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टीए घोटाले की विजिलेंस से शिकायत करने वाले रेलकर्मी की जान को खतरा
Updated Fri, 17 Nov 2017 10:43 PM IST
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टीए घोटाले का खुलासा करने वाले रेलकर्मी की जान को खतरा
शिकायतकर्ता डिप्रेशन में, रेलवे अस्पताल में दाखिल
कई रेल अधिकारी व कर्मी रमिंदर को दे रहे धमकियां
लेखा व इलेक्ट्रिकल विभाग के कई अधिकारियों पर गिरेगी गाज
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
रेलवे की इलेक्ट्रिकल विभाग में ट्रेवलिंग अलाउंस (टीए) घोटाले की विजिलेंस से शिकायत करने वाले रेलकर्मी रमिंदर सिंह को संबंधित विभाग के अधिकारी और 18 आरोपी रेलकर्मी उसे विभिन्न प्रकार की धमकियां दे रहे हैं। रमिंदर इतना डर गया है कि वो डिप्रेशन में चला गया है, उसके परिजनों ने उसे रेलवे अस्पताल में दाखिल कराया है। उक्त घोटाले में लेखा व इलेक्ट्रिकल विभाग के कई अधिकारियों व कर्मियों पर भी गाज गिरने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक रमिंदर अपने टीए का बिल पास कराने के लिए संबंधित विभाग के क्लर्क के पास गया था। क्लर्क ने उसका टीए पास कराने के लिए पैसों की मांग की थी। रमिंदर ने क्लर्क को पैसे नहीं दिए और क्लर्क ने उसके टीए की धनराशि कम कर दी। इसी बात पर रमिंदर ने सीनियर पर्सनल अधिकारी करीब अंसारी को शिकायत की, अंसारी ने मामले की तहकीकात करने के बाद क्लर्क का तबादला कटड़ा कर दिया। उसके बाद रमिंदर की शिकायत पर रेलवे विजिलेंस ने इलेक्ट्रिकल विभाग में छापेमारी कर दी। इस छापेमारी में ऐसे कई कर्मी पकड़े गए जो दस्तावेज में लिखे दो हजार के साथ एक जीरो लगाकर बीस हजार रुपये टीए वसूलते थे। विजिलेंस की छापेमारी के बाद अधिकारियों व आरोपियों कर्मियों ने रमिंदर को धमकियां देनी शुरू कर दी, इस घोटाले में यूनियन के कई नेता भी शामिल है।
टीए पास करने के नियम
नियम मुताबिक एक माह में पंद्रह दिन का टीए बनने पर उसे पास करवाने के लिए एडीआरएम के पास भेज कर स्वीकृति ली जाती है। इसके अलावा दस हजार रुपये से भी ज्यादा टीए के लिए एडीआरएम की स्वीकृति लेनी होती है। इसके अलावा टूर पर जाने के लिए ड्यूटी पास व कार्ड पास जारी होता है। टूर पर भेजने से पहले संबंधित विभाग का अधिकारी ड्यूटी पत्र जारी करता है, हाजिरी सीट पर टूर पर जाने वाले कर्मी का ब्योरा लिखा जाता है। सभी नियमों को ताक पर रख कर घोटाला किया गया।
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एडीआरएम ने टीए कंट्रोल करने संबंधी जारी किया पत्र
टीए घोटाला उजागर होने के बाद एडीआरएम ने एक आदेश जारी कर कहा कि टीए पर कंट्रोल किया जाए और जो कर्मी लगातार टीए वसूल कर रहे हैं उन पर नजर रखी जाए।
शताब्दी पर चल रहा यूनियन सदस्य
टीए बनाने के लिए फिरोजपुर से चलने वाली शताब्दी पर यूनियन के नेता अपने ही यूनियन के मेंबरों को टूर पर भेज रहे हैं। इसमें भी टीए घोटाला होने की बात कही जा रही है। उधर, एडीआरएम रमनीक सिंह ने इलेक्ट्रिकल विभाग में विजिलेंस जांच की पुष्टि की है और कहा कि पूरे मामले संबंधी उन्हें कोई खास जानकारी नहीं है।
यह है मामला
पिछले दो दिनों में विजिलेंस ने टीए घोटाले से लेखा व इलेक्ट्रिकल विभाग से पूरा रिकार्ड अपने साथ दिल्ली ले गई है। इसमें 18 रेलकर्मी ऐसे हैं,, जो फर्जी टूर बनाकर फर्जी टीए वसूल कर रहे थे। कई खामियां दस्तावेजों में विजिलेंस को मिली हैं।
