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नहीं मिले सबूत, खुदकुशी मामले में नामजद ये पांच लोग हुए बरी
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा
Updated Thu, 02 Mar 2017 09:46 PM IST
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अदालत
- फोटो : file
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एडिशनल जिला एवं सेशन जज लखविन्द्र कौर दुग्गल ने 5 साल पहले एक किरयाना दुकानदार को खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप में नामजद 5 लोगों को सबूतों के अभाव में बरी करने का फैसला सुनाया है।
मोगा के गांव सिंघावाला में 6 नवंबर 2011 को किरयाना दुकानदार राजिंदर सिंह ने कोई जहरीली वस्तु निगलकर अपनी जान दे दी थी। इस दौरान मिले सुसाइड नोट पर आधारित थाना सिटी साउथ में पुलिस ने राजिंदर के भाई चरनजीत सिंह के बयान पर मृतक की पत्नी अनीता रानी, सास सुदेश रानी, साला दीपक कुमार निवासी डीएम कॉलेज रोड मोगा और पत्रकार ओम प्रकाश आजाद व ललिता के खिलाफ खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
मृतक ने अपने सुसाइड नोट में इन सभी लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था। बचाव पक्ष के वकील रविंदर पाल सिंह रत्तिया, जगरूप सिंह व केके मित्तल ने पैरवी की थी। इस केस की सुनवाई के दौरान आरोपी महिला सुदेश रानी की मौत हो गई थी। एडिशनल जिला एवं सेशन जज लखविन्द्र कौर दुग्गल ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने और तथ्यों को देखते हुए सबूत के अभाव से सभी पांचों लोगों को बरी करने का आदेश दिया है।
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मोगा के गांव सिंघावाला में 6 नवंबर 2011 को किरयाना दुकानदार राजिंदर सिंह ने कोई जहरीली वस्तु निगलकर अपनी जान दे दी थी। इस दौरान मिले सुसाइड नोट पर आधारित थाना सिटी साउथ में पुलिस ने राजिंदर के भाई चरनजीत सिंह के बयान पर मृतक की पत्नी अनीता रानी, सास सुदेश रानी, साला दीपक कुमार निवासी डीएम कॉलेज रोड मोगा और पत्रकार ओम प्रकाश आजाद व ललिता के खिलाफ खुदकुशी के लिए मजबूर करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
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मृतक ने अपने सुसाइड नोट में इन सभी लोगों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया था। बचाव पक्ष के वकील रविंदर पाल सिंह रत्तिया, जगरूप सिंह व केके मित्तल ने पैरवी की थी। इस केस की सुनवाई के दौरान आरोपी महिला सुदेश रानी की मौत हो गई थी। एडिशनल जिला एवं सेशन जज लखविन्द्र कौर दुग्गल ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को सुनने और तथ्यों को देखते हुए सबूत के अभाव से सभी पांचों लोगों को बरी करने का आदेश दिया है।
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