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पंजाब में लगी आचार संहिता: 25 हजार प्रदर्शनकारी अध्यापकों के सपनों पर फिरा पानी, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

Sat, 08 Jan 2022 09:51 PM IST
पंजाब ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब) Published by: पंजाब ब्‍यूरो Updated Sat, 08 Jan 2022 09:51 PM IST
सार

नौकरी के लिए दिन रात प्रदर्शन कर रहे पंजाब के लगभग 25 हजार अध्यापक आचार संहिता के कारण नौकरी से महरूम रह गए हैं। इनमें से करीब 12 हजार ईटीटी अध्यापक हैं। इन अध्यापकों ने नौकरी के लिए कड़ा संघर्ष किया है, लेकिन आज इनके सपने चकनाचूर हो गए हैं।

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Dreams of Protesting Teachers shattered due to Code of Conduct in Punjab
जालंधर में प्रदर्शन करते अध्यापक। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।

विस्तार

पंजाब विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है। इसके साथ ही आचार संहिता भी लागू हो गई है। वहीं जालंधर में बारिश, धूप और सर्दी में दिन रात शिक्षा मंत्री की कोठी के बाहर प्रदर्शन करने, कई माह से पानी की टंकी पर बैठकर अपने हक की लड़ाई लड़ने वाले अध्यापकों के सपनों पर पानी फिर गया है। नौकरी न मिलने से लगभग 25 हजार अध्यापक खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। इनका कहना है कि शिक्षा मंत्री उन्हें झूठे दिलासे देते रहे, लेकिन सच तो यह है कि वह भी चुनाव आचार संहिता लगने का इंतजार कर रहे थे, ताकि उनकी जवाबदेही खत्म हो सके। सरकार ने उनके साथ धोखा किया है, जिसका जवाब सरकार को दिया जाएगा।

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नौकरी के लिए दिन रात प्रदर्शन कर रहे पंजाब के लगभग 25 हजार अध्यापक आचार संहिता के कारण नौकरी से महरूम रह गए हैं। इनमें से करीब 12 हजार ईटीटी अध्यापक हैं। इन अध्यापकों ने नौकरी के लिए कड़ा संघर्ष किया है, लेकिन आज इनके सपने चकनाचूर हो गए हैं। इनके अलावा 6 हजार मास्टर कैडर, जिनके सिर पर छठी से 10वीं कक्षा की जिम्मेदारी होती हैं, खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए 2500 के करीब लेक्चरर व सहायक लेक्चरर को भी निराशा ही हाथ लगी है। यह सहायक लेक्चरर 21 दिन से जालंधर में शिक्षा मंत्री की कोठी के बाहर टेंट लगाकर बैठे हैं, लेकिन उनकी उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं। 

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सरकार व शिक्षा मंत्री ने किया धोखा, उठाना पड़ेगा नुकसान : विक्रमदेव

इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के स्टेट प्रधान विक्रमदेव का कहना है कि सरकार ने अध्यापकों के साथ 100 प्रतिशत धोखा किया है। सरकार का 36 हजार अध्यापकों को रेगुलर करने का एलान सबसे बड़ा धोखा था। यह लोगों को गुमराह करने के लिए किया गया था, जिसे गवर्नर ने सिरे से खारिज कर दिया था। इस सारी जद्दोजहद के बीच 20 अध्यापकों पर मामले भी दर्ज किए गए, जिनको अभी तक वापस नहीं लिया गया है। इस धोखे का खामियाजा कांग्रेस को इन विधानसभा चुनावों में उठाना पड़ेगा।

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शुक्रवार को मिला भरोसा, शनिवार को लग गई आचार संहिता

शुक्रवार को पंजाब के शिक्षा मंत्री से रेगुलर किए जाने का भरोसा लेकर लौटे मिड डे मील दफ्तरी कर्मचारी यूनियन के सदस्य शनिवार को चुनाव आचार संहिता लगने के बाद निराश हो गए। यूनियन के शोभित भगत, आशीष जुलाहा ने कहा कि चुनाव आचार संहिता लगने के बाद साबित हो गया है कि सरकार की मंशा किसी को रेगुलर करने की थी ही नहीं। पंजाब सरकार व शिक्षा मंत्री इसी इंतजार में थे कि पंजाब में चुनाव आचार संहिता लग जाए व उनकी जवाबदेही खत्म हो जाए। कर्मचारियों की फाइल को लटकाए रखना सरकार की साजिश का हिस्सा था। इसका जवाब इन चुनावों में दिया जाएगा।

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