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Jalandhar News: 20 माह बाद वतन वापिस गए दोनों पाकिस्तानी किशोर
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदकोट। करीब 20 माह पहले गलती से भारतीय सीमा में आए दो पाकिस्तानी किशोरों को आखिर शुक्रवार वतन वापिस भेज दिया गया। हालांकि उनकी रिहाई के आदेश 28 मार्च को ही आ गए थे और उस दिन वह बाघा बार्डर पहुंच भी गए थे, लेकिन पाकिस्तान सरकार से ट्रेवलिंग ऑर्डर न मिलने के कारण उनकी रिहाई रुक गई थी। शुक्रवार को कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें वतन भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार 31 अगस्त 2022 को गलती से पाकिस्तान के लाहौर निवासी दो बच्चे अब्बास व हसन अली गलती से भारतीय सीमा में आ गए थे, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था और उसके पश्चात अप्रैल 2023 में दोनों बच्चों को अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था। उसके बाद से ही वे रिहा होने की प्रतीक्षा में थे। इस दौरान कुछ माह पूर्व जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज एनएस शेखावत द्वारा फरीदकोट के बाल सुधार गृह का दौरा किया गया था तो उक्त बच्चों ने रिहाई की गुहार लगाई थी। जिसके पश्चात इस संबंधी कार्यवाही पूरी कर गत 28 मार्च को उन्हें पाकिस्तान भेजने के लिए अटारी बार्डर भेजा गया था, लेकिन पाकिस्तान से संबंधित कागजात न आने के चलते उनकी रिहाई रुक गई थी। इसके बाद अब जब कागजात पहुंचे तो उक्त किशाेरों को बाघा बाॅर्डर के रास्ते उनके वतन भेजा गया।
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फरीदकोट। करीब 20 माह पहले गलती से भारतीय सीमा में आए दो पाकिस्तानी किशोरों को आखिर शुक्रवार वतन वापिस भेज दिया गया। हालांकि उनकी रिहाई के आदेश 28 मार्च को ही आ गए थे और उस दिन वह बाघा बार्डर पहुंच भी गए थे, लेकिन पाकिस्तान सरकार से ट्रेवलिंग ऑर्डर न मिलने के कारण उनकी रिहाई रुक गई थी। शुक्रवार को कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें वतन भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार 31 अगस्त 2022 को गलती से पाकिस्तान के लाहौर निवासी दो बच्चे अब्बास व हसन अली गलती से भारतीय सीमा में आ गए थे, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार किया गया था और उसके पश्चात अप्रैल 2023 में दोनों बच्चों को अदालत द्वारा बरी कर दिया गया था। उसके बाद से ही वे रिहा होने की प्रतीक्षा में थे। इस दौरान कुछ माह पूर्व जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज एनएस शेखावत द्वारा फरीदकोट के बाल सुधार गृह का दौरा किया गया था तो उक्त बच्चों ने रिहाई की गुहार लगाई थी। जिसके पश्चात इस संबंधी कार्यवाही पूरी कर गत 28 मार्च को उन्हें पाकिस्तान भेजने के लिए अटारी बार्डर भेजा गया था, लेकिन पाकिस्तान से संबंधित कागजात न आने के चलते उनकी रिहाई रुक गई थी। इसके बाद अब जब कागजात पहुंचे तो उक्त किशाेरों को बाघा बाॅर्डर के रास्ते उनके वतन भेजा गया।
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