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पशुओं और जानवरों में भी कैंसर
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सूबे में पानी व हवा के दूषित होने के चलते मनुष्य के साथ साथ पशु भी कैंसर से पीड़ित हो रहे है। इसकी रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की जगह पशु पालन विभाग आंकड़े छिपाने में लगा हुआ है। इसका खुलासा भाई घन्हैया कैंसर रोको सेवा सोसायटी की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) एक्ट के तहत साल 2010 और साल 2020 में मांगी गई जानकारियों के माध्यम से हुआ है।
पिछले 12 वर्ष से गरीब व जरूरतमंद कैंसर मरीजों की आर्थिक मदद करने में जुटी सोसायटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा को साल 2010 में अपने गांव चंदबाजा की ही पशु डिस्पेंसरी से जानकारी मिली थी कि इन दिनों पशुओं में कैंसर का रोग पाया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने पशु पालन विभाग से सूचना के अधिकार एक्ट के तहत कैंसर से पीड़ित पशुओं के बारे में आंकड़ा मांगा। जवाब में उन्हें फरीदकोट में 62 पशुओं में कैंसर होने की जानकारी मिली। इनमें कुत्ते, बैल, गाय, भैंस, घोड़े इत्यादि शामिल थे। विभाग ने पटियाला, लुधियाना, बठिंडा जिलों के प्रभावित पशुओं के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई थी।
इसके बाद सोसायटी ने जनवरी 2020 में राज्य के सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर पशु पालन विभाग से कैंसर प्रभावित पशुओं का विवरण मांगा था। इसके जवाब में जिला मुक्तसर में 342, बठिंडा में 615 व फिरोजपुर में 235 पशुओं के कैंसर से प्रभावित होने जानकारी दी गई। फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला, होशियारपुर, संगरूर, कपूरथला, फाजिल्का, रूपनगर, शहीद भगत सिंह नगर के पशु पालन विभाग दफ्तरों ने जानकारी दी है कि उनके जिलों में कैंसर से प्रभावित कोई पशु ही नहीं है।
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चंदबाजा का आरोप है कि कुछ जिले अधुरी जानकारी दे रहे है जबकि कई जिलों ने गलत जानकारी उपलब्ध करवाई है। साल 2010 में आरटीआई के तहत मांगी जानकारी में पशु पालन विभाग ने होशियारपुर में 37 ,लुधियाना में 46 , फरीदकोट में 90, पटियाला में 23 पशुओं में कैंसर होने की पुष्टि की थी। अब यहीं जिले आंकड़े छिपाने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने बताया वर्ष 2018 में भी सोसायटी ने सभी जिलों से कैंसर प्रभावित पशुओं की जानकारी मांगी थी, उस समय भी ज्यादातर जिलों ने अपने यहां कोई भी कैंसर प्रभावित पशु नहीं होने के दावे किए थे। उन्होंने कहा कि अब जिन जिलों से कैंसर प्रभावित पशुओं का आंकड़ा मिला है, वह सिर्फ पालतू पशुओं का ही है। सड़कों पर लावारिस घूमने वाले पशुओं को शामिल किया जाए तो आंकड़ा बढ़ेगा।
तथ्य छिपाने की जगह ठोस हल निकालें सरकार: चंदबाजा
सोसायटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा का कहना है कि सूबे में कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग के साथ प्रदूषित हो चुके हवा, पानी के कारण कैंसरतेजी से फैल रहा है, जिसकी चपेट में मनुष्यों के साथ साथ पशु भी आ रहे है। ऐसे हालात में तथ्य छिपाने की जगह हल निकालने के प्रयास करना चाहिए। साथ ही गलत जानकारियां देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सोसायटी ने सूचना देने में आनाकानी करने वाले पशु पालन विभाग के खिलाफ राज्य सूचना कमिश्नर के पास अपील दायर करने का फैसला किया है।
सभी केस संदिग्ध, पुष्टि के लिए लैब नहीं: डॉ. गौतम प्रसाद
पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. गौतम प्रसाद का कहना है कि पशुओं में कैंसर होने के सभी केस संदिग्ध ही है। पूरे सूबे में पशुओं को कैंसर की बीमारी संबंधी पड़ताल करवाने के लिए कोई लैब नहीं है और न ही पशु पालन विभाग के पास कैंसर के स्पेशलिस्ट वेटरिनरी डाक्टर है।
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पिछले 12 वर्ष से गरीब व जरूरतमंद कैंसर मरीजों की आर्थिक मदद करने में जुटी सोसायटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा को साल 2010 में अपने गांव चंदबाजा की ही पशु डिस्पेंसरी से जानकारी मिली थी कि इन दिनों पशुओं में कैंसर का रोग पाया जा रहा है। इसके बाद उन्होंने पशु पालन विभाग से सूचना के अधिकार एक्ट के तहत कैंसर से पीड़ित पशुओं के बारे में आंकड़ा मांगा। जवाब में उन्हें फरीदकोट में 62 पशुओं में कैंसर होने की जानकारी मिली। इनमें कुत्ते, बैल, गाय, भैंस, घोड़े इत्यादि शामिल थे। विभाग ने पटियाला, लुधियाना, बठिंडा जिलों के प्रभावित पशुओं के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई थी।
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इसके बाद सोसायटी ने जनवरी 2020 में राज्य के सभी जिलों के डिप्टी डायरेक्टर पशु पालन विभाग से कैंसर प्रभावित पशुओं का विवरण मांगा था। इसके जवाब में जिला मुक्तसर में 342, बठिंडा में 615 व फिरोजपुर में 235 पशुओं के कैंसर से प्रभावित होने जानकारी दी गई। फरीदकोट, लुधियाना, पटियाला, होशियारपुर, संगरूर, कपूरथला, फाजिल्का, रूपनगर, शहीद भगत सिंह नगर के पशु पालन विभाग दफ्तरों ने जानकारी दी है कि उनके जिलों में कैंसर से प्रभावित कोई पशु ही नहीं है।
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चंदबाजा का आरोप है कि कुछ जिले अधुरी जानकारी दे रहे है जबकि कई जिलों ने गलत जानकारी उपलब्ध करवाई है। साल 2010 में आरटीआई के तहत मांगी जानकारी में पशु पालन विभाग ने होशियारपुर में 37 ,लुधियाना में 46 , फरीदकोट में 90, पटियाला में 23 पशुओं में कैंसर होने की पुष्टि की थी। अब यहीं जिले आंकड़े छिपाने की कोशिश कर रहे है। उन्होंने बताया वर्ष 2018 में भी सोसायटी ने सभी जिलों से कैंसर प्रभावित पशुओं की जानकारी मांगी थी, उस समय भी ज्यादातर जिलों ने अपने यहां कोई भी कैंसर प्रभावित पशु नहीं होने के दावे किए थे। उन्होंने कहा कि अब जिन जिलों से कैंसर प्रभावित पशुओं का आंकड़ा मिला है, वह सिर्फ पालतू पशुओं का ही है। सड़कों पर लावारिस घूमने वाले पशुओं को शामिल किया जाए तो आंकड़ा बढ़ेगा।
तथ्य छिपाने की जगह ठोस हल निकालें सरकार: चंदबाजा
सोसायटी के प्रधान गुरप्रीत सिंह चंदबाजा का कहना है कि सूबे में कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग के साथ प्रदूषित हो चुके हवा, पानी के कारण कैंसरतेजी से फैल रहा है, जिसकी चपेट में मनुष्यों के साथ साथ पशु भी आ रहे है। ऐसे हालात में तथ्य छिपाने की जगह हल निकालने के प्रयास करना चाहिए। साथ ही गलत जानकारियां देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। सोसायटी ने सूचना देने में आनाकानी करने वाले पशु पालन विभाग के खिलाफ राज्य सूचना कमिश्नर के पास अपील दायर करने का फैसला किया है।
सभी केस संदिग्ध, पुष्टि के लिए लैब नहीं: डॉ. गौतम प्रसाद
पशु पालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. गौतम प्रसाद का कहना है कि पशुओं में कैंसर होने के सभी केस संदिग्ध ही है। पूरे सूबे में पशुओं को कैंसर की बीमारी संबंधी पड़ताल करवाने के लिए कोई लैब नहीं है और न ही पशु पालन विभाग के पास कैंसर के स्पेशलिस्ट वेटरिनरी डाक्टर है।