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बहिबल गोलीकांड:इंस्पेक्टर प्रदीप को वादा माफ गवाह बनाने की मंजूरी
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बहिबल गोलीकांड केस में एसआईटी की याचिका पर जिला अदालत ने आरोपी इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को वादा माफ गवाह बनाने की मंजूरी दे दी है। अदालत ने इंस्पेक्टर को गवाह न बनाने की मांग करने वाले मृतक किशन भगवान सिंह के भाई रेशम सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है।
जानकारी के अनुसार इन दोनों याचिकाओं पर जिला अदालत में 10 सितंबर को सुनवाई पूरी हो चुकी थी। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस के बाद अदालत ने फैसले के लिए मंगलवार का दिन तय किया था। मंगलवार को अदालत ने एसआईटी की याचिका को मंजूर करते हुए रेशम सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। जिला अटार्नी रजनीश गोयल ने बताया कि इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान एसआईटी ने इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को वादा माफ गवाह बनाने के लिए अदालत से आग्रह किया था और बाद में उनके अदालत में बयान में दर्ज करवाए गए थे। इस दौरान उनके द्वारा इंस्पेक्टर को गवाह बनाने के संबंध में अदालत के समक्ष रखे तर्कों को अदालत से स्वीकार कर लिया।
एसआईटी प्रमुख आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने बहिबल केस में धारा 306 के तहत याचिका दायर की थी जिसे जिला अदालत ने मंजूर कर लिया है। इस घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को बरगाड़ी बेअदबी कांड के विरोध में गांव बहिबल कलां में धरना दे रही सिख संगत पर पुलिस के फायरिंग करने से दो नौजवानों की मौत हो गई थी। घटना के एक सप्ताह बाद 21 अक्तूबर 2015 को थाना बाजाखाना में अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस दर्ज किया गया था जिसमें जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, उनके रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह व थाना बाजाखाना एसएचओ अमरजीत सिंह कुलार को नामजद किया गया। इसमें से एसएसपी की गिरफ्तारी हो चुकी थी जबकि बाकी तीनों अधिकारियों को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली हुई है। इस मामले में एसआईटी ने पिछले माह तत्कालीन एसएचओ कोटकपूरा गुरदीप सिंह पंधेर समेत फरीदकोट के सुहेल सिंह बराड़ और मोगा के पंकज बांसल को भी गिरफ्तार किया था। अब एसआईटी इस केस में तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल समेत राज्य के एक बड़े राजनेता पर कार्रवाई के संकेत दे चुकी है।
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जानकारी के अनुसार इन दोनों याचिकाओं पर जिला अदालत में 10 सितंबर को सुनवाई पूरी हो चुकी थी। दोनों पक्षों के वकीलों की बहस के बाद अदालत ने फैसले के लिए मंगलवार का दिन तय किया था। मंगलवार को अदालत ने एसआईटी की याचिका को मंजूर करते हुए रेशम सिंह की याचिका को खारिज कर दिया। जिला अटार्नी रजनीश गोयल ने बताया कि इन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान एसआईटी ने इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को वादा माफ गवाह बनाने के लिए अदालत से आग्रह किया था और बाद में उनके अदालत में बयान में दर्ज करवाए गए थे। इस दौरान उनके द्वारा इंस्पेक्टर को गवाह बनाने के संबंध में अदालत के समक्ष रखे तर्कों को अदालत से स्वीकार कर लिया।
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एसआईटी प्रमुख आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने बहिबल केस में धारा 306 के तहत याचिका दायर की थी जिसे जिला अदालत ने मंजूर कर लिया है। इस घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को बरगाड़ी बेअदबी कांड के विरोध में गांव बहिबल कलां में धरना दे रही सिख संगत पर पुलिस के फायरिंग करने से दो नौजवानों की मौत हो गई थी। घटना के एक सप्ताह बाद 21 अक्तूबर 2015 को थाना बाजाखाना में अज्ञात पुलिस पार्टी पर हत्या का केस दर्ज किया गया था जिसमें जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसएसपी मोगा चरणजीत सिंह शर्मा, उनके रीडर इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह, एसपी फाजिल्का बिक्रमजीत सिंह व थाना बाजाखाना एसएचओ अमरजीत सिंह कुलार को नामजद किया गया। इसमें से एसएसपी की गिरफ्तारी हो चुकी थी जबकि बाकी तीनों अधिकारियों को हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली हुई है। इस मामले में एसआईटी ने पिछले माह तत्कालीन एसएचओ कोटकपूरा गुरदीप सिंह पंधेर समेत फरीदकोट के सुहेल सिंह बराड़ और मोगा के पंकज बांसल को भी गिरफ्तार किया था। अब एसआईटी इस केस में तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल समेत राज्य के एक बड़े राजनेता पर कार्रवाई के संकेत दे चुकी है।
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