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सीएम के नाम कालिया को सौंपा ज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Mon, 04 Jan 2016 09:52 PM IST
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पंजाब सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सैस, काऊ सैस और वाटर एंड सीवरेज सैस को बिजली बिलों में शामिल कर उद्योग क्षेत्र पर थोपे जाने का काम किया है।
जालंधर चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कामर्स ने इस पर रोष दर्ज किया है। इस बारे में उद्योग जगत की शिकायतों को नामांकित करने वाला एक ज्ञापन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नाम से संगठन ने सोमवार को जालंधर सेंट्रल क्षेत्र से विधायक एवं पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया को सौंपा।
इस ज्ञापन में कहा गया है कि इन सभी सैस से उद्योग क्षेत्र को मुक्त किया जाए। उद्योगपति ये महसूस करते हैं कि अन्य क्षेत्रों और वर्गों को दिए जाने वाले अनुदान का समूचा भार पंजाब सरकार उद्योग क्षेत्र पर डाल रही है।
उद्योगपतियों का कहना है कि यह टैक्स की दोहरी मार है। पंजाब का उद्योग इस समय यह भार उठाने की स्थिति में नहीं है। उद्योगपतियों ने कहा कि यह समस्या उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के सामने 26 अक्तूबर 2015 को भी चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में उठाई गई थी।
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उन्होंने इससे उद्योग को राहत देने का वादा किया था। वाटर एंड सीवरेज के दो प्रतिशत सैस को बिजली बिलों में शामिल किए जाने को उद्योगपतियों ने अव्यवहारिक बताया है।
कारोबारियों का कहना है कि ऐसे कुछ औद्योगिक यूनिट हैं, जिनकी बिजली खपत कुछ लाख रुपये और एक करोड़ रुपये से अधिक प्रति महीना की है। ऐसे में यह व्यवहारिक नहीं है कि यह सैस लगाया जाए।
ज्ञापन में यह मांग भी की गई है कि सरकार धोगड़ी इंडस्ट्रियल जोन में इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाए। सड़क निर्माण के साथ पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट का प्रबंध किया जाए, ताकि यहां लोग अपने यूनिट लगा सके।
ज्ञापन में अपील की गई है कि उद्योगपतियों के इस आग्रह को बिना किसी बदलाव के उपरोक्त विषयों में छूट दे दी जाए।
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जालंधर चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कामर्स ने इस पर रोष दर्ज किया है। इस बारे में उद्योग जगत की शिकायतों को नामांकित करने वाला एक ज्ञापन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नाम से संगठन ने सोमवार को जालंधर सेंट्रल क्षेत्र से विधायक एवं पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया को सौंपा।
इस ज्ञापन में कहा गया है कि इन सभी सैस से उद्योग क्षेत्र को मुक्त किया जाए। उद्योगपति ये महसूस करते हैं कि अन्य क्षेत्रों और वर्गों को दिए जाने वाले अनुदान का समूचा भार पंजाब सरकार उद्योग क्षेत्र पर डाल रही है।
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उद्योगपतियों का कहना है कि यह टैक्स की दोहरी मार है। पंजाब का उद्योग इस समय यह भार उठाने की स्थिति में नहीं है। उद्योगपतियों ने कहा कि यह समस्या उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल के सामने 26 अक्तूबर 2015 को भी चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में उठाई गई थी।
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उन्होंने इससे उद्योग को राहत देने का वादा किया था। वाटर एंड सीवरेज के दो प्रतिशत सैस को बिजली बिलों में शामिल किए जाने को उद्योगपतियों ने अव्यवहारिक बताया है।
कारोबारियों का कहना है कि ऐसे कुछ औद्योगिक यूनिट हैं, जिनकी बिजली खपत कुछ लाख रुपये और एक करोड़ रुपये से अधिक प्रति महीना की है। ऐसे में यह व्यवहारिक नहीं है कि यह सैस लगाया जाए।
ज्ञापन में यह मांग भी की गई है कि सरकार धोगड़ी इंडस्ट्रियल जोन में इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाए। सड़क निर्माण के साथ पानी, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट का प्रबंध किया जाए, ताकि यहां लोग अपने यूनिट लगा सके।
ज्ञापन में अपील की गई है कि उद्योगपतियों के इस आग्रह को बिना किसी बदलाव के उपरोक्त विषयों में छूट दे दी जाए।