दिलचस्प होती जा रही है। पंजाब के चुनावी रण में तमाम पार्टियों के अध्यक्ष अपने विधानसभा हलकों में बुरी तरह से घिर गए हैं। प्रचार के लिए वह अपना विधानसभा क्षेत्र छोड़ने से कतराने लगे हैं। जिसका सीधा असर चुनावों पर हो रहा है।

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आप के मान को गोल्डी ने घेरा

आप के प्रदेश प्रधान और सीएम का चेहरा भगवंत मान को उनके विधानसभा हलका धूरी में कांग्रेस के प्रत्याशी गोल्डी ने घेर रखा है। भगवंत मान का मुकाबला कांग्रेस पार्टी के मौजूदा विधायक दलवीर सिंह गोल्डी से है। वहीं शिरोमणि अकाली दल ने यहां प्रकाश चंद गर्ग को सियासी रण में उतारा है। वर्ष 2017 में कांग्रेस पार्टी के दलवीर सिंह गोल्डी ने आप के जसवीर सिंह जस्सी को 2811 वोटों से चुनावों में हराया था। उस समय मालवा में आप की लहर चल रही थी। वर्ष 2012 में कांग्रेस प्रत्याशी ने अकाली दल को 12,473 वोटों से चुनाव में मात थी। संगरूर संसदीय सीट से भगवंत मान आप के टिकट पर दो बार सांसद चुने जा चुके हैं। धुरी विधानसभा क्षेत्र इस जिले में आती है। धुरी विधानसभा सीट में 74 गांव आते हैं। गोल्डी व उसकी पत्नी सिमरत कौर खंगूड़ा ने गली गली ताकत झोंक रखी है। गोल्डी नंगे पांव प्रचार कर रहे हैं। भगवंत मान गोल्डी और उसकी पत्नी सिमरत कौर खंगूड़ा को काटने के लिए विधानसभा हलका में व्यस्त हो गए हैं। पंजाब के बाकी विधानसभा हलकों में प्रचार के लिए उनसे निकलना मुश्किल हो रहा है।

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बसपा प्रदेश प्रधान गढ़ी को घेरा सांपला और जोगिंदर मान ने

बसपा प्रदेश प्रधान जसवीर सिंह गढ़ी फगवाड़ा से खुद चुनाव मैदान में हैं। बसपा और अकाली दल का गठबंधन है। वहीं उनका मुकाबला पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला से हैं। जो भाजपा के कद्दावर नेता हैं। दूसरी तरफ कांग्रेस छोड़कर आप में जाने वाले जोगिंदर सिंह मान मैदान में हैं, जो पूर्व मंत्री रह चुके हैं। गढ़ी के लिए फगवाड़ा से निकलना काफी मुश्किल हो रहा है। वह पंजाब में प्रचार के लिए निकलने के स्थान पर फगवाड़ा सीट बचाने में लगे हैं।

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भाजपा प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा भी पठानकोट में उलझे

पंजाब विधानसभा चुनाव में इस बार यहां से भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर पंजाब भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस की टिकट पर अमित विज चुनाव लड़ रहे हैं। इसके साथ शिअद-बसपा गठबंधन की तरफ से ज्योति भीम बहुजन समाज पार्टी से चुनावी मैदान में हैं। आम आदमी पार्टी ने यहां से विभूति शर्मा को उम्मीदवार घोषित किया है। अश्वनी शर्मा के लिए यह सीट जीतना एक बड़ी चुनौती है। पठानकोट के सियासी इतिहास की बात की जाए तो यह भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर भाजपा कब्जा नहीं जमा पाई थी। वर्ष 2010 से 2017 तक इस विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा है।

वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर मास्टर मोहन लाल ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक शर्मा को 8 हजार 535 वोटों से हराया था। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने यहां कब्जा जमाया था। भाजपा की टिकट पर अश्वनी शर्मा ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार रमन भल्ला को 17 हजार 856 वोटों से हराया था। 2017 में कांग्रेस के अमित विज इस सीट पर विजयी रहे। पठानकोट में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अश्वनी शर्मा, सात बार पार्षद रहे विभूति शर्मा, अमित विज और अकाली दल के प्रत्याशी के बीच मुकाबला है। मुकाबला पूरी तरह फंसा हुआ है और प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा पूरे पंजाब के स्थान पर अपने विधानसभा क्षेत्र में फंस गए हैं। उनको अमित विज से कड़ी टक्कर मिल रही है।

कांग्रेस प्रधान सिद्धू फंस गए अमृतसर पूर्वी से

अमृतसर पूर्वी सीट पर प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू और शिरोमणि अकाली दल के नेता विक्रम सिंह मजीठिया के बीच मुकाबला दिखाई दे रहा है। अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बहनोई और पूर्व मंत्री मजीठिया को पूर्व क्रिकेटर सिद्धू के खिलाफ मैदान में उतारने के बाद इस सीट पर चुनावी जंग दिलचस्प हो गई है। सिद्धू को उसको घर में घेरने का सुखबीर बादल का यह मास्टर प्लान है। सिद्धू और मजीठिया दोनों के लिए यह लड़ाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो पहली बार किसी चुनावी लड़ाई में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। दोनों नेताओं के बीच वाकयुद्ध पहले ही तेज हो गया है और निजी हमले तीखे होने लगे हैं।

सिद्धू पीपीसीसी के प्रधान हैं और उनके कंधों पर 117 सीटों पर प्रचार करने की है लेकिन वह अपने घर में ही माझा के जरनैल माने जाते बिक्रमजीत सिंह मजीठिया से घिर गए हैं। सिद्धू की हार उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है और अगर मजीठिया हारते हैं तो उनका भी राजनीति में कद घटेगा। ऐसे में दोनों नेताओं के लिए जीत काफी मायने रखेगी। अमृतसर पूर्व निर्वाचन क्षेत्र, जो काफी हद तक एक शहरी सीट है, परिसीमन के बाद 2012 में अस्तित्व में आया था। सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू 2012 में भाजपा के टिकट पर विधायक बनीं। 2017 में सिद्धू इस सीट से 42,809 मतों की लीड लेकर जीते थे।

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