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मुक्तसर की मंडियों में गेहूं की आमद शुरू
जगदीश जोशी/अमर उजाला, मुक्तसर
Updated Thu, 14 Apr 2016 09:52 PM IST
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मुक्तसर की अनाजमंडी में चारपाई की छांव में बैठ खाना खाता किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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वैसाखी आते ही मंडियों में गेहूं की आमद शुरू हो गई है। किसान मंडियों में गेहूं लेकर पहुंचने लगे हैं, मगर सरकारी खरीद शुरू न होने से किसानों को फसल बिकने का इंतजार करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पैतृक जिला मुक्तसर की मुख्य अनाज मंडी में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। ऊपर से लावारिस पशु किसानों के लिए सिरदर्दी बने हुए हैं।
कोटली के सरपंच अमरजीत सिंह और बरीवाला से मुकंद सिंह ने बताया कि वे एक दिन पहले गेहूं की फसल लेकर मंडी में आए हैं। वहीं अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है और इसके शुरू होने के बारे में वे कुछ कह नहीं सकते। इसलिए कुछ दिन मंडी में फसल की रखवाली के लिए बैठे रहना पड़ेगा। इस तरह गांव उदेकरण के महिंदर सिंह भी मंडी में तीन दिन से फसल लेकर बैठे हैं।
उन्होंने बताया कि वे पांच बड़े ट्राले भरकर फसल लेकर आए हैं। अब खरीद शुरू होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि गर्मी में दिन काटना बड़ा मुश्किल है। किसी तरह चारपाई खड़ी कर उसकी छांव में बैठे समय काट रहे हैं। किसान गर्मी में झुलस रहे हैं, जबकि शेडों के नीचे ट्रक चालकों का कब्जा है। लगभग आधी स्ट्रीट लाइटें भी खराब हैं।
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इस वजह से कुछ हिस्सों में अंधेरा पसरा रहता है। गांव झंडूवाला के किसान अजायब सिंह ने बताया कि वह बुधवार को ही फसल लेकर आए हैं। मंडी में जहां गर्मी में खुले में बैठना एक समस्या है, वहीं पीने के पानी का प्रबंध न होना भी बड़ी मुश्किल है। मंडी में लगे वाटर-वर्कर्स के नल खराब हैं। उन्हें मंडी में स्थित दुकानों से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ती है। सफाई का भी बुरा हाल है। मंडी में करीब 18 शेड बने हैं, मगर सीजन के दौरान यह भी बहुत कम पड़ जाते हैं।
कहावत है ‘ओ जट्टा आई वैसाखी, मुक्क गई फसला दी राखी...’ अर्थात वैसाखी के साथ फसल पककर तैयार होकर मंडियों में पहुंच जाती है। किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों में लावारिस पशुओं से फसलों की रखवाली नहीं करनी पड़ती। मगर यह कहावत अभी भी किसानों पर सही नहीं लागू हो रही। किसान महिंदर सिंह ने बताया कि मंडी में लावारिस पशु घूमते फिर रहे हैं। इस वजह से अब उन्हें मंडी में भी पशुओं से फसल बचानी पड़ रही है। इसके लिए प्रशासन एवं मंडी अफसरों को कड़े कदम उठाने चाहिए।
सरकारी खरीद एक-दो दिन में शुरू हो जाएगी। अभी किसानों की फसल गीली है। पीने के पानी की समस्या के हल के लिए घड़े रखवाए जा रहे हैं। किसानों को कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
- गुरचरण सिंह, सचिव मार्केट कमेटी मुक्तसर
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कोटली के सरपंच अमरजीत सिंह और बरीवाला से मुकंद सिंह ने बताया कि वे एक दिन पहले गेहूं की फसल लेकर मंडी में आए हैं। वहीं अभी तक सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है और इसके शुरू होने के बारे में वे कुछ कह नहीं सकते। इसलिए कुछ दिन मंडी में फसल की रखवाली के लिए बैठे रहना पड़ेगा। इस तरह गांव उदेकरण के महिंदर सिंह भी मंडी में तीन दिन से फसल लेकर बैठे हैं।
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उन्होंने बताया कि वे पांच बड़े ट्राले भरकर फसल लेकर आए हैं। अब खरीद शुरू होने का इंतजार है। उन्होंने कहा कि गर्मी में दिन काटना बड़ा मुश्किल है। किसी तरह चारपाई खड़ी कर उसकी छांव में बैठे समय काट रहे हैं। किसान गर्मी में झुलस रहे हैं, जबकि शेडों के नीचे ट्रक चालकों का कब्जा है। लगभग आधी स्ट्रीट लाइटें भी खराब हैं।
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इस वजह से कुछ हिस्सों में अंधेरा पसरा रहता है। गांव झंडूवाला के किसान अजायब सिंह ने बताया कि वह बुधवार को ही फसल लेकर आए हैं। मंडी में जहां गर्मी में खुले में बैठना एक समस्या है, वहीं पीने के पानी का प्रबंध न होना भी बड़ी मुश्किल है। मंडी में लगे वाटर-वर्कर्स के नल खराब हैं। उन्हें मंडी में स्थित दुकानों से पानी लाकर प्यास बुझानी पड़ती है। सफाई का भी बुरा हाल है। मंडी में करीब 18 शेड बने हैं, मगर सीजन के दौरान यह भी बहुत कम पड़ जाते हैं।
कहावत है ‘ओ जट्टा आई वैसाखी, मुक्क गई फसला दी राखी...’ अर्थात वैसाखी के साथ फसल पककर तैयार होकर मंडियों में पहुंच जाती है। किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों में लावारिस पशुओं से फसलों की रखवाली नहीं करनी पड़ती। मगर यह कहावत अभी भी किसानों पर सही नहीं लागू हो रही। किसान महिंदर सिंह ने बताया कि मंडी में लावारिस पशु घूमते फिर रहे हैं। इस वजह से अब उन्हें मंडी में भी पशुओं से फसल बचानी पड़ रही है। इसके लिए प्रशासन एवं मंडी अफसरों को कड़े कदम उठाने चाहिए।
सरकारी खरीद एक-दो दिन में शुरू हो जाएगी। अभी किसानों की फसल गीली है। पीने के पानी की समस्या के हल के लिए घड़े रखवाए जा रहे हैं। किसानों को कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
- गुरचरण सिंह, सचिव मार्केट कमेटी मुक्तसर