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Ludhiana Gas Leak: पंजाब के सीवरेज में डाला जा रहा मौत का सामान, पीने वाला पानी भी हो रहा जहरीला

Mon, 01 May 2023 05:10 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 01 May 2023 05:10 PM IST
सार

लुधियाना में तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की लाचारी व बेबसी की जीती जागती तस्वीर बुड्ढा नाला है, जिसमें फैक्टरियों का जहरीला पानी सीवरेज की पाइपों से गिराया जा रहा है। नाला शहरभर में 60 किलोमीटर की यात्रा भी करता और नाला वलिपुर में सतलुज नदी में मिल जाता है।

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Ludhiana gas Leak Case negligence of Punjab pollution control board
दुकान के बाहर मृत पड़े लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

कुछ दिन पहले पंजाब के डेराबस्सी में फेडरल मीट प्लांट में ग्रीस टैंक की सफाई के दौरान चार मजदूरों की मौत के बाद दर्द भरी चीखों की आवाज धीमी भी नहीं हुई थी कि लुधियाना की घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया। दोनों घटनाओं में एक बात साफ है कि पंजाब में धरती के भीतर बने सीवरेज में जहरीली गैस घूम रही है। सीवरेज लीकेज न केवल जानलेवा हो रही है बल्कि पंजाब के पीने वाले पानी को भी जहरीला कर रही है।

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डेराबस्सी में मीट प्लांट में चर्बी के टैंक की सफाई करने उतरे चार कर्मचारियों की जहरीली गैस के चलते मौत हो गई थी। मोहाली जिले के गांव बेहड़ा स्थित फेडरल एग्रो इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड के मीट प्लांट में यह हादसा शुक्रवार को हुआ। घटना उस वक्त हुई जब चारों मजदूर एक के बाद एक ग्रीस टैंक में घुस गए। टंकी की सफाई के दौरान उन्होंने जहरीला धुंआ अंदर खींच लिया। दम घुटने की वजह से इन चारों की मौत हो गई। पिछले साल भी नवांशहर में बलाचौर में गांव खमाचों का रहने वाला पुरुषोतम लाल (40) व शुभम भी सीवर की गैस की वजह से मौत का ग्रास बन गए थे। दरअसल, पंजाब में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड लाचार व बेबस है। यही वजह है कि पंजाब की इंडस्ट्री डाइंग, शराब व चमड़े की खुलेआम पानी को ट्रीट किए बिना सीवरेज में डाल रहे हैं।
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हाल ही में किसानों ने 177 दिन आंदोलन चलाकर जीरा शराब फैक्टरी पर ताला लगवाया, जिसके कारण आसपास के गांवों में पानी पीने लायक नहीं बच रहा था। 2018 में भी शराब की फैक्टरी की तरफ से हजारों लीटर शीरा ब्यास दरिया में बहा दिया गया था, जिससे मछलियां मर गई थी।
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लुधियाना में तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की लाचारी व बेबसी की जीती जागती तस्वीर बुड्ढा नाला है, जिसमें फैक्टरियों का जहरीला पानी सीवरेज की पाइपों से गिराया जा रहा है। नाला शहरभर में 60 किलोमीटर की यात्रा भी करता और नाला वलिपुर में सतलुज नदी में मिल जाता है। 1963 में बुड्ढा नाला में मछली की 54 किस्में पाई जाती थी लेकिन गंदगी के चलते 1984 तक सब विलुप्त हो गईं। 


नाले से औसत 750 मेगा लीटर पानी बहता है, जिसमें 83 फीसदी सीवरेज का जबकि 14 फैक्ट्रियों का अपशिष्ट और एक फीसदी अन्य गंदगी मिलती है। लुधियाना शहर में 1100 इलेक्ट्रो प्लेटिंग और 250 के करीब डाइंग फैक्ट्रियां हैं, जिनका सीधा अपशिष्ट सीवरेज में गिराया जा रहा है, जो आगे जाकर बुड्डा नाला में गिरता है। इन फैक्टरियों को रोकने के लिए पीपीसीबी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाएं हैं, जिसका नतीजा यह है कि सीवरेज में केमिकल व अन्य वेस्ट मिलने से जहरीली गैस व पानी बन रहा है।

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