कनाडा में पढ़ना हुआ मुश्किल: भारतीय छात्रों के 50 फीसदी वीजा खारिज, Canada के कई कॉलेजों ने कम की सीटें
कनाडा में इस समय कुल आबादी 3.75 करोड़ है, जिसमें 17 लाख की आबादी भारतीय मूल के लोगों की है। हर साल तकरीबन एक लाख से अधिक छात्र स्टडी के लिए कनाडा का रुख करते हैं, जिसमें अधिकतर पंजाबी मूल के होते हैं।
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नामी कॉलेजों ने भारतीयों के लिए सीट कम कीं
कनाडा के कई नामी कॉलेजों हंबर, शैरेडेन, एलगॉनक्विन, नेएट (नार्थ एलबर्टा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) सेएट (साउथ एलबर्टा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी), केपीयू (क्वांटलेन पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी) लंगारा व डग्लस समेत कई कॉलेजों ने भारतीय मूल के छात्रों के लिए सीटें आधी कर दी हैं। हालांकि अधिकारिक रूप से ऐसी घोषणा नहीं की है।कई मामले आए सामने
एक छात्रा के आइलेट्स में आठ बैंड थे। जमा दो की कक्षा में 90 फीसदी से अधिक अंक थे। उसका वीजा बिना बताए अस्वीकार कर दिया गया। कई कॉलेजों में यह भी देखने को मिला है कि फीस लेने के छह महीने बाद छात्र का दाखिला अगले सेमेस्टर के लिए मुल्तवी कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में छात्र न तो भारत में स्टडी कर सकता है और न ही कहीं दाखिला ले सकता है। - सुकांत त्रिवेदी, चेयरमैन स्टडी अबरॉड कंसलटेंट एसोसिएशनकनाडा वीजा आवेदनों के बढ़ते रिजेक्शन रेट आश्चर्यजनक हैं। स्वर्ण पदक विजेता और अपने क्षेत्रों में टॉपर्स रह चुके छात्रों को भी उच्च शिक्षा के अवसर से वंचित किया जा रहा है। - पूजा सिंह, एमडी, न्यू इमेज इंस्टीट्यूट
इसमें कोई शंका नहीं कि भारतीय वीजा में काफी कटौती की गई है और कॉलेजों में भी सीट कम हुई हैं। इसका एक कारण कनाडा में स्टडी वीजा के आवेदन में बढ़ोतरी होना भी है। - सोनिया धवन, एमडी, ग्रे मैटर
कनाडा के प्राइवेट कॉलेजों ने छात्रों पर शुरू की मनमानी
वीजा रिफ्यूजल के साथ कनाडा के प्राइवेट कॉलेजों ने भी मनमानी शुरू कर दी है। कनाडा की तरफ से पहला डंडा फरवरी में चलाया गया, जहां क्यूबेक में निजी कॉलेजों पर शिकंजा कसा गया। इन कॉलेजों में भारतीय मूल के छात्रों की संख्या सबसे अधिक थी। अचानक फरमान जारी किया गया कि इन कॉलेजों में पढ़ने वालों को वर्क परमिट नहीं मिलेगा। जो विद्यार्थी दाखिला ले चुके थे, पैसा भेज चुके थे, वह बुरी तरह से फंस गए।कनाडा के जो तीन कॉलेज दिवालिया घोषित किए गए, उनमें एम कॉलेज मॉन्ट्रियल, सीडीई कॉलेज शेरब्रुक और सीसीएसक्यू कॉलेज लांग्युइल शामिल हैं। इन कॉलेजों ने पहले ट्यूशन फीस जमा करने और पैसे देने के लिए दबाव बनाया। फिर अचानक से छात्रों को इस माह एक नोटिस जारी कर दिया कि वे कॉलेज को बंद कर रहे हैं। कॉलेजों में हजारों छात्रों का पैसा आज भी फंसा हुआ है।
ड्रग व गैंगवार भी कारण हो सकता है
कनाडा में भारतीय खासकर पंजाबी लोगों का नाम ड्रग व गैंगवार में काफी आगे निकल चुका है। चंद दिन पहले ही प्रदीप बराड़ की टोरंटो नाइट क्लब में गोलियां मारी गईं। दो दिन पहले ही कीपर्ज गैंग के मनिंदर धालीवाल को गोलियां मारकर कनाडा विलेज में हत्या कर दी गई, इसके पीछे पंजाबी ही थे। सिद्धू मूसेवाला की हत्या भी कनाडा में रहने वाले गोल्डी बराड़ ने करवाई थी। संदीप नंगल अंबियां की हत्या भी कनाडा से करवाई गई। कनाडा में पंजाब मूल के बड़ी संख्या में लोग ड्रग कारोबार का हिस्सा बन चुके हैं।
पिछले साल पकड़ी 46 करोड़ की ड्रग
कनाडा पुलिस ने पिछले साल अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स रैकेट का पर्दाफाश कर करीब 1000 किलो ड्रग्स, हथियार व अवैध वाहनों सहित करीब 20 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें नौ पंजाब मूल के थे। पुलिस ने गिरफ्तार तस्करों से 444 किलो कोकीन, 182 किलो क्रिस्टल मेथ, 427 किलो भांग, 966,020 सी 9 और एक बंदूक, पांच ट्रैक्टर ट्रेलर सहित 21 वाहन जब्त कर उनके खिलाफ कुल 182 आरोप लगाए हैं। बरामद ड्रग्स की कीमत 61 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 46 करोड़) थी। कुछ समय पहले पंजाबी दंपती गुरमिन्द्र सिंह तूर (31) व किरणदीप कौर (26) भी गिरफ्तार हुए, जो एलबर्टा से एक क्विंटल कोकीन ले जा रहे थे। कनाडा में इस समय कुल आबादी 3.75 करोड़ है, जिसमें 17 लाख की आबादी भारतीय मूल के लोगों की है।