पंजाब भाजपा में सब सही नहीं: पार्टी के लिए मुसीबत में खड़े रहने को विधानसभा चुनाव में नहीं मिला टिकट
भाजपा के लिए दिक्कत यह है कि सारा नियंत्रण दिल्ली के हाथ में चला गया है और वहां पर मनजिंदर सिंह सिरसा से लेकर गजेंद्र सिंह शेखावत पूरी राजनीतिक बिसात तैयार कर रहे हैं। पार्टी के लिए हरजीत ग्रेवाल ने सबसे ज्यादा किसानों का विरोध किया।
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भाजपा में सब ठीकठाक नहीं चल रहा है। पार्टी के लिए मुसीबत के वक्त पंजाब के जिन नेताओं ने खुलकर किसान संगठनों का विरोध किया, उनका ही भाजपा ने टिकट काट दिया। पार्टी के लिए वफा करने वाले आज अपनी जमीन तलाश रहे हैं। लिहाजा इस बात को लेकर खासा रोष है कि जिन नेताओं ने किसान संगठनों के अलावा लोगों की सोशल मीडिया पर गालियां सहीं, आज उन पर ही सितम ढहाया गया है।
पार्टी के लिए दिक्कत यह है कि सारा नियंत्रण दिल्ली के हाथ में चला गया है और वहां पर मनजिंदर सिंह सिरसा से लेकर गजेंद्र सिंह शेखावत पूरी राजनीतिक बिसात तैयार कर रहे हैं। पार्टी के लिए हरजीत ग्रेवाल ने सबसे ज्यादा किसानों का विरोध किया। किसान संगठनों ने ग्रेवाल की जमीन तक पर खेती नहीं करने दी। फोन कर कई किसान व सिख नेताओं ने ग्रेवाल को धमकियां दीं और अश्लील गालियां निकालीं, लेकिन ग्रेवाल पार्टी के लिए खड़े रहे। अंतिम समय तक भाजपा के साथ मिलकर किसान जत्थेबंदियों से टक्कर लेते रहे। भाजपा ने ग्रेवाल को टिकट ही नहीं दिया। वह राजपुरा से लड़ने के इच्छुक थे।
अमित तनेजा को मिलीं धमकियां, नहीं छोड़ा पार्टी का साथ
भाजपा ने समझौते के तहत राजपुरा सीट पर पार्टी में शामिल हुए जगदीश जग्गा को राजपुरा से चुनावी में उतारा है। किसान आंदोलन के दौरान जगदीश जग्गा के खिलाफ भाजपा नेता हरजीत ग्रेवाल ने खूब बयानबाजी की थी। जालंधर कैंट से विधानसभा सीट के प्रबल दावेदार अमित तनेजा पर भी सितम हुआ है। उन्होंने टिकट के लिए दिल्ली तक पूरी ताकत झोंकी, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया। तनेजा ने किसान आंदोलन के दौरान लाइव होकर कई बार किसान संगठनों को कठघरे में खड़ा किया। लाइव पर लोगों की खासी नाराजगी व भद्दी शब्दावली भी उनके प्रति इस्तेमाल की गई। उनकी जान को खतरा होने की बात भी बार-बार एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आई। तनेजा को खालिस्तान संगठन की तरफ से धमकी मिली, लेकिन उन्होंने पार्टी के प्रति स्टैंड नहीं छोड़ा। पार्टी ने उनके स्थान पर अकाली दल छोड़कर शामिल हुए पूर्व विधायक सर्बजीत सिंह मक्कड़ को टिकट देकर मैदान में उतार दिया।
विनीत जोशी ने किसानों पर निकाली थी भड़ास
किसान आंदोलन में विनीत जोशी ने भी खूब किसानों पर भड़ास निकाली और पार्टी के लिए अडिग रहे। कृषि कानून पर कई बार सकारात्मक विचार देकर किसानों के निशाने पर रहे। जोशी ने अपने लिए खरड़ से टिकट मांगा, लेकिन पार्टी ने दरकिनार कर दिया। पार्टी का पक्ष मजबूती से मदन मोहन मित्तल भी रखते रहे, जो पंजाब में मजबूत स्तंभ माने जाते हैं। किसान आंदोलन के दौरान पंजाब भाजपा की तरफ से वह फ्रंट फुट पर रहे, लेकिन बाद में टिकट कट गया। इसके बाद वह शनिवार को अकाली दल में शामिल हो गए। मित्तल पंजाब के पूर्व मंत्री रह चुके हैं और रोपड़ व नंगल विधानसभा हलके का प्रतिनिधित्व करते हैं। किसानी आंदोलन में पार्टी के खिलाफ बोलने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल जोशी पहले ही अकाली दल में शामिल हो चुके हैं। पार्टी के नेता दबी जुबान से कह रहे हैं कि नए नेताओं के चक्कर में उन नेताओं का सियासी कत्ल किया जा रहा है जो मुसीबत के समय पार्टी के साथ खड़े रहे हैं।