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टीए घोटाले का खुलासा करने वाले रेलकर्मी की जान को खतरा
शिकायतकर्ता डिप्रेशन में, रेलवे अस्पताल में दाखिल
कई रेल अधिकारी व कर्मी रमिंदर को दे रहे धमकियां
लेखा व इलेक्ट्रिकल विभाग के कई अधिकारियों पर गिरेगी गाज
अमर उजाला ब्यूरो
फिरोजपुर।
रेलवे की इलेक्ट्रिकल विभाग में ट्रेवलिंग अलाउंस (टीए) घोटाले की विजिलेंस से शिकायत करने वाले रेलकर्मी रमिंदर सिंह को संबंधित विभाग के अधिकारी और 18 आरोपी रेलकर्मी उसे विभिन्न प्रकार की धमकियां दे रहे हैं। रमिंदर इतना डर गया है कि वो डिप्रेशन में चला गया है, उसके परिजनों ने उसे रेलवे अस्पताल में दाखिल कराया है। उक्त घोटाले में लेखा व इलेक्ट्रिकल विभाग के कई अधिकारियों व कर्मियों पर भी गाज गिरने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक रमिंदर अपने टीए का बिल पास कराने के लिए संबंधित विभाग के क्लर्क के पास गया था। क्लर्क ने उसका टीए पास कराने के लिए पैसों की मांग की थी। रमिंदर ने क्लर्क को पैसे नहीं दिए और क्लर्क ने उसके टीए की धनराशि कम कर दी। इसी बात पर रमिंदर ने सीनियर पर्सनल अधिकारी करीब अंसारी को शिकायत की, अंसारी ने मामले की तहकीकात करने के बाद क्लर्क का तबादला कटड़ा कर दिया। उसके बाद रमिंदर की शिकायत पर रेलवे विजिलेंस ने इलेक्ट्रिकल विभाग में छापेमारी कर दी। इस छापेमारी में ऐसे कई कर्मी पकड़े गए जो दस्तावेज में लिखे दो हजार के साथ एक जीरो लगाकर बीस हजार रुपये टीए वसूलते थे। विजिलेंस की छापेमारी के बाद अधिकारियों व आरोपियों कर्मियों ने रमिंदर को धमकियां देनी शुरू कर दी, इस घोटाले में यूनियन के कई नेता भी शामिल है।
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टीए पास करने के नियम
नियम मुताबिक एक माह में पंद्रह दिन का टीए बनने पर उसे पास करवाने के लिए एडीआरएम के पास भेज कर स्वीकृति ली जाती है। इसके अलावा दस हजार रुपये से भी ज्यादा टीए के लिए एडीआरएम की स्वीकृति लेनी होती है। इसके अलावा टूर पर जाने के लिए ड्यूटी पास व कार्ड पास जारी होता है। टूर पर भेजने से पहले संबंधित विभाग का अधिकारी ड्यूटी पत्र जारी करता है, हाजिरी सीट पर टूर पर जाने वाले कर्मी का ब्योरा लिखा जाता है। सभी नियमों को ताक पर रख कर घोटाला किया गया।
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एडीआरएम ने टीए कंट्रोल करने संबंधी जारी किया पत्र
टीए घोटाला उजागर होने के बाद एडीआरएम ने एक आदेश जारी कर कहा कि टीए पर कंट्रोल किया जाए और जो कर्मी लगातार टीए वसूल कर रहे हैं उन पर नजर रखी जाए।
शताब्दी पर चल रहा यूनियन सदस्य
टीए बनाने के लिए फिरोजपुर से चलने वाली शताब्दी पर यूनियन के नेता अपने ही यूनियन के मेंबरों को टूर पर भेज रहे हैं। इसमें भी टीए घोटाला होने की बात कही जा रही है। उधर, एडीआरएम रमनीक सिंह ने इलेक्ट्रिकल विभाग में विजिलेंस जांच की पुष्टि की है और कहा कि पूरे मामले संबंधी उन्हें कोई खास जानकारी नहीं है।
यह है मामला
पिछले दो दिनों में विजिलेंस ने टीए घोटाले से लेखा व इलेक्ट्रिकल विभाग से पूरा रिकार्ड अपने साथ दिल्ली ले गई है। इसमें 18 रेलकर्मी ऐसे हैं,, जो फर्जी टूर बनाकर फर्जी टीए वसूल कर रहे थे। कई खामियां दस्तावेजों में विजिलेंस को मिली हैं।