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बहिबल गोलीकांड के पीड़ित परिवारों के धरने में दर्द सुनने पहुंचे नवजोत सिंह सिद्धू, इंसाफ के लिए सहयोग का दिया आश्वासन
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पीड़ित परिवारों से बातचीत करते नवजोत सिद्धू।
- फोटो : FARIDKOT
फरीदकोट। वर्ष 2015 के बहिबल कलां गोलीकांड की घटना में मरने वाले दो सिख नौजवान भाई किशन भगवान सिंह व गुरजीत सिंह सरावां के परिवारों की तरफ से इंसाफ न मिलने के रोष में गोलीकांड वाले स्थल पर दिन रात का रोष धरना दिया जा रहा है। सोमवार को धरने के पांचवें दिन पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू भी पहुंचे और पीड़ित परिवारों का दर्द बांटने का प्रयास किया। इस दौरान परिवारों ने राज्य की कांग्रेस सरकार समेत उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम लेकर खूब खरी खोटी सुनाई। सिद्धू ने परिवारों को इंसाफ के लिए हर तरह के सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
इस मौके पर नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि बेअदबी और गोलीकांड का मसला किसी एक पार्टी का मसला नहीं है। यह मसला धर्म से जुड़ा है और वह परिवारों के इस संघर्ष का समर्थन करने पहुंचे है। अमृतसर के श्री दरबार साहिब में घटना का जिक्र करते हुए सिद्धू ने कहा कि अदालत के फैसले सुबुत व तथ्यों के आधार पर होते है पर लोगों की अदालत होती है जो खुद फैसले करती है। लोगों की अदालत ने ही दो दो मुख्यमंत्री गद्दी से उतार दिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों के इंसाफ व कोटकपूरा गोलीकांड के पीड़ित अजीत सिंह को नौकरी दिलाने के लिए पार्टी प्रधान के नाते पैरवी करने का भरोसा दिया।
इस मौके पर पीड़ित परिवारों ने रोष जताया कि उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बरगाड़ी मोर्चे के समय संगत को भरोसा दिया था कि पावर मिलते ही वह इंसाफ दिलाएगें लेकिन तीन महीनों में वह कुछ नहीं कर पाए। इस मौके पर भाई किशन भगवान सिंह के बेटे सुखराज सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने इंसाफ देना होता था तो उन्हें धरने पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्हें सरकार से इंसाफ से कोई भरोसा नहीं है और इसी लिए उन्होंने लोगों को साथ लेकर इंसाफ के लिए संघर्ष तेज करने का फैसला किया है। सुखराज सिंह ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू , भले ही एक आम आदमी की तरह धरने में आए थे लेकिन उन्होंने उनसे सवाल सरकार वाले ही किए है क्योंकि वह सरकार का हिस्सा है।
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इस मौके पर नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि बेअदबी और गोलीकांड का मसला किसी एक पार्टी का मसला नहीं है। यह मसला धर्म से जुड़ा है और वह परिवारों के इस संघर्ष का समर्थन करने पहुंचे है। अमृतसर के श्री दरबार साहिब में घटना का जिक्र करते हुए सिद्धू ने कहा कि अदालत के फैसले सुबुत व तथ्यों के आधार पर होते है पर लोगों की अदालत होती है जो खुद फैसले करती है। लोगों की अदालत ने ही दो दो मुख्यमंत्री गद्दी से उतार दिए। उन्होंने पीड़ित परिवारों के इंसाफ व कोटकपूरा गोलीकांड के पीड़ित अजीत सिंह को नौकरी दिलाने के लिए पार्टी प्रधान के नाते पैरवी करने का भरोसा दिया।
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इस मौके पर पीड़ित परिवारों ने रोष जताया कि उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बरगाड़ी मोर्चे के समय संगत को भरोसा दिया था कि पावर मिलते ही वह इंसाफ दिलाएगें लेकिन तीन महीनों में वह कुछ नहीं कर पाए। इस मौके पर भाई किशन भगवान सिंह के बेटे सुखराज सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने इंसाफ देना होता था तो उन्हें धरने पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्हें सरकार से इंसाफ से कोई भरोसा नहीं है और इसी लिए उन्होंने लोगों को साथ लेकर इंसाफ के लिए संघर्ष तेज करने का फैसला किया है। सुखराज सिंह ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू , भले ही एक आम आदमी की तरह धरने में आए थे लेकिन उन्होंने उनसे सवाल सरकार वाले ही किए है क्योंकि वह सरकार का हिस्सा है।
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