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फर्जी दस्तावेज पेश करने पर पावरकॉम को 10 हजार जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा
Updated Thu, 02 Jun 2016 07:40 PM IST
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अदालत
- फोटो : demo
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स्थानीय लोक अदालत ने पावरकॉम को केस की सुनवाई के दौरान फर्जी दस्तावेज पेश करने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने का आदेश दिया है। उपभोक्ता को भेजा 42 हजार का गलत बिल भी रद्द करते हुए पावरकॉम अधिकारियों को यह रकम एक माह में पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं अथॉरिटी के पास जमा करवाने की हिदायत की गई है।
गांव डगरू निवासी बलजिंदर सिंह ने वकील रविंदरपाल सिंह रतिया के जरिये पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ स्थानीय लोक अदालत में अर्जी दायर की थी। इसमें पावरकॉम सब डिवीजन, डगरू ने उसे 42 हजार 744 रुपये का गलत बिल भेजा है। पीड़ित का आरोप था कि पावरकॉम अधिकारियों ने किसी जगह से उतारा बिजली मीटर उसके घर लगाया था, तो उस पर 7411 यूनिटों की खपत हुई थी। इन यूनिटों का बिल भी पावरकॉम अधिकारियों ने पीड़ित उपभोक्ता बलजिंदर सिंह को भेज दिया था।
पावरकॉम ने स्थानीय लोक अदालत में पेश किए दस्तावेजों के जरिये पक्ष रखा था कि उपभोक्ता का मीटर की खपत 7411 नहीं, बल्कि सिर्फ 1 रीडिंग की खपत थी। उपभोक्ता को 7410 यूनिटों का सही बिल भेजा गया है। इसके बाद पीड़ित पक्ष के वकील रविंदरपाल सिंह रतिया ने पावरकॉम की दलील एवं पेश किए दस्तावेजों को झूठा करार देते पावरकॉम से मीटर बदली आदेश (एमसीओ) और सर्विस कनेक्शन आदेश (एससीओ) असली रूप में स्थायी लोक अदालत सामने पेश करने की मांग की।
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लोक अदालत के आदेश पर पावरकॉम की तरफ से पेश किये एससीओ को पढ़ने से पाया गया कि उपभोक्ता के घर 7411 यूनिट चला खराब मीटर लगाया गया था। इस तरह पहले पेश किए एससीओ में अंत्र एवं और अदालत को गुमराह करने पर स्थानीय लोक अदालत के सदस्य सुखदेव सिंह बराड़ और इंजीनियर बख्शीश सिंह ने तथ्यों को पढ़ने एवं उपभोक्ता के वकील रविंदरपाल सिंह रत्तिया की दलीलों से सहमत होते पीड़ित उपभोक्ता को पावरकॉम द्वारा भेजे 42 हजार 744 रुपये का गलत बिल रद्द करने के आदेश दिए। साथ ही अदालत में फर्जी दस्तावेज पेश करने पर पावरकॉम को 10 हजार रुपये जुर्माना एक माह में पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं अथॉरिटी के पास जमा करवाने का आदेश दिया है।
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गांव डगरू निवासी बलजिंदर सिंह ने वकील रविंदरपाल सिंह रतिया के जरिये पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ स्थानीय लोक अदालत में अर्जी दायर की थी। इसमें पावरकॉम सब डिवीजन, डगरू ने उसे 42 हजार 744 रुपये का गलत बिल भेजा है। पीड़ित का आरोप था कि पावरकॉम अधिकारियों ने किसी जगह से उतारा बिजली मीटर उसके घर लगाया था, तो उस पर 7411 यूनिटों की खपत हुई थी। इन यूनिटों का बिल भी पावरकॉम अधिकारियों ने पीड़ित उपभोक्ता बलजिंदर सिंह को भेज दिया था।
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पावरकॉम ने स्थानीय लोक अदालत में पेश किए दस्तावेजों के जरिये पक्ष रखा था कि उपभोक्ता का मीटर की खपत 7411 नहीं, बल्कि सिर्फ 1 रीडिंग की खपत थी। उपभोक्ता को 7410 यूनिटों का सही बिल भेजा गया है। इसके बाद पीड़ित पक्ष के वकील रविंदरपाल सिंह रतिया ने पावरकॉम की दलील एवं पेश किए दस्तावेजों को झूठा करार देते पावरकॉम से मीटर बदली आदेश (एमसीओ) और सर्विस कनेक्शन आदेश (एससीओ) असली रूप में स्थायी लोक अदालत सामने पेश करने की मांग की।
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लोक अदालत के आदेश पर पावरकॉम की तरफ से पेश किये एससीओ को पढ़ने से पाया गया कि उपभोक्ता के घर 7411 यूनिट चला खराब मीटर लगाया गया था। इस तरह पहले पेश किए एससीओ में अंत्र एवं और अदालत को गुमराह करने पर स्थानीय लोक अदालत के सदस्य सुखदेव सिंह बराड़ और इंजीनियर बख्शीश सिंह ने तथ्यों को पढ़ने एवं उपभोक्ता के वकील रविंदरपाल सिंह रत्तिया की दलीलों से सहमत होते पीड़ित उपभोक्ता को पावरकॉम द्वारा भेजे 42 हजार 744 रुपये का गलत बिल रद्द करने के आदेश दिए। साथ ही अदालत में फर्जी दस्तावेज पेश करने पर पावरकॉम को 10 हजार रुपये जुर्माना एक माह में पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं अथॉरिटी के पास जमा करवाने का आदेश दिया है।