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आधी आबादी की मांग: पंजाब में निकाय और नगर काउंसिल चुनाव में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण, विधानसभा में शून्य

Sun, 19 Dec 2021 02:56 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 19 Dec 2021 02:56 PM IST
सार

2018 में तत्कालीन कैप्टन सरकार ने महिलाओं के लिए बड़ा कदम उठाते हुए विधेयक पारित किया। जिसमें संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया था।

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No Reservation for Women in Punjab Vidhansabha
पंजाब विधानसभा चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब के निकाय व नगर काउंसिल चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया है लेकिन विधानसभा में आरक्षण शून्य है। नतीजन, पंजाब में विधानसभा में महिलाओं की संख्या नाममात्र ही रहती है। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में 81 महिला उम्मीदवार मैदान में थी, जिसमें ज्यादातर आजाद के तौर पर खड़ी थी लेकिन  सिर्फ छह महिलाएं ही चुनाव जीतकर विधानसभा में अपनी सीट पक्की कर पाईं। यह संख्या 117 सदस्यों वाली विधानसभा का कुल पांच फीसदी है।

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चुनाव जीतने वाली महिलाओं में आप की रुपिंदर कौर, प्रोफेसर बलजिंदर कौर और सर्वजीत कौर हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से अरुणा चौधरी, सत्कार कौर और रजिया सुल्तान विधानसभा में पहुंची। अकाली दल व भाजपा की एक भी महिला विधायक नहीं बन पाई। 2012 के विधानसभा चुनाव में 93 महिलाओं ने चुनाव में हिस्सा लिया था, जिनमें से 14 महिलाओं को जीत हासिल हुई थी। 

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2018 में कैप्टन ने 39 फीसदी महिला आरक्षण का प्रस्ताव विधानसभा में किया था पास 

2018 में तत्कालीन कैप्टन सरकार ने महिलाओं के लिए बड़ा कदम उठाते हुए विधेयक पारित किया। जिसमें संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया था। पंजाब सरकार शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों में पहले ही महिलाओं के लिए 50 फीसद सीटें आरक्षित कर चुकी है। लेकिन लोकसभा व राज्यसभा में बिल पास नहीं हुए। यह बिल अगर लागू होता है तो पंजाब में 39 महिलाएं विधायक होती।

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महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जरूरी, जब वोट बराबर तो हिस्सा भी बराबर हो...

तीसरी बार पार्षद बनीं कांग्रेस की नेता अरुणा अरोड़ा का कहना है कि पंजाब में तो सभी दलों को आपसी सहमति कर महिलाओं को आगे लाना चाहिए। अगर निकाय चुनाव में 50 फीसदी महिलाओं का कोटा है तो विधानसभा में क्यों नहीं। जितने मत पुरुषों के पड़ते हैं उतने ही महिलाओं के। हम जनसंख्या में बराबर है, हमारे अधिकार संविधान के मुताबिक बराबर हैं, हम निकाय चुनावों में बराबर हैं तो विधानसभा में क्यों नहीं। आज देश महिला सशक्तीकरण का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है फिर महिलाओं को विधानसभा से वंचित नहीं रखना चाहिए। कम से कम 50 फीसदी पर हमारा हक बनता है। यह भी गारंटी है कि महिलाओं के पास बराबर गिनती होने से बदलाव की बयार भी देखने को मिलेगी।

हमारी तो मांग है, पार्टी स्तर पर लिखा भी है बात उठाई भी है...

प्रदेश भाजपा महिला की प्रधान मोना जयसवाल का कहना है कि यह हमारी पहली मांग है, जिसको लेकर पार्टी प्लेटफार्म पर उठाया भी है। हमने हाईकमान को लिखा भी है कि महिलाओं को अधिक से अधिक टिकट दिया जाए, एक कोटा जरूर रखा जाए। उम्मीद है कि पार्टी हमारी बात सुनेगी और महिलाओं को अधिक से अधिक टिकट दिया जाएगा। हमें आश्वासन भी मिला है कि चिंता न करो, महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाएगा। यह बात चिंतनीय व विचार योग्य है कि पंजाब में छह महिला ही पिछली बार चुनाव जीती थीं। 

पंजाब में महिला सीएम बन चुकी है... 

पंजाब की राजिंदर कौर भट्ठल सूबे की सीएम रह चुकी हैं। इसके अलावा पंजाब से सुखबंस कौर भिंडर केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं जबकि संतोष चौधरी केंद्रीय राज्यमंत्री। अंबिका सोनी व हरसिमरत कौर बादल भी केंद्र में मंत्री रह चुकी हैं। सुखबंस कौर भिंडर जब केंद्रीय मंत्री थी तो उनके नाम का डंका विदेशों में भी बजता था और अंतराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल की थी।

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