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चालीस माह में 48 कैदियों की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, कपूरथला
Updated Thu, 02 Jul 2015 10:09 PM IST
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मॉडर्न जेल में एक तरफ कैदी जहां सरेआम स्मार्टफोन पर फेसबुक व सोशल
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नेटवर्क साइट का लुत्फ उठा रहे हैं, वहीं कई कैदी मेडिकल सुविधा के अभाव
में दम तोड़ रहे हैं। कैदियों के मरने और मोबाइल बरामदगी का ग्राफ लगातार
बढ़ रहा है। 40 माह में जेल में 48 से अधिक कैदी अपनी जान से हाथ धो बैठे
हैं। हर माह अंदाजन पांच-छह मोबाइल तो कैदियों से बरामद हो ही जाते हैं।
पिछले शनिवार को माडर्न जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट विक्रमजीत सिंह पांथे पर दो बाइक सवार युवकों की ओर से अंधाधुंध फायरिंग की घटना साफ इशारा करती है कि जेल में मोबाइल कम्यूनिकेशन चरम पर है। वहीं जेल में चिकित्सकीय सुविधा के अभाव में कैदी दम तोड़ रहे हैं।
एसपी मानते हैं कि वर्तमान दौर में जेल में 3874 कैदी बंद हैं। जबकि जेल की क्षमता 2760 हैं। ऐसे में जो मेडिकल सुविधा उपलब्ध है, वह नाकाफी है। इन कैदियों में से करीब 70 फीसदी विचाराधीन कैदी हैं, जिनका अभी तक अदालत में चालान पेश नहीं हो पाया है। इस समय जेल में 30 बेड का अस्पताल है। जहां तीन-चार मेडिकल ऑफिसर (एमओ), तीन-चार फार्मासिस्ट और दो नर्स तैनात है। इतने ज्यादा कैदियों के स्वास्थ्य जांच के लिए 10-12 डॉक्टरों की जरूरत है।
एसपी जेल परमजीत सिंह जेल में मेडिकल सुविधा के अभाव की बात मानने को तैयार नहीं हैं। उनके मुताबिक जेल में मरने वाले कैदियों में से ज्यादातर जेल में आने से पहले संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त होते हैं, जो जेल में आने पर उभरने लगती है। इसके पीछे चिकित्सीय सुविधा का अभाव नहीं है।
जेल में कैदी की मौत
मॉडर्न जेल में बंद एक कैदी की बुधवार को मौत हो गई। मृतक की पहचान अमृतप्रीत सिंह पुत्र शमिंदर सिंह निवासी गांव दादूवाल जालंधर के रूप में हुई है। कैदी को सांस की तकलीफ थी।
कैदी से मोबाइल बरामद
जेल में चेकिंग के दौरान वीरवार को एक कैदी से मोबाइल बरामद हुआ है। थाना कोतवाली की पुलिस ने आरोपी कैदी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट अमरीक सिंह ने जेल में बैरकों की चेकिंग शुरू की तो कैदी हरजीत सिंह उर्फ जीता से एक मोबाइल मिला। अमरीक सिंह के अनुसार हरजीत सिंह से मिलने साहिब सिंह पुत्र दर्शन सिंह, सिमरजीत कौर पत्नी साहिब सिंह और राजविंदर कौर आए थे। मोबाइल कैदी के पास कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है।
पिछले शनिवार को माडर्न जेल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट विक्रमजीत सिंह पांथे पर दो बाइक सवार युवकों की ओर से अंधाधुंध फायरिंग की घटना साफ इशारा करती है कि जेल में मोबाइल कम्यूनिकेशन चरम पर है। वहीं जेल में चिकित्सकीय सुविधा के अभाव में कैदी दम तोड़ रहे हैं।
एसपी मानते हैं कि वर्तमान दौर में जेल में 3874 कैदी बंद हैं। जबकि जेल की क्षमता 2760 हैं। ऐसे में जो मेडिकल सुविधा उपलब्ध है, वह नाकाफी है। इन कैदियों में से करीब 70 फीसदी विचाराधीन कैदी हैं, जिनका अभी तक अदालत में चालान पेश नहीं हो पाया है। इस समय जेल में 30 बेड का अस्पताल है। जहां तीन-चार मेडिकल ऑफिसर (एमओ), तीन-चार फार्मासिस्ट और दो नर्स तैनात है। इतने ज्यादा कैदियों के स्वास्थ्य जांच के लिए 10-12 डॉक्टरों की जरूरत है।
एसपी जेल परमजीत सिंह जेल में मेडिकल सुविधा के अभाव की बात मानने को तैयार नहीं हैं। उनके मुताबिक जेल में मरने वाले कैदियों में से ज्यादातर जेल में आने से पहले संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त होते हैं, जो जेल में आने पर उभरने लगती है। इसके पीछे चिकित्सीय सुविधा का अभाव नहीं है।
जेल में कैदी की मौत
मॉडर्न जेल में बंद एक कैदी की बुधवार को मौत हो गई। मृतक की पहचान अमृतप्रीत सिंह पुत्र शमिंदर सिंह निवासी गांव दादूवाल जालंधर के रूप में हुई है। कैदी को सांस की तकलीफ थी।
कैदी से मोबाइल बरामद
जेल में चेकिंग के दौरान वीरवार को एक कैदी से मोबाइल बरामद हुआ है। थाना कोतवाली की पुलिस ने आरोपी कैदी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट अमरीक सिंह ने जेल में बैरकों की चेकिंग शुरू की तो कैदी हरजीत सिंह उर्फ जीता से एक मोबाइल मिला। अमरीक सिंह के अनुसार हरजीत सिंह से मिलने साहिब सिंह पुत्र दर्शन सिंह, सिमरजीत कौर पत्नी साहिब सिंह और राजविंदर कौर आए थे। मोबाइल कैदी के पास कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है।