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डिपोर्ट होगा मूसेवाला मर्डर का मास्टरमाइंड: कनाडा ने शुरू की 296 गैंगस्टरों की डिपोर्टेशन की प्रक्रिया
Fri, 20 Feb 2026 11:11 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 20 Feb 2026 11:11 AM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि डिपोर्टेशन और प्रत्यर्पण अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं और आरोपी शरण या मानवाधिकार के आधार पर अपील कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
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- फोटो : फाइल
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विस्तार
कनाडा सरकार ने संगठित अपराध, अंतरराष्ट्रीय गैंग नेटवर्क और अलगाववादी गतिविधियों पर सख्ती दिखाते हुए 296 संदिग्ध गैंगस्टरों और आपराधिक तत्वों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
शुरुआती चरण में 32 आरोपियों के खिलाफ रिमूवल आदेश जारी किए गए हैं। सूची में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के कथित मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ का नाम भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, कनाडाई एजेंसियों ने रंगदारी, ड्रग तस्करी, टारगेट किलिंग और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गठजोड़ की जांच कर सूची तैयार की। इसमें ऐसे आरोपी भी शामिल हैं जिनके खिलाफ भारत में हत्या, जबरन वसूली और आतंक से जुड़े मामले दर्ज हैं।
गोल्डी बराड़ पर बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने के आरोप हैं। लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क के कई अन्य सदस्य भी सूची में हैं, जिन पर पंजाब व अन्य राज्यों में अपराध संचालित करने के आरोप हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिपोर्टेशन और प्रत्यर्पण अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं और आरोपी शरण या मानवाधिकार के आधार पर अपील कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
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कनाडा की यह कार्रवाई संगठित अपराध और अलगाववादी नेटवर्क के खिलाफ कड़ा संदेश मानी जा रही है। अब नजर है कि घोषित 296 में से कितनों को भारत या अन्य देशों को सौंपा जाएगा।
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शुरुआती चरण में 32 आरोपियों के खिलाफ रिमूवल आदेश जारी किए गए हैं। सूची में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के कथित मास्टरमाइंड गोल्डी बराड़ का नाम भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, कनाडाई एजेंसियों ने रंगदारी, ड्रग तस्करी, टारगेट किलिंग और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गठजोड़ की जांच कर सूची तैयार की। इसमें ऐसे आरोपी भी शामिल हैं जिनके खिलाफ भारत में हत्या, जबरन वसूली और आतंक से जुड़े मामले दर्ज हैं।
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गोल्डी बराड़ पर बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ने के आरोप हैं। लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क के कई अन्य सदस्य भी सूची में हैं, जिन पर पंजाब व अन्य राज्यों में अपराध संचालित करने के आरोप हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डिपोर्टेशन और प्रत्यर्पण अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं और आरोपी शरण या मानवाधिकार के आधार पर अपील कर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
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कनाडा की यह कार्रवाई संगठित अपराध और अलगाववादी नेटवर्क के खिलाफ कड़ा संदेश मानी जा रही है। अब नजर है कि घोषित 296 में से कितनों को भारत या अन्य देशों को सौंपा जाएगा।