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एलईडी लाइट्स में घोटाले की आशंका, कांग्रेसी पार्षदों ने ही खोला फ्रंट
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। नगर निगम के मेयर और पार्षदों एलईडी लाइट्स में अब साढ़े चार साल बाद घोटाले को लेकर दोबारा खड़े हो गए हैं। सोमवार को निगम हाऊस की बैठक रखी गई थी लेकिन स्मार्ट सिटी की तरफ से नगर निगम को पूरा रिकार्ड मुहैया ही नहीं करवाया गया है, इतना ही नहीं एग्रीमेंट की कॉपी भी नहीं दी गई, इस कारण निगम ने चार दिन के लिए बैठक को स्थगित कर दिया है।
काफी पार्षदों ने शहर में लगी एलईडी लाइट्स को लेकर सवाल उठाए थे। यहां तक कहा था कि साढ़े चार साल में उनके इलाकों में तो अभी तक अंधेरा दूर करने के लिए एलईडी लाइट्स पहुंची ही नहीं है। कुछ ने आरोप जड़े कि जिन डार्क स्थानों पर एलईडी लाइट्स लगनी चाहिए थी, वहां लगी ही नहीं है। कई इलाकों में सीसीएम भी नहीं लगे हालांकि तय यह था कि अपने आप लाइट्स जलेंगी और बंद होगी लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
मेयर जगदीश राज राजा ने तमाम पार्षदों की बैठक में एक प्रश्नावली तैयार कर स्मार्ट सिटी को भेजी थी। यह प्रश्नावली निगम कमिश्नर के जरिये दी गई थी क्योंकि उनके पास ही स्मार्ट सिटी का कार्यभार है। तमाम पार्षद पूरी तैयारी कर बैठे थे, लेकिन उस समय मेहनत पर पानी फिर गया, जब स्मार्ट सिटी ने पूरा रिकार्ड मुहैया नहीं करवाया। इसलिए बैठक को 24 जून को रखा गया है। दरअसल, शहर में एलईडी लाइटें लगाने से पहले बाकायदा नगर निगम ने एक सर्वे करवाया था। सर्वे में उन स्थानों को चिह्नित किया गया था, जो डार्क जोन हैं। जहां पर रात को अंधेरा रहता है। इसके अलावा भी मोहल्लों-गलियों में एलईडी लाइट्स लगनी थी। लेकिन हैरानी की बात है कि जिन स्थानों को सर्वे में चिह्नित किया था, वहां पर एलईडी लाइटें अभी तक नहीं लगी हैं।
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लंबे समय से पार्षद स्मार्ट सिटी से एलईडी की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। स्मार्ट सिटी निगम के समांतर काम कर रही थी। निगम पार्षदों को कहा जा रहा था कि यह केंद्र का प्रोजेक्ट है। निगम पार्षदों को पूरा रिकार्ड मुहैया नहीं करवाया जा रहा था। जालंधर निगम के डिप्टी मेयर सिमरनजीत बंटी का कहना है कि स्मार्ट सिटी ने अपने एग्रीमेंट को नहीं भेजा है, काफी सवालों के उत्तर भी नहीं मिले हैं, ऐसे में मीटिंग को चार दिन के लिए आगे किया गया है। वहीं पार्षद बंटी नीलकंठ का कहना है कि हमें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स से दूर रखा जा रहा था, शहर के विकास की जिम्मेदारी जालंधर निगम हाऊस के पास है और हाऊस सुप्रीम होता है। अभी भी स्मार्ट सिटी की तरफ से रेकार्ड व तमाम सवालों के उत्तर नहीं दिये जा रहे हैं।
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जालंधर। नगर निगम के मेयर और पार्षदों एलईडी लाइट्स में अब साढ़े चार साल बाद घोटाले को लेकर दोबारा खड़े हो गए हैं। सोमवार को निगम हाऊस की बैठक रखी गई थी लेकिन स्मार्ट सिटी की तरफ से नगर निगम को पूरा रिकार्ड मुहैया ही नहीं करवाया गया है, इतना ही नहीं एग्रीमेंट की कॉपी भी नहीं दी गई, इस कारण निगम ने चार दिन के लिए बैठक को स्थगित कर दिया है।
काफी पार्षदों ने शहर में लगी एलईडी लाइट्स को लेकर सवाल उठाए थे। यहां तक कहा था कि साढ़े चार साल में उनके इलाकों में तो अभी तक अंधेरा दूर करने के लिए एलईडी लाइट्स पहुंची ही नहीं है। कुछ ने आरोप जड़े कि जिन डार्क स्थानों पर एलईडी लाइट्स लगनी चाहिए थी, वहां लगी ही नहीं है। कई इलाकों में सीसीएम भी नहीं लगे हालांकि तय यह था कि अपने आप लाइट्स जलेंगी और बंद होगी लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।
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मेयर जगदीश राज राजा ने तमाम पार्षदों की बैठक में एक प्रश्नावली तैयार कर स्मार्ट सिटी को भेजी थी। यह प्रश्नावली निगम कमिश्नर के जरिये दी गई थी क्योंकि उनके पास ही स्मार्ट सिटी का कार्यभार है। तमाम पार्षद पूरी तैयारी कर बैठे थे, लेकिन उस समय मेहनत पर पानी फिर गया, जब स्मार्ट सिटी ने पूरा रिकार्ड मुहैया नहीं करवाया। इसलिए बैठक को 24 जून को रखा गया है। दरअसल, शहर में एलईडी लाइटें लगाने से पहले बाकायदा नगर निगम ने एक सर्वे करवाया था। सर्वे में उन स्थानों को चिह्नित किया गया था, जो डार्क जोन हैं। जहां पर रात को अंधेरा रहता है। इसके अलावा भी मोहल्लों-गलियों में एलईडी लाइट्स लगनी थी। लेकिन हैरानी की बात है कि जिन स्थानों को सर्वे में चिह्नित किया था, वहां पर एलईडी लाइटें अभी तक नहीं लगी हैं।
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लंबे समय से पार्षद स्मार्ट सिटी से एलईडी की मांग कर रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी। स्मार्ट सिटी निगम के समांतर काम कर रही थी। निगम पार्षदों को कहा जा रहा था कि यह केंद्र का प्रोजेक्ट है। निगम पार्षदों को पूरा रिकार्ड मुहैया नहीं करवाया जा रहा था। जालंधर निगम के डिप्टी मेयर सिमरनजीत बंटी का कहना है कि स्मार्ट सिटी ने अपने एग्रीमेंट को नहीं भेजा है, काफी सवालों के उत्तर भी नहीं मिले हैं, ऐसे में मीटिंग को चार दिन के लिए आगे किया गया है। वहीं पार्षद बंटी नीलकंठ का कहना है कि हमें स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स से दूर रखा जा रहा था, शहर के विकास की जिम्मेदारी जालंधर निगम हाऊस के पास है और हाऊस सुप्रीम होता है। अभी भी स्मार्ट सिटी की तरफ से रेकार्ड व तमाम सवालों के उत्तर नहीं दिये जा रहे हैं